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मन की आंखों से दुनिया को देखते हैं डीसी रविप्रकाश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 12:22 AM IST
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डीसी
- फोटो : ब्यूरो
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कैथल। कैथल में नवनियुक्त डीसी रविप्रकाश गुप्ता का मानना है कि जो भी मेहनत करेगा, उसे उसका फल यानी उसका मुकाम मिल जाएगा। डीसी के तौर पर पहली बार नियुक्ति के बाद सप्ताह भर में जिले को अच्छी तरह से जानने के बाद उन्होंने जनता की समस्याओं का समाधान करना शुरू कर दिया है। स्थानीय निकाय चुनाव पर डीसी ने अभी से अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। उनका कहना है कि जिले में चुनाव निष्पक्षता से होंगे। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वर्ष 2007 बैच के आईएएस डीसी रविप्रकाश गुप्ता आंखों की बजाय मन की आंखों से इस दुनिया को देखते हैं। इसमें उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती।
एक सप्ताह पहले आईएएस रविप्रकाश गुप्ता ने कैथल में बतौर डीसी कार्यभार ग्रहण किया था। वह कार्यालय में आने वाले लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। अधिकारियों की बैठकें ले रहे हैं। मोबाइल से लेकर लैपटॉप तक सभी उपकरण अच्छे ढंग से चला रहे हैं। लैपटॉप के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की सहायता लेते हैं। वहीं अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले के सभी प्रकार के हालातों पर चर्चा कर रहे हैं। जिले के सभी 277 ग्राम पंचायतों के भ्रमण का भी फैसला ले चुके हैं।
खुद के बारे में बहुत ही कम बोलने वाले रविप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि संसद ने एक्ट पास किया तो समाज में उन्हें सुविधाएं मिली हैं। उनका मनोबल बढ़ा है। उसी की वजह से प्रयास किया और रास्ते खुलते गए। वे बताते हैं कि वे पहले ऐसे डीसी नहीं हैं। उनसे पहले मध्य प्रदेश में गोपाल कृष्ण तिवारी दिव्यांग डीसी हैं जो डेढ़ साल से डीसी का कार्य देख रहे हैं।
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हरियाणा में वे पहले हैं। वे डीसी से पहले एडीसी, एसडीएम एवं वित्त सचिव रह चुके हैं। उन्हें आज तक कोई परेशानी नहीं आई। शुरू में महिलाएं जब जॉब के लिए निकलीं थीं तो उन्हें भी परेशानी आई थी। कुछ लोगों की सोच रहती है। जो धीरे-धीरे बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि वे खुद कोई उदहारण नहीं बनना चाहते। बस अपना काम करना चाहते हैं। वे महान नहीं हैं। साधारण रहकर साधारण काम करना चाहते हैं। जिसने प्रेरणा लेनी होगी, वह खुद ही ले लेगा।
डीसी गुप्ता ने कहा कि कैथल जिला महाभारत युद्ध स्थल का भाग है। यह ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। पहले यहां से सरस्वती नदी भी निकलती थी। आज भी कई जगह उसके निशान बचे हैं। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले जिले के लोगों का रवैया भी सही है। यहां सरकार ने संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने की मंजूरी दी है। इसके लिए गांव मूंदड़ी में शीघ्र ही जगह फाइनल कर दी जाएगी। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, शौचालय बनाने सहित कई योजनाओं में काफी अच्छा काम हुआ है।
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वर्ष 2007 बैच के आईएएस डीसी रविप्रकाश गुप्ता आंखों की बजाय मन की आंखों से इस दुनिया को देखते हैं। इसमें उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती।
एक सप्ताह पहले आईएएस रविप्रकाश गुप्ता ने कैथल में बतौर डीसी कार्यभार ग्रहण किया था। वह कार्यालय में आने वाले लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। अधिकारियों की बैठकें ले रहे हैं। मोबाइल से लेकर लैपटॉप तक सभी उपकरण अच्छे ढंग से चला रहे हैं। लैपटॉप के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की सहायता लेते हैं। वहीं अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले के सभी प्रकार के हालातों पर चर्चा कर रहे हैं। जिले के सभी 277 ग्राम पंचायतों के भ्रमण का भी फैसला ले चुके हैं।
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खुद के बारे में बहुत ही कम बोलने वाले रविप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि संसद ने एक्ट पास किया तो समाज में उन्हें सुविधाएं मिली हैं। उनका मनोबल बढ़ा है। उसी की वजह से प्रयास किया और रास्ते खुलते गए। वे बताते हैं कि वे पहले ऐसे डीसी नहीं हैं। उनसे पहले मध्य प्रदेश में गोपाल कृष्ण तिवारी दिव्यांग डीसी हैं जो डेढ़ साल से डीसी का कार्य देख रहे हैं।
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हरियाणा में वे पहले हैं। वे डीसी से पहले एडीसी, एसडीएम एवं वित्त सचिव रह चुके हैं। उन्हें आज तक कोई परेशानी नहीं आई। शुरू में महिलाएं जब जॉब के लिए निकलीं थीं तो उन्हें भी परेशानी आई थी। कुछ लोगों की सोच रहती है। जो धीरे-धीरे बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि वे खुद कोई उदहारण नहीं बनना चाहते। बस अपना काम करना चाहते हैं। वे महान नहीं हैं। साधारण रहकर साधारण काम करना चाहते हैं। जिसने प्रेरणा लेनी होगी, वह खुद ही ले लेगा।
डीसी गुप्ता ने कहा कि कैथल जिला महाभारत युद्ध स्थल का भाग है। यह ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। पहले यहां से सरस्वती नदी भी निकलती थी। आज भी कई जगह उसके निशान बचे हैं। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले जिले के लोगों का रवैया भी सही है। यहां सरकार ने संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने की मंजूरी दी है। इसके लिए गांव मूंदड़ी में शीघ्र ही जगह फाइनल कर दी जाएगी। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, शौचालय बनाने सहित कई योजनाओं में काफी अच्छा काम हुआ है।