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Kaithal News: शब्द रूप प्रतियोगिता में किया ज्ञान का प्रदर्शन
Fri, 17 Oct 2025 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 17 Oct 2025 01:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग की ओर से शब्द रूप प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इसकी शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल वत्स ने की।
प्रतियोगिता को और अधिक रोचक व शास्त्रीय बनाने के लिए छात्रों को प्राचीन ऋषियों के नाम पर पांच समूहों में विभाजित किया गया — वाल्मीकि गण, विश्वामित्र गण, भारद्वाज गण, वसिष्ठ गण और अगस्त्य गण। इन टीमों के बीच ज्ञान की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
कार्यक्रम के संयोजन और प्रबंधन में डॉ. शर्मिला का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित रूप में संपन्न कराया। वहीं, डॉ. सविता ने अपने ओजस्वी और मधुर मंच संचालन से कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन केवल पुस्तकीय न रहकर व्यावहारिक जीवन में भी उतारना चाहिए। आगामी दीपावली के संदर्भ में उन्होंने सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि हमें प्रदूषण मुक्त, हरित और सुरक्षित दीपावली मनाने का संकल्प अपनाना चाहिए। कार्यक्रम शांति मंत्र के साथ समाप्त हुआ।
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परिणाम
n
प्रथम स्थान: वाल्मीकि गण
n
द्वितीय स्थान: भारद्वाज गण
n
तृतीय स्थान: अगस्त्य गण
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग की ओर से शब्द रूप प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इसकी शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल वत्स ने की।
प्रतियोगिता को और अधिक रोचक व शास्त्रीय बनाने के लिए छात्रों को प्राचीन ऋषियों के नाम पर पांच समूहों में विभाजित किया गया — वाल्मीकि गण, विश्वामित्र गण, भारद्वाज गण, वसिष्ठ गण और अगस्त्य गण। इन टीमों के बीच ज्ञान की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
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कार्यक्रम के संयोजन और प्रबंधन में डॉ. शर्मिला का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित रूप में संपन्न कराया। वहीं, डॉ. सविता ने अपने ओजस्वी और मधुर मंच संचालन से कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन केवल पुस्तकीय न रहकर व्यावहारिक जीवन में भी उतारना चाहिए। आगामी दीपावली के संदर्भ में उन्होंने सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि हमें प्रदूषण मुक्त, हरित और सुरक्षित दीपावली मनाने का संकल्प अपनाना चाहिए। कार्यक्रम शांति मंत्र के साथ समाप्त हुआ।
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प्रथम स्थान: वाल्मीकि गण
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द्वितीय स्थान: भारद्वाज गण
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तृतीय स्थान: अगस्त्य गण