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Kaithal News: मंकी पॉक्स का खतरा, बनाया आइसोलेशन वार्ड
Thu, 19 Sep 2024 05:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 19 Sep 2024 05:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंकी पॉक्स बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। ऐसे में अफ्रीका सहित अन्य देशों से आने वाले नागरिकों की स्क्रीनिंग हो रही है। इस बीमारी को देखते हुए विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में अलग से एक आइसोलेशन वार्ड बना लिया है। जिसे दो कमरों में बनाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बीमारी का संक्रमित केस आने पर जिला प्रशासन को इसकी जानकारी मिलेगी। यह स्क्रीनिंग एयरपोर्ट पर की जा रही है।
गौरतलब है कि एम पॉक्स बीमारी अफ्रीका के देशों में ज्यादा बढ़ रही है। आइसोलेशन वार्ड में अलग से स्टाफ की नियुक्ति भी की गई है। अस्पताल में बाल रोग, त्वचा रोग व सामान्य ओपीडी में मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किया गया है। तीनों ओपीडी के डाक्टरों को अलर्ट किया गया है। अगर बीमारी से संबंधित कोई लक्षण आते हैं तो उसकी जानकारी विभाग को दें, ताकि समय रहते मरीज का सैंपल जांच के लिए पुणे लैब में भेजा जा सके।
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बीमारी के कारण
n
यह बीमारी ज्यादातर 18 से 44 वर्ष आयु के लोगो में फैलती है।
n
अवैध शारीरिक संबंध।
n एमपॉक्स से पीड़ित किसी व्यक्ति के आमने-सामने होना
n
त्वचा से त्वचा संपर्क
n
समलैंगिकता।
लक्षण
n
शरीर पर दाने होना
n
टांगों पर दाने होना
n
बुखार होना
n
खरोंच
n
मांसपेशियों में दर्द
n
थकान
n
एचआईवी पॉजिटिव को ज्यादा खतरा
एमपॉक्स बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। अफ्रीकी देशों से आने वाले लोगो की भी स्क्रीनिंग हो रही है। अगर वहां से किसी को बीमारी के लक्षण मिलते है तो उसकी जानकारी विभाग के पास आ जाएगी। जिला नागरिक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। - डॉ. नीरज मंगला , डिप्टी सिविल सर्जन कैथल।
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कैथल। मंकी पॉक्स बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। ऐसे में अफ्रीका सहित अन्य देशों से आने वाले नागरिकों की स्क्रीनिंग हो रही है। इस बीमारी को देखते हुए विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में अलग से एक आइसोलेशन वार्ड बना लिया है। जिसे दो कमरों में बनाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बीमारी का संक्रमित केस आने पर जिला प्रशासन को इसकी जानकारी मिलेगी। यह स्क्रीनिंग एयरपोर्ट पर की जा रही है।
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गौरतलब है कि एम पॉक्स बीमारी अफ्रीका के देशों में ज्यादा बढ़ रही है। आइसोलेशन वार्ड में अलग से स्टाफ की नियुक्ति भी की गई है। अस्पताल में बाल रोग, त्वचा रोग व सामान्य ओपीडी में मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किया गया है। तीनों ओपीडी के डाक्टरों को अलर्ट किया गया है। अगर बीमारी से संबंधित कोई लक्षण आते हैं तो उसकी जानकारी विभाग को दें, ताकि समय रहते मरीज का सैंपल जांच के लिए पुणे लैब में भेजा जा सके।
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बीमारी के कारण
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यह बीमारी ज्यादातर 18 से 44 वर्ष आयु के लोगो में फैलती है।
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अवैध शारीरिक संबंध।
n एमपॉक्स से पीड़ित किसी व्यक्ति के आमने-सामने होना
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त्वचा से त्वचा संपर्क
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समलैंगिकता।
लक्षण
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शरीर पर दाने होना
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टांगों पर दाने होना
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बुखार होना
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खरोंच
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मांसपेशियों में दर्द
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थकान
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एचआईवी पॉजिटिव को ज्यादा खतरा
एमपॉक्स बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। अफ्रीकी देशों से आने वाले लोगो की भी स्क्रीनिंग हो रही है। अगर वहां से किसी को बीमारी के लक्षण मिलते है तो उसकी जानकारी विभाग के पास आ जाएगी। जिला नागरिक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। - डॉ. नीरज मंगला , डिप्टी सिविल सर्जन कैथल।