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शहीद रमेश कुमार पंचतत्व में विलीन लांस नायक के बेटे ने दी मुखाग्नि
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:12 AM IST
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लांस नायक के बेटे ने दी मुखाग्नि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव बदनारा के शहीद लांस नायक रमेश कुमार का आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों सहित भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
शहीद की बुधवार को मुंबई में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। देर रात शहीद का पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और वहां से सेना के अधिकारी तथा शहीद के भाई जो कि सेना में है, वीरवार सुबह शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर गांव बदनारा पहुंचे। जहां शहीद के 13 वर्षीय बेटे सागर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। जब 13 साल का मासूम अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दे रहा था तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। इस मौके पर एडीसी शक्ति सिंह, एसडीएम मनदीप कौर, तहसीलदार सुदेश मेहरा, नायाब तहसीलदार प्रकाश चंद, डीएसपी सतीश गौतम, थाना प्रभारी सतीश कुमार, गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच व सैकड़ों ग्रामीणों तथा सेना से सूबेदार मुंशी राम पूरे सलामी गार्ड की टुकड़ी के साथ मौजूद रहे। शहीद की शहादत पर जहां सारे गांव में गम का माहौल था वहीं पूरा गांव रमेश के देश सेवा करते हुए शहीद होने पर गौरवान्वित भी महसूस कर रहा था। शहीद अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ कर गया है। पत्नी और दो बच्चों के अलावा शहीद के तीन भाई है, जिनमें से दो सेना में है। शहीद की एक बेटी है और एक बेटा है जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है।
एडीसी ने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। शहीद सीमा पर देश की सेवा के लिए अपनी कुर्बानी देता है। लेकिन पूरा देश शहीदों व उनके परिवारों के साथ खड़ा है। उन्होंने शहीद रमेश के परिजनों से मुलाकात की और प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं गांव के लोगों ने भी इस अवसर पर शहीद रमेश को सेल्यूट किया।
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शहीद की बुधवार को मुंबई में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। देर रात शहीद का पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और वहां से सेना के अधिकारी तथा शहीद के भाई जो कि सेना में है, वीरवार सुबह शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर गांव बदनारा पहुंचे। जहां शहीद के 13 वर्षीय बेटे सागर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। जब 13 साल का मासूम अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दे रहा था तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। इस मौके पर एडीसी शक्ति सिंह, एसडीएम मनदीप कौर, तहसीलदार सुदेश मेहरा, नायाब तहसीलदार प्रकाश चंद, डीएसपी सतीश गौतम, थाना प्रभारी सतीश कुमार, गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच व सैकड़ों ग्रामीणों तथा सेना से सूबेदार मुंशी राम पूरे सलामी गार्ड की टुकड़ी के साथ मौजूद रहे। शहीद की शहादत पर जहां सारे गांव में गम का माहौल था वहीं पूरा गांव रमेश के देश सेवा करते हुए शहीद होने पर गौरवान्वित भी महसूस कर रहा था। शहीद अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ कर गया है। पत्नी और दो बच्चों के अलावा शहीद के तीन भाई है, जिनमें से दो सेना में है। शहीद की एक बेटी है और एक बेटा है जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है।
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एडीसी ने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। शहीद सीमा पर देश की सेवा के लिए अपनी कुर्बानी देता है। लेकिन पूरा देश शहीदों व उनके परिवारों के साथ खड़ा है। उन्होंने शहीद रमेश के परिजनों से मुलाकात की और प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं गांव के लोगों ने भी इस अवसर पर शहीद रमेश को सेल्यूट किया।
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