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Kaithal News: बाल लीलाओं, मथुरा गमन व रुक्मिणी विवाह का किया वर्णन
Thu, 21 Mar 2024 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 21 Mar 2024 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में चल रह श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास देवी हरिप्रिया ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं, कंस मर्दन व श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की अमृत वर्षा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बीच बीच में सुंदर-सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई।
छठे दिन कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का वर्णन करते कथा व्यास ने कहा कि महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गई। कहने लगी हे कन्हैया जब हमें छोड़कर ही जाना था तो प्रेम क्यों किया। गोपी उद्धव संवाद के रहस्य को बताते हुए हरिप्रिया ने कहा कि जब जीव में अभिमान आता है तब भगवान उनसे दूर हो जाता है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है और उसे दर्शन देते है।
भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी के साथ हुआ, लेकिन रुक्मिणी को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मिणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नहीं तो फिर उस धन का चोरी, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है।
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श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मिणी के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के सफल संचालन में यजमान जबर सिंह राणा एवं परिवार में अपनी महत्ती भूमिका का निर्वहन करते हुए विवाह संपन्न करवाया और श्रद्धालुओं में प्रसाद का
वितरण किया।
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कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में चल रह श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास देवी हरिप्रिया ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं, कंस मर्दन व श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की अमृत वर्षा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बीच बीच में सुंदर-सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई।
छठे दिन कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का वर्णन करते कथा व्यास ने कहा कि महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गई। कहने लगी हे कन्हैया जब हमें छोड़कर ही जाना था तो प्रेम क्यों किया। गोपी उद्धव संवाद के रहस्य को बताते हुए हरिप्रिया ने कहा कि जब जीव में अभिमान आता है तब भगवान उनसे दूर हो जाता है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है और उसे दर्शन देते है।
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भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी के साथ हुआ, लेकिन रुक्मिणी को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मिणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नहीं तो फिर उस धन का चोरी, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है।
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श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मिणी के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के सफल संचालन में यजमान जबर सिंह राणा एवं परिवार में अपनी महत्ती भूमिका का निर्वहन करते हुए विवाह संपन्न करवाया और श्रद्धालुओं में प्रसाद का
वितरण किया।