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Kaithal News: शिव मंदिर खंडालवा में उमड़ रहे भक्त
Thu, 01 Aug 2024 05:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 01 Aug 2024 05:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव खंडालवा स्थित शिवधाम पर प्राचीन पुराना शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि श्री राम के पूर्वज राजा खट्वांग की आराधना से खंडालवा का शिवलिंग उत्पन्न हुआ था। दो अगस्त को पड़ने वाली शिवरात्रि के लिए यहां जोरदार तैयारी की जा रही है।
सावन के महीने में यहां पर भोले के भक्त उमड़ रहे हैं। यहां शिव मंदिर में भोलेबाबा का चंदन आदि के साथ किया गया शृंगार श्रद्धालुओं को बहुत भा रहा है। प्राचीन शिव मंदिर महंत रघुनाथ गिरि ने बताया कि कलायत के बे-चिराग गांव खंडालवा स्थित शिवलिंग करीब पांच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर में स्थापित पवित्र शिवलिंग को पाताल लोक से प्रकट हुआ बताया जाता है। यही कारण है कि यहां शिवशंभू को पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है।
मंदिर एक टीले पर बना है। बेशक गांव में कोई परिवार नहीं रहता, लेकिन इस स्थान की धार्मिक महिमा दूर-दूर तक है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का संबंध भगवान राम की वंशावली से जुड़ा है। महंत ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर की ऊंचाई 151 फीट जिसमें 30 फीट जमीन के अंदर, 110 फीट मंदिर की ऊंचाई और 11 फीट कलश की ऊंचाई है। प्रबंध समिति प्रधान मास्टर बलबीर मटौर ने बताया कि राजा खट्वांग द्वारा राज काज का परित्याग कर खड़ालवा में भगवान शिव का तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिव भगवान प्रकट हुए।
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राजा खट्वांग ने भगवान शिव से हर जन्म में प्रभु भक्ति की कामना जाहिर की। उसी का परिणाम था कि वे यहां खट्वांग के नाम से जाने गए। महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि मंदिर परिसर में कांवडियों का आना शुरू हो चुका है। इस बार लगभग 25 हजार कावंड चढ़ाए जाने की उम्मीद है। पर्व को ध्यान में रखते हुए प्रबंध समिति ने सभी व्यवस्थाओं को पूरा कर लिया है। इस समय 24 घंटे पूजा अर्चना व भंडारा शुरू हो चुका है।
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कलायत। कलायत से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव खंडालवा स्थित शिवधाम पर प्राचीन पुराना शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि श्री राम के पूर्वज राजा खट्वांग की आराधना से खंडालवा का शिवलिंग उत्पन्न हुआ था। दो अगस्त को पड़ने वाली शिवरात्रि के लिए यहां जोरदार तैयारी की जा रही है।
सावन के महीने में यहां पर भोले के भक्त उमड़ रहे हैं। यहां शिव मंदिर में भोलेबाबा का चंदन आदि के साथ किया गया शृंगार श्रद्धालुओं को बहुत भा रहा है। प्राचीन शिव मंदिर महंत रघुनाथ गिरि ने बताया कि कलायत के बे-चिराग गांव खंडालवा स्थित शिवलिंग करीब पांच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर में स्थापित पवित्र शिवलिंग को पाताल लोक से प्रकट हुआ बताया जाता है। यही कारण है कि यहां शिवशंभू को पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है।
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मंदिर एक टीले पर बना है। बेशक गांव में कोई परिवार नहीं रहता, लेकिन इस स्थान की धार्मिक महिमा दूर-दूर तक है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का संबंध भगवान राम की वंशावली से जुड़ा है। महंत ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर की ऊंचाई 151 फीट जिसमें 30 फीट जमीन के अंदर, 110 फीट मंदिर की ऊंचाई और 11 फीट कलश की ऊंचाई है। प्रबंध समिति प्रधान मास्टर बलबीर मटौर ने बताया कि राजा खट्वांग द्वारा राज काज का परित्याग कर खड़ालवा में भगवान शिव का तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिव भगवान प्रकट हुए।
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राजा खट्वांग ने भगवान शिव से हर जन्म में प्रभु भक्ति की कामना जाहिर की। उसी का परिणाम था कि वे यहां खट्वांग के नाम से जाने गए। महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि मंदिर परिसर में कांवडियों का आना शुरू हो चुका है। इस बार लगभग 25 हजार कावंड चढ़ाए जाने की उम्मीद है। पर्व को ध्यान में रखते हुए प्रबंध समिति ने सभी व्यवस्थाओं को पूरा कर लिया है। इस समय 24 घंटे पूजा अर्चना व भंडारा शुरू हो चुका है।