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Kaithal News: मलेरिया पर सतर्क हुआ विभाग, शुरू किया मास सर्वे
Sun, 14 Apr 2024 04:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 14 Apr 2024 04:38 AM IST
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कैथल। गर्मी का मौसम शुरू होने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग मलेरिया व डेंगू को लेकर सतर्क हो गया है। इसको लेकर विभाग ने मास सर्वे शुरू कर दिया है। मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अब रैपिड रिस्पांस टीमें बना दी हैं।
इसके तहत जिले के सभी 277 गावों के लिए टीमें बनाई गईं हैं जबकि अकेले कैथल शहर के लिए 28 टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें घर-घर पहुंचकर बुखार को लेकर जानकारी प्राप्त करेंगी। इसके साथ ही जिले के 577 तालाबों में गंबूजियां मछलियां डाली गईं हैं। अब जिले में प्रतिदिन मलेरिया की रैपिड रिस्पांस टीमें मलेरिया को लेकर जांच कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि मलेरिया एक मच्छर द्वारा फैलाया गया खतरनाक रोग है। यह प्लासमोडियम नामक पैरासाइट से उत्पादित होता है। मच्छरों से आदमी तक आने के लिए एक एनाफिलीज मच्छर का काटना ही काफी होता है। काटे गये इंसान के खून में जा कर यह पैरासाइट बनने लगता है। यह शरीर के रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करने लगता है।
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ठंड लगने के साथ बुखार चढ़ने लगता है। सिरदर्द, मतली, उच्च बुखार, उल्टी, पेट में दर्द, रक्ताल्पता व अधिक पसीना आना मलेरिया के लक्षण माने जाते हैं।
मलेरिया से बचाव कैसे करें-
- घर के आस-पास गंदगी और पानी इकठ्ठा न होने दें।
- बारिश शुरू होने से पहले ही घर के पास की नालियों की सफाई करें।
- नालियों व गली और घर के बाहर पानी न होने दें।
- घर के आस-पास समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
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मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई है। इसके तहत जिले में सभी 277 गावों में टीमें बना दी गई हैं। यह टीमें रैपिड रिस्पांस टीम हैं। इसमें शहर के लिए 28 टीमों का भी गठन किया गया है। इन टीमों ने अब डोर-टू-डोर सर्वे करके बुखार को लेकर जांच शुरू कर दी है।
- डॉ. नीरज मंगला, जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल।
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इसके तहत जिले के सभी 277 गावों के लिए टीमें बनाई गईं हैं जबकि अकेले कैथल शहर के लिए 28 टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें घर-घर पहुंचकर बुखार को लेकर जानकारी प्राप्त करेंगी। इसके साथ ही जिले के 577 तालाबों में गंबूजियां मछलियां डाली गईं हैं। अब जिले में प्रतिदिन मलेरिया की रैपिड रिस्पांस टीमें मलेरिया को लेकर जांच कर रही हैं।
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उल्लेखनीय है कि मलेरिया एक मच्छर द्वारा फैलाया गया खतरनाक रोग है। यह प्लासमोडियम नामक पैरासाइट से उत्पादित होता है। मच्छरों से आदमी तक आने के लिए एक एनाफिलीज मच्छर का काटना ही काफी होता है। काटे गये इंसान के खून में जा कर यह पैरासाइट बनने लगता है। यह शरीर के रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करने लगता है।
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ठंड लगने के साथ बुखार चढ़ने लगता है। सिरदर्द, मतली, उच्च बुखार, उल्टी, पेट में दर्द, रक्ताल्पता व अधिक पसीना आना मलेरिया के लक्षण माने जाते हैं।
मलेरिया से बचाव कैसे करें-
- घर के आस-पास गंदगी और पानी इकठ्ठा न होने दें।
- बारिश शुरू होने से पहले ही घर के पास की नालियों की सफाई करें।
- नालियों व गली और घर के बाहर पानी न होने दें।
- घर के आस-पास समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई है। इसके तहत जिले में सभी 277 गावों में टीमें बना दी गई हैं। यह टीमें रैपिड रिस्पांस टीम हैं। इसमें शहर के लिए 28 टीमों का भी गठन किया गया है। इन टीमों ने अब डोर-टू-डोर सर्वे करके बुखार को लेकर जांच शुरू कर दी है।
- डॉ. नीरज मंगला, जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल।