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Kaithal News: कृषि उपनिदेशक निलंबित
Fri, 12 Jul 2024 06:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कृषि विभाग कैथल में तैनात एक जिला स्तर के अधिकारी पर रिश्वत लेने संबंधी एक ऑडियो व रिश्वत की लिस्ट व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल होने के मामले में अब कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. बलवंत को विभाग ने निलंबित कर दिया है। इस मामले में कृषि विभाग के मुख्यालय की ओर से पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी गई है।
गौरतलब है कि बुधवार को ही डीडीए की ओर से हटाए गए अनुबंध पर लिपिक प्रगट सिंह के खिलाफ सिविल लाइन थाना की पुलिस को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पर नियुक्त होने की शिकायत दी थी। इसके बाद अधिकारी व कर्मचारी आमने-सामने हो गए थे और हटाए गए कर्मी प्रगट सिंह मीडिया के सामने भी आए थे।
निलंबित किए गए कृषि विभाग के जिला उप निदेशक ने प्रगट सिंह पर बोगस दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति का आरोप लगाया था। इसके बाद इस मामले में पुलिस ने कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की थी।
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यह है पूरा मामला ः दो दिन पहले ही वाट्सएप ग्रुपों में कृषि विभाग के उपनिदेशक की ओर से रिश्वत लेने की एक ऑडियो व सूची वायरल हुई है। जारी की गई सूची में चार हजार से लेकर 20 लाख रुपये तक की रिश्वत देने का जिक्र हुआ था।
आरोप लगाने वाले कर्मी का कहना था कि विभाग के कर्मचारियों कभी स्टॉक रजिस्टर पूरा न होने के नाम पर तो कभी दवाइयों के सैंपल लेने का डर दिखाकर रिश्वत लेता है। यह भी सामने आया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों ने चीका में एक पेस्टीसाइड का गोदाम सील किया था।
आरोप था कि इस गोदाम में नकली दवाइयां जमा की गई है। बाद में जब इस गोदाम को खोला गया तो उसमें से दवाइयां गायब मिली। आरोप है कि अधिकारियों ने किसी मृतक व्यक्ति के नाम किरायानामा संबंधी तस्दीकशुदा शपथ पत्र लेकर मामले को रफा दफा कर दिया था।
डीडीए ने हटाए गए कर्मी के खिलाफ यह दी थी शिकायत ः सिविल लाइन थाना पुलिस में डीडीए बलवंत सिंह ने शिकायत देकर बताया था कि पूंडरी निवासी प्रगट सिंह 16 अक्तूबर 2020 को कार्यालय में आत्मा स्कीम के तहत लिपिक के पद पर नियुक्त हुआ था। उसे विभाग की ओर से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से योग्यता से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया था।
जब उसने इस पद के लिए अपेक्षित योग्यता से संबंधित प्रस्तुत प्रस्तुत किए तो दस्तावेज बोगस व जाली पाएगा। इसके बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर कार्यभार से मुक्त कर दिया था। उसने जो वेतन प्राप्त किया, वह भी जाली तरीके से पाया। जबकि प्रगट सिंह की इस पद के लिए पात्रता नहीं बनती थी।
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कैथल। कृषि विभाग कैथल में तैनात एक जिला स्तर के अधिकारी पर रिश्वत लेने संबंधी एक ऑडियो व रिश्वत की लिस्ट व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल होने के मामले में अब कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. बलवंत को विभाग ने निलंबित कर दिया है। इस मामले में कृषि विभाग के मुख्यालय की ओर से पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी गई है।
गौरतलब है कि बुधवार को ही डीडीए की ओर से हटाए गए अनुबंध पर लिपिक प्रगट सिंह के खिलाफ सिविल लाइन थाना की पुलिस को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पर नियुक्त होने की शिकायत दी थी। इसके बाद अधिकारी व कर्मचारी आमने-सामने हो गए थे और हटाए गए कर्मी प्रगट सिंह मीडिया के सामने भी आए थे।
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निलंबित किए गए कृषि विभाग के जिला उप निदेशक ने प्रगट सिंह पर बोगस दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति का आरोप लगाया था। इसके बाद इस मामले में पुलिस ने कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की थी।
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यह है पूरा मामला ः दो दिन पहले ही वाट्सएप ग्रुपों में कृषि विभाग के उपनिदेशक की ओर से रिश्वत लेने की एक ऑडियो व सूची वायरल हुई है। जारी की गई सूची में चार हजार से लेकर 20 लाख रुपये तक की रिश्वत देने का जिक्र हुआ था।
आरोप लगाने वाले कर्मी का कहना था कि विभाग के कर्मचारियों कभी स्टॉक रजिस्टर पूरा न होने के नाम पर तो कभी दवाइयों के सैंपल लेने का डर दिखाकर रिश्वत लेता है। यह भी सामने आया कि पिछले दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों ने चीका में एक पेस्टीसाइड का गोदाम सील किया था।
आरोप था कि इस गोदाम में नकली दवाइयां जमा की गई है। बाद में जब इस गोदाम को खोला गया तो उसमें से दवाइयां गायब मिली। आरोप है कि अधिकारियों ने किसी मृतक व्यक्ति के नाम किरायानामा संबंधी तस्दीकशुदा शपथ पत्र लेकर मामले को रफा दफा कर दिया था।
डीडीए ने हटाए गए कर्मी के खिलाफ यह दी थी शिकायत ः सिविल लाइन थाना पुलिस में डीडीए बलवंत सिंह ने शिकायत देकर बताया था कि पूंडरी निवासी प्रगट सिंह 16 अक्तूबर 2020 को कार्यालय में आत्मा स्कीम के तहत लिपिक के पद पर नियुक्त हुआ था। उसे विभाग की ओर से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से योग्यता से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया था।
जब उसने इस पद के लिए अपेक्षित योग्यता से संबंधित प्रस्तुत प्रस्तुत किए तो दस्तावेज बोगस व जाली पाएगा। इसके बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर कार्यभार से मुक्त कर दिया था। उसने जो वेतन प्राप्त किया, वह भी जाली तरीके से पाया। जबकि प्रगट सिंह की इस पद के लिए पात्रता नहीं बनती थी।