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एंबुलेंस न मिलने से घायल ने अस्पताल में ही तोड़ा दम
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Thu, 01 Jun 2017 11:51 PM IST
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अस्पताल मे मृतक के परिजन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस न मिलने से अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। घायल के सिर में चोट लगी थी, जिससे लगातार खून बह रहा था। चिकित्सक द्वारा सूचना दिए जाने पर भी समय पर एंबुलेंस के न पहुंचने के कारण उसकी मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने जम कर नारेबाजी की।
बिट्टू व गोगल ने बताया कि उनका पिता जसवंत रिक्शा चला कर परिवार को पालता था। नगरपालिका के गेट के सामने एक ऑटो चालक ने जसवंत को टक्कर मार दी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई। आस-पास के लोग उन्हें उठा कर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक रवीश ने प्राथमिक उपचार देकर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। उन्होंने 102 नंबर पर सूचना देकर तत्काल एंबुलेंस भिजवाने की बात कही। परिजनों का आरोप है कि सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची लेकिन तब तक अधिक रक्तस्त्राव होने के कारण जसवंत की मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना था कि जसवंत की मौत तो कलायत अस्पताल में ही हो गई थी कैथल तो उसकी डेड बॉडी को ही लेकर जाया गया है।
नहीं है कोई भी सुविधा
कलायत खंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कलायत, पीएचसी बालू, पीएचसी बात्ता व पीएचसी कैथल में चिकित्सकों के 13 पद स्वीकृत हैं। हैरानी की बात है कि सभी स्वीकृत 13 पद ही रिक्त पड़े हुए हैं। कलायत खंड के करीब डेढ़ लाख लोगों को चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए केवल एक ही चिकित्सक मौजूद है। कलायत वासी रवींद्र सूर्यवंशी, जसवंत सिंह, राजबीर, रवि प्रकाश, बीरभान, जोगेंद्र कपूर का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीएचसी कलायत व पीएचसी बात्ता पड़ते हैं जहां कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है। चिकित्सकों व चिकित्सा सुविधा के अभाव मरीज इसी तरह से तड़प-तड़प कर मरते रहेंगे।
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चिकित्सक रविश कुमार ने कहा कि मरीज को रेफर कर दिया गया था। एंबुलेंस देरी से पहुंची। एंबुलेंस विभाग मुख्यालय से पहुंचती है।
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बिट्टू व गोगल ने बताया कि उनका पिता जसवंत रिक्शा चला कर परिवार को पालता था। नगरपालिका के गेट के सामने एक ऑटो चालक ने जसवंत को टक्कर मार दी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई। आस-पास के लोग उन्हें उठा कर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक रवीश ने प्राथमिक उपचार देकर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। उन्होंने 102 नंबर पर सूचना देकर तत्काल एंबुलेंस भिजवाने की बात कही। परिजनों का आरोप है कि सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची लेकिन तब तक अधिक रक्तस्त्राव होने के कारण जसवंत की मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना था कि जसवंत की मौत तो कलायत अस्पताल में ही हो गई थी कैथल तो उसकी डेड बॉडी को ही लेकर जाया गया है।
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नहीं है कोई भी सुविधा
कलायत खंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कलायत, पीएचसी बालू, पीएचसी बात्ता व पीएचसी कैथल में चिकित्सकों के 13 पद स्वीकृत हैं। हैरानी की बात है कि सभी स्वीकृत 13 पद ही रिक्त पड़े हुए हैं। कलायत खंड के करीब डेढ़ लाख लोगों को चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए केवल एक ही चिकित्सक मौजूद है। कलायत वासी रवींद्र सूर्यवंशी, जसवंत सिंह, राजबीर, रवि प्रकाश, बीरभान, जोगेंद्र कपूर का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीएचसी कलायत व पीएचसी बात्ता पड़ते हैं जहां कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है। चिकित्सकों व चिकित्सा सुविधा के अभाव मरीज इसी तरह से तड़प-तड़प कर मरते रहेंगे।
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चिकित्सक रविश कुमार ने कहा कि मरीज को रेफर कर दिया गया था। एंबुलेंस देरी से पहुंची। एंबुलेंस विभाग मुख्यालय से पहुंचती है।