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Kaithal News: दादी सती स्थल पर मेले में जुटे श्रद्धालु
Sun, 25 Aug 2024 04:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 25 Aug 2024 04:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पाई। करोड़ा गांव में शनिवार को दादी सती स्थल पर मेला लगाया। इस दौरान यहां पर हवन कर भंडारा आयोजित किया। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु जुटे।
दादी सती ट्रस्ट के प्रधान सत्यवान व मंदिर के पुजारी विनोद शर्मा ने बताया कि दादी सती स्थल पर प्रति वर्ष भादव कृष्ण पक्ष पंचमी को मनाई जाती है। बताया कि इस स्थल पर लगभग 10 से 15 हजार की संख्या में ग्रामवासी व आसपास के गांव के लोगों भंडारे का प्रसाद लेते है और अपनी मांग मांगते है।
उन्होंने बताया कि सुबह हवन, भंडारे व मेले का आयोजन किया गया। हवन व भंडारे में सत्यवान, जगदीश, महिपाल, दिलबाग, संजीव, मोहन, पप्पू, रामनाथ, गंगाराम, कर्म सिंह, जोगी राम, भानू राम, रतन राम, चूडि़या राम, हरिचंद, माया राम, नानू राम, रोशन लाल आदि ने भाग लिया।
कौन थी सती ः बुजुर्ग हरिचंद करोड़ा ने बताया कि कई सदियों पूर्व करोड़ा गांव के जाट समुदाय के एक युवक का रिश्ता बिठमड़ा गांव की कन्या से हुआ था। यह युवक पास के ही जंगल में भैंसें चुगाने के लिए गया हुआ था, तो उसको सांप ने काट लिया। जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
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युवती अपने गांव में थी और रात को उसको सपने में दिखाई दिया की उसके पति की जंगल में सांप के काटने से मृत्यु हो गई है। उसके कहने पर उसके परिवार व उसके गांव वाले उस जंगल में आये, जहां पर उस युवती ने बताया था।
उन्होंने आकर देखा कि उसके पति का शव वहां पर पड़ा हुआ है। इस पर उस युवती ने अपने पति के साथ चिता में जलने का निर्णय लिया। जिससे वह सती बन गई। बताया कि करोड़ा गांव का रहने वाला यदि कितनी भी दूर हो तो भादव कृष्ण पक्ष की पंचमी को वह सती दादी के मंदिर में जरूर पूजा करने आता है।
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पाई। करोड़ा गांव में शनिवार को दादी सती स्थल पर मेला लगाया। इस दौरान यहां पर हवन कर भंडारा आयोजित किया। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु जुटे।
दादी सती ट्रस्ट के प्रधान सत्यवान व मंदिर के पुजारी विनोद शर्मा ने बताया कि दादी सती स्थल पर प्रति वर्ष भादव कृष्ण पक्ष पंचमी को मनाई जाती है। बताया कि इस स्थल पर लगभग 10 से 15 हजार की संख्या में ग्रामवासी व आसपास के गांव के लोगों भंडारे का प्रसाद लेते है और अपनी मांग मांगते है।
उन्होंने बताया कि सुबह हवन, भंडारे व मेले का आयोजन किया गया। हवन व भंडारे में सत्यवान, जगदीश, महिपाल, दिलबाग, संजीव, मोहन, पप्पू, रामनाथ, गंगाराम, कर्म सिंह, जोगी राम, भानू राम, रतन राम, चूडि़या राम, हरिचंद, माया राम, नानू राम, रोशन लाल आदि ने भाग लिया।
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कौन थी सती ः बुजुर्ग हरिचंद करोड़ा ने बताया कि कई सदियों पूर्व करोड़ा गांव के जाट समुदाय के एक युवक का रिश्ता बिठमड़ा गांव की कन्या से हुआ था। यह युवक पास के ही जंगल में भैंसें चुगाने के लिए गया हुआ था, तो उसको सांप ने काट लिया। जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
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युवती अपने गांव में थी और रात को उसको सपने में दिखाई दिया की उसके पति की जंगल में सांप के काटने से मृत्यु हो गई है। उसके कहने पर उसके परिवार व उसके गांव वाले उस जंगल में आये, जहां पर उस युवती ने बताया था।
उन्होंने आकर देखा कि उसके पति का शव वहां पर पड़ा हुआ है। इस पर उस युवती ने अपने पति के साथ चिता में जलने का निर्णय लिया। जिससे वह सती बन गई। बताया कि करोड़ा गांव का रहने वाला यदि कितनी भी दूर हो तो भादव कृष्ण पक्ष की पंचमी को वह सती दादी के मंदिर में जरूर पूजा करने आता है।