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Kaithal News: उपभोक्ता आयोग ने बिजली निगम को 91,600 रुपये लौटाने के दिए आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:42 PM IST
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Consumer Commission orders electricity corporation to refund Rs 91,600
कैथल। करीब 20 वर्ष पुराने घरेलू बिजली कनेक्शन के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम कैथल ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएनएल) को उपभोक्ता से वसूले गए 91,600 रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने निगम की कार्यप्रणाली को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए पांच हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि 45 दिन के भीतर आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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कृषि कनेक्शन के आवेदन पर सामने आया पुराना बकाया
शिकायतकर्ता बसाऊ राम ने बताया कि उन्होंने 8 दिसंबर 2023 को कृषि (एपी) ट्यूबवेल बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगस्त 2024 में निगम ने वर्ष 2002 के घरेलू बिजली कनेक्शन के नाम पर करीब 1.24 लाख रुपये जमा कराने का नोटिस जारी कर दिया। उनका कहना था कि वर्ष 2002 में गांव भाणा छोड़ने के दौरान उन्होंने लिखित आवेदन देकर घरेलू कनेक्शन काटने का अनुरोध भी किया था।
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फसल बचाने के लिए जमा करनी पड़ी राशि
बसाऊ राम के अनुसार कृषि कनेक्शन रद्द होने और फसल प्रभावित होने की आशंका के कारण उन्होंने 30 अगस्त 2024 को 91,745 रुपये जमा करा दिए। बाद में उन्होंने निगम की कार्रवाई को अवैध बताते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान बिजली निगम ने आयोग को बताया कि शिकायतकर्ता पुराने घरेलू कनेक्शन के डिफॉल्टर थे। उन्होंने सरचार्ज माफी योजना का लाभ लेकर स्वेच्छा से 91,745 रुपये जमा किए थे, इसलिए निगम की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं हुई।
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रिकॉर्ड में मिला डिस्कनेक्शन का आवेदन
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और रिकार्ड का परीक्षण करने पर पाया कि 12 अगस्त 2002 का डिस्कनेक्शन आवेदन रिकॉर्ड में मौजूद था। इसके बावजूद निगम ने समय पर कनेक्शन नहीं काटा और न ही 145 रुपये के मूल बकाया की मांग की। आयोग ने माना कि करीब दो दशक बाद ब्याज और सरचार्ज जोड़कर 1.24 लाख रुपये की मांग करना पूरी तरह अनुचित था। आयोग ने यह भी कहा कि निगम यह साबित नहीं कर सका कि वर्ष 2014 में कनेक्शन नियमानुसार स्थायी रूप से काटा गया था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता से वसूले गए 91,745 रुपये में से 145 रुपये के वास्तविक बकाया को काटकर शेष 91,600 रुपये लौटाए जाएं। आयोग ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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