{"_id":"b0d433c855f4e06eef0f79baa76c1fa9","slug":"dc-inspect-flood-rescue-projects-in-kaithal-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"8 में से एक प्रोजेक्ट देखा, हो गया बाढ़ राहत निरीक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
8 में से एक प्रोजेक्ट देखा, हो गया बाढ़ राहत निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sat, 13 Jun 2015 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। दिन...शनिवार। समय....सुबह 10 बजे। जिले भर के दर्जन भर विभागों के अधिकारी एसपी कृष्ण मुरारी के हुडा सेक्टर 19 स्थित डीसी आवास पर पहुंचे। डीसी के नेतृत्व में अधिकारियों को बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण के लिए जाना है। एक घंटे तक सभी अधिकारी यहां डीसी के निकलने का इंतजार करते हैं। लेकिन शायद मीटिंग हो रही थी। इसीलिए पूरा एक घंटा इंतजार करने के बाद डीसी केएम पांडुरंग की गाड़ी लगी तो अधिकारियों में खलबली मची की डीसी निकल रहे हैं।
डीसी के नेतृत्व में 11 बजकर 6 मिनट पर अधिकारियों का काफिला बाढ़ राहत पर हुए कार्यों के निरीक्षण के लिए निकल पड़ा। सबसे पहले काफिला सिंचाई विभाग की करनाल रोड स्थित वर्कशॉप पहुंचा। जहां पानी लिफ्ट करने के लिए रखे पंप्स के बारे में डीसी ने जानकारी मांगी। यहां जिले भर के लिए 50 पंप पानी लिफ्ट करने के लिए रखे हैं। इसके बाद काफिला सीधा मानस ड्रेन पहुंचा।
जहां सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले से ही तय मानस ड्रेन पुल पर खड़े होकर डीसी से निरीक्षण करवाया। यहां पहले से ही आसपास की ड्रेनों की पूरी तरह से सफाई की गई थी। दौरे में कैथल ड्रेन का भी प्रस्तावित निरीक्षण था, लेकिन अधिकारियों का काफिला इसके अलावा कहीं नहीं रुका।
विज्ञापन
चूंकि, डीसी साहब पहले ही एक घंटा देरी से कैंपस से निकले थे, इसीलिए शायद कलायत में पहले से निर्धारित पंप हाउस कलायत, कपिल मुनी ड्रेन एवं पंपहाउस सिरसा ब्रांच का दौरा रद्द कर दिया गया। इसके बाद अधिकारियों का काफिला धूल उड़ाते हुए सीधा गुहला की ओर निकल लिया।
हल्की बारिश से कीचड़, गाड़ियां फंसी
गुहला पहुंचते-पहुंचते करीब 12 बज गए। जहां बरसात शुरू हो गई। करीब 15 मिनट की बरसात के बीच काफिला घग्गर नदी पर बनाए सरौला साइफन की ओर निकल पड़ा। करीब 100 से 200 फुट की दूरी पर जाकर अधिकारियों की गाड़ियां फंस गई। मिट्टी चिकनी एवं बरसात के कारण एक भी अधिकारी गाड़ी से बाहर नहीं निकल सका। ऐन हांसी-बुटाना लिंक नहर की पटरी से पूरे काफिले को साइफन का निरीक्षण किए बिना लौटना पड़ा।
चूंकि, बरसात ज्यादा थी, इसीलिए काफिला सीधा गुहला रेस्टहाउस पहुंचा। जहां अधिकारियों ने लंच किया तथा बरसात रुकने बावजूद करीब एक घंटे तक अधिकारी रेस्ट हाउस में डटे रहे। यहां से 2 बजकर 40 मिनट पर काफिला निकला। पटियाला रोड पर रास्ते में ही पड़ने वाले हांसी बुटाना पुल पर रुका। यहां अधिकारियों से डीसी ने आवश्यक जानकारी ली।
अनशेड्यूलड साइट पर जाने को कहा, तो अधिकारी सकते में आए
डीसी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से घग्गर नदी पर चल रहे प्रोजेक्ट्स पर जाने की इच्छा जताई। लेकिन विभाग के एससी सहित एक्सईएन ने तपाक से कहा, ‘सर, जाने की आवश्यकता तो है नहीं।’ लेकिन डीसी नहीं माने। उन्होंने एक निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर जाने की इच्छा जताई। एकदम से शेड्यूल से बाहर की साइट के निरीक्षण की बात पर अधिकारी सकते में आ गए। कहा, वहां गाड़ियों का काफिला नहीं जा पाएगा।
लेकिन डीसी ने कहा कि पहले तो चला गया था। इसके बाद अधिकारी एक पूरा हो चुके गांव भाटिया के प्रोजेक्ट पर चलने के लिए तैयार हो गए। करीब 20 मिनट के रास्ते के बाद अधिकारी गांव भाटियों के निकट पंजाब बॉर्डर पर स्थित घग्गर नदी पर पहुंचे। जहां करीब 55 लाख रुपये की लागत से पत्थर लगाए गए थे। डीसी ने यहां अधिकारियों की सुनने के बजाय स्थानीय लोगों की सुननी चाही तो उन्होंने बताया कि यहां घग्गर बंद को खतरा है। इसके लिए विभाग की कोई प्लानिंग नहीं है।
साथ ही एक गांव वासी ने तो यहां तक कह दिया कि विभाग ने लाखों रुपये की लागत से पत्थर के स्टड पंजाब सीमा में लगा दिए हैं। डीसी द्वारा पूछने पर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। गांव के नंबरदार के कहने पर अधिकारियों ने विश्वास कर लिया और अंतत: मान लिया गया कि यह हरियाणा का इलाका है। इसके बाद दर्जन भर अधिकारियों का काफिला सरपट दौड़ते करीब 5 बजे कैथल पहुंच गया। इस तरह से पूरे जिले का बाढ़ राहत कार्यों के लिए निरीक्षण कार्य पूरा हो गया। डीसी साहब 5 बजे कार्यालय में पहुंचते ही आधार कार्ड के लिए आयोजित दूसरी मीटिंग में व्यस्त हो गए।
छह करोड़ की लागत से चल रहे हैं आठ प्रोजेक्ट
जिले में 6 करोड़ रुपये की लागत से अधिक के बाढ़ राहत के 8 प्रोजैक्ट चल रहे हैं। कइयों में तो केवल 5 प्रतिशत ही कार्य हुआ है। यह 5 प्रतिशत तो विभागीय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया है। मौके पर कितना कार्य हुआ है, इसका तो निरीक्षण करने के बाद ही पता चलता। लेकिन कुछ उपरोक्त ढंग से बाढ़ राहत के लिए किए गए कार्यों का निरीक्षण हो गया। जबकि गुहला हलका में हर चार साल बाद बाढ़ से लोगों का भारी नुकसान होता है।
विज्ञापन
डीसी के नेतृत्व में 11 बजकर 6 मिनट पर अधिकारियों का काफिला बाढ़ राहत पर हुए कार्यों के निरीक्षण के लिए निकल पड़ा। सबसे पहले काफिला सिंचाई विभाग की करनाल रोड स्थित वर्कशॉप पहुंचा। जहां पानी लिफ्ट करने के लिए रखे पंप्स के बारे में डीसी ने जानकारी मांगी। यहां जिले भर के लिए 50 पंप पानी लिफ्ट करने के लिए रखे हैं। इसके बाद काफिला सीधा मानस ड्रेन पहुंचा।
विज्ञापन
जहां सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले से ही तय मानस ड्रेन पुल पर खड़े होकर डीसी से निरीक्षण करवाया। यहां पहले से ही आसपास की ड्रेनों की पूरी तरह से सफाई की गई थी। दौरे में कैथल ड्रेन का भी प्रस्तावित निरीक्षण था, लेकिन अधिकारियों का काफिला इसके अलावा कहीं नहीं रुका।
विज्ञापन
चूंकि, डीसी साहब पहले ही एक घंटा देरी से कैंपस से निकले थे, इसीलिए शायद कलायत में पहले से निर्धारित पंप हाउस कलायत, कपिल मुनी ड्रेन एवं पंपहाउस सिरसा ब्रांच का दौरा रद्द कर दिया गया। इसके बाद अधिकारियों का काफिला धूल उड़ाते हुए सीधा गुहला की ओर निकल लिया।
हल्की बारिश से कीचड़, गाड़ियां फंसी
गुहला पहुंचते-पहुंचते करीब 12 बज गए। जहां बरसात शुरू हो गई। करीब 15 मिनट की बरसात के बीच काफिला घग्गर नदी पर बनाए सरौला साइफन की ओर निकल पड़ा। करीब 100 से 200 फुट की दूरी पर जाकर अधिकारियों की गाड़ियां फंस गई। मिट्टी चिकनी एवं बरसात के कारण एक भी अधिकारी गाड़ी से बाहर नहीं निकल सका। ऐन हांसी-बुटाना लिंक नहर की पटरी से पूरे काफिले को साइफन का निरीक्षण किए बिना लौटना पड़ा।
चूंकि, बरसात ज्यादा थी, इसीलिए काफिला सीधा गुहला रेस्टहाउस पहुंचा। जहां अधिकारियों ने लंच किया तथा बरसात रुकने बावजूद करीब एक घंटे तक अधिकारी रेस्ट हाउस में डटे रहे। यहां से 2 बजकर 40 मिनट पर काफिला निकला। पटियाला रोड पर रास्ते में ही पड़ने वाले हांसी बुटाना पुल पर रुका। यहां अधिकारियों से डीसी ने आवश्यक जानकारी ली।
अनशेड्यूलड साइट पर जाने को कहा, तो अधिकारी सकते में आए
डीसी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से घग्गर नदी पर चल रहे प्रोजेक्ट्स पर जाने की इच्छा जताई। लेकिन विभाग के एससी सहित एक्सईएन ने तपाक से कहा, ‘सर, जाने की आवश्यकता तो है नहीं।’ लेकिन डीसी नहीं माने। उन्होंने एक निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर जाने की इच्छा जताई। एकदम से शेड्यूल से बाहर की साइट के निरीक्षण की बात पर अधिकारी सकते में आ गए। कहा, वहां गाड़ियों का काफिला नहीं जा पाएगा।
लेकिन डीसी ने कहा कि पहले तो चला गया था। इसके बाद अधिकारी एक पूरा हो चुके गांव भाटिया के प्रोजेक्ट पर चलने के लिए तैयार हो गए। करीब 20 मिनट के रास्ते के बाद अधिकारी गांव भाटियों के निकट पंजाब बॉर्डर पर स्थित घग्गर नदी पर पहुंचे। जहां करीब 55 लाख रुपये की लागत से पत्थर लगाए गए थे। डीसी ने यहां अधिकारियों की सुनने के बजाय स्थानीय लोगों की सुननी चाही तो उन्होंने बताया कि यहां घग्गर बंद को खतरा है। इसके लिए विभाग की कोई प्लानिंग नहीं है।
साथ ही एक गांव वासी ने तो यहां तक कह दिया कि विभाग ने लाखों रुपये की लागत से पत्थर के स्टड पंजाब सीमा में लगा दिए हैं। डीसी द्वारा पूछने पर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। गांव के नंबरदार के कहने पर अधिकारियों ने विश्वास कर लिया और अंतत: मान लिया गया कि यह हरियाणा का इलाका है। इसके बाद दर्जन भर अधिकारियों का काफिला सरपट दौड़ते करीब 5 बजे कैथल पहुंच गया। इस तरह से पूरे जिले का बाढ़ राहत कार्यों के लिए निरीक्षण कार्य पूरा हो गया। डीसी साहब 5 बजे कार्यालय में पहुंचते ही आधार कार्ड के लिए आयोजित दूसरी मीटिंग में व्यस्त हो गए।
छह करोड़ की लागत से चल रहे हैं आठ प्रोजेक्ट
जिले में 6 करोड़ रुपये की लागत से अधिक के बाढ़ राहत के 8 प्रोजैक्ट चल रहे हैं। कइयों में तो केवल 5 प्रतिशत ही कार्य हुआ है। यह 5 प्रतिशत तो विभागीय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया है। मौके पर कितना कार्य हुआ है, इसका तो निरीक्षण करने के बाद ही पता चलता। लेकिन कुछ उपरोक्त ढंग से बाढ़ राहत के लिए किए गए कार्यों का निरीक्षण हो गया। जबकि गुहला हलका में हर चार साल बाद बाढ़ से लोगों का भारी नुकसान होता है।