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खेल के साथ जारी रखी पढ़ाई तो बनीं प्रोफसर
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कैथल। अपने सपनों को सिर्फ वही लोग पूरा कर पाते हैं, जो जी तोड़ मेहनत करते हैं और रास्ते में चुनौतियों का डटकर सामना करते हैं। हमें अपनी जिंदगी में सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए। यह कहना है हॉकी की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहीं डॉ. प्रेमलता का।
डॉ प्रेमलता वर्तमान में चौ. ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय फतेहपुर पूंडरी में सहायक प्रोफेसर हैं। डॉ. प्रेमलता ने कहा कि उन्होंने पांचवीं कक्षा में वर्ष 1985 में शाहाबाद मारकंडा में हॉकी खेलना शुरू किया था। इसके बाद कई सब जूनियर, सीनियर व नेशनल प्रतियोगिताएं खेलीं। इनमें अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद कॉलेज में इंटर कॉलेज चैंपियनशिप में कई बार प्रथम स्थान प्राप्त किया। वह कॉलेज की हॉकी टीम के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विवि की टीम की भी कप्तान रहीं हैं। उनकी कप्तानी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने चंडीगढ़ में आयोजित अखिल भारतीय इंटर विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में उनका चयन भारतीय हॉकी टीम में हुआ। उस समय इंग्लैंड में हुए मुकाबले में भाग लिया। इसके बाद भारतीय हॉकी टीम के साथ कई शिविरों में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व भी किया लेकिन किन्हीं कारणों से वे अधिक समय तक नहीं खेल सकीं। इस दौरान खेलों के साथ साथ उन्होंने एमपीएड, एमफिल पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान समय में वह चौ. ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय फतेहपुर पूंडरी में व्याख्याता के रूप में नियुक्त है।
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डॉ प्रेमलता वर्तमान में चौ. ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय फतेहपुर पूंडरी में सहायक प्रोफेसर हैं। डॉ. प्रेमलता ने कहा कि उन्होंने पांचवीं कक्षा में वर्ष 1985 में शाहाबाद मारकंडा में हॉकी खेलना शुरू किया था। इसके बाद कई सब जूनियर, सीनियर व नेशनल प्रतियोगिताएं खेलीं। इनमें अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद कॉलेज में इंटर कॉलेज चैंपियनशिप में कई बार प्रथम स्थान प्राप्त किया। वह कॉलेज की हॉकी टीम के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विवि की टीम की भी कप्तान रहीं हैं। उनकी कप्तानी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने चंडीगढ़ में आयोजित अखिल भारतीय इंटर विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में उनका चयन भारतीय हॉकी टीम में हुआ। उस समय इंग्लैंड में हुए मुकाबले में भाग लिया। इसके बाद भारतीय हॉकी टीम के साथ कई शिविरों में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व भी किया लेकिन किन्हीं कारणों से वे अधिक समय तक नहीं खेल सकीं। इस दौरान खेलों के साथ साथ उन्होंने एमपीएड, एमफिल पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान समय में वह चौ. ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय फतेहपुर पूंडरी में व्याख्याता के रूप में नियुक्त है।
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