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Kaithal News: कोरोना ने दी सीख, मानवता सबसे बड़ी सेवा

Sat, 13 May 2023 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 13 May 2023 01:00 AM IST
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Corona gave a lesson, humanity is the biggest service
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को नर्सिंग दिवस पर अमर उजाला की तरफ से अपराजिता कार्यक्रम आयोजित करवाया। इसमें नर्सिंग ऑफिसर ने अस्पताल में मरीजों के किए जाने इलाज को लेकर चर्चा की। सभी ने माना कि कोरोना महामारी ने सिखाया कि मानवता सेवा सबसे बड़ी है।
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सभी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इलाज के समय में डॉक्टर व मरीज के बीच एक कड़ी का कार्य करती हैं। मरीज को सामान्य बीमारी हो या गंभीर बीमारी। इन सभी स्थितियों में वह मरीज को ठीक करने का हमेशा प्रयास करती है।
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मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
सामान्य अस्पताल की चीफ नर्सिंग ऑफिसर प्रवीन कुमारी ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर के लिए 12 मई के दिन का विशेष दिन होता है क्योंकि इस दिन नर्सिंग दिवस मनाया जाता है। कोरोना महामारी के समय में उन्हें एहसास हुआ कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इससे बढ़कर कुछ भी कोई अन्य चीज नहीं है।
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उद्देश्य मरीज जल्द स्वस्थ हो
नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की जिला प्रधान नीलम संधू ने बताया कि एक नर्सिंग ऑफिसर जब वार्ड में डॉक्टरों के साथ मरीजों का इलाज कर रही होती है तो उनका यह उद्देश्य रहता कि मरीज जल्द स्वस्थ होकर अपने घर पहुंचे। इसके तहत वे पूरी ईमानदारी से कार्य करती हैं।
अच्छे तरीके से करतीं है इलाज
नर्सिंग ऑफिसर परविंद्र कौर ने बताया कि अक्सर देखने को मिलता है अस्पताल में दाखिल मरीज नर्सिंग स्टाफ से दुर्व्यवहार करता है। इसके बावजूद उनका यह प्रयास रहता है कि वह मरीज जल्द ठीक होकर अपने घर लौटे। वह फिर भी अच्छे तरीके से उसका इलाज करती हैं।
कोरोना काल में किया बेहतर कार्य
नर्सिंग ऑफिसर संतोष कुमारी ने बताया कि कोरोना महामारी के समय जब मरीजों से उनके घर वाले भी दूर रहते हैं उस समय उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए उनका इलाज किया।
मकसद केवल मरीज की बीमारी ठीक करना
नर्सिंग ऑफिसर नीतेश रानी ने कहा कि वह पिछले आठ साल से नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अस्पताल में कार्यरत हैं। अपने आठ वर्ष के कार्यकाल में काफी कुछ सीखने को मिला है। एक नर्सिंग ऑफिसर किसी मरीज की न कोई जाति पूछती है और न ही कोई धर्म। उनका मकसद केवल मरीज की बीमारी को ठीक करना ही रहता है।
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डॉक्टर व मरीज के बीच एक कड़ी का कार्य करती हैं नर्सिंग ऑफिसर
कोरोना महामारी ने सिखाया मानवता सेवा से बड़ी नहीं है कोई चीज
जिला नागरिक अस्पताल में करवाया अपराजिता कार्यक्रम
कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर की तरफ से किए जाने वाले कार्यों पर की चर्चा
फोटो नंबर-11
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को नर्सिंग दिवस पर अमर उजाला की तरफ से अपराजिता कार्यक्रम आयोजित करवाया। इसमें नर्सिंग ऑफिसर ने अस्पताल में मरीजों के किए जाने इलाज को लेकर चर्चा की। उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि वे इलाज के समय में डॉक्टर व मरीज के बीच एक कड़ी का कार्य करती हैं। मरीज को सामान्य बीमारी हो या गंभीर बीमारी। इन सभी स्थितियों में वह मरीज को ठीक करने का हमेशा प्रयास करती है।
मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
सामान्य अस्पताल की चीफ नर्सिंग ऑफिसर प्रवीन कुमारी ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर के लिए 12 मई के दिन का विशेष दिन होता है क्योंकि इस दिन नर्सिंग दिवस मनाया जाता है। कोरोना महामारी के समय में उन्हें एहसास हुआ कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इससे बढ़कर कुछ भी कोई अन्य चीज नहीं है।
उद्देश्य मरीज जल्द स्वस्थ हो
नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की जिला प्रधान नीलम संधू ने बताया कि एक नर्सिंग ऑफिसर जब वार्ड में डॉक्टरों के साथ मरीजों का इलाज कर रही होती है तो उनका यह उद्देश्य रहता कि मरीज जल्द स्वस्थ होकर अपने घर पहुंचे। इसके तहत वे पूरी ईमानदारी से कार्य करती हैं।
अच्छे तरीके से करतीं है इलाज
नर्सिंग ऑफिसर परविंद्र कौर ने बताया कि अक्सर देखने को मिलता है अस्पताल में दाखिल मरीज नर्सिंग स्टाफ से दुर्व्यवहार करता है। इसके बावजूद उनका यह प्रयास रहता है कि वह मरीज जल्द ठीक होकर अपने घर लौटे। वह फिर भी अच्छे तरीके से उसका इलाज करती हैं।
कोरोना काल में किया बेहतर कार्य
नर्सिंग ऑफिसर संतोष कुमारी ने बताया कि कोरोना महामारी के समय जब मरीजों से उनके घर वाले भी दूर रहते हैं उस समय उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए उनका इलाज किया।

मकसद केवल मरीज की बीमारी ठीक करना
नर्सिंग ऑफिसर नीतेश रानी ने कहा कि वह पिछले आठ साल से नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अस्पताल में कार्यरत हैं। अपने आठ वर्ष के कार्यकाल में काफी कुछ सीखने को मिला है। एक नर्सिंग ऑफिसर किसी मरीज की न कोई जाति पूछती है और न ही कोई धर्म। उनका मकसद केवल मरीज की बीमारी को ठीक करना ही रहता है।
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