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लॉकडाउन में स्वच्छ हुआ पर्यावरण, एक्यूआई 100 से नीचे पहुंचा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक और जहां कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन पर्यावरण के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। पर्यावरण में आए सकारात्मक परिवर्तन कोविड, सांस के मरीज, त्वचा रोग व आंखों में जलन के मरीजों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा है। पिछले माह की तुलना की जाए तो इन 12 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में बड़ा सुधार आया है।
जिले का एक्यूआई एक सौ से भी कम हो गया है। जिले में अप्रैल माह में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के पार था। जोकि की स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। मगर लॉकडाउन की वजह से मात्र 12 दिन से वायु गुणवत्ता सूचकांक एक सौ से कम आ गया है। 29 अप्रैल को एक्यूआई 225, 30 अप्रैल को 240 वहीं 11 मई को एक्यूआई 84 व 12 मई को 88 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
बता दें कि शहर की सड़कों आम दिनों में रोजाना अधिक वाहनों का आवागमन रहता था। लॉकडाउन में कम संख्या में ही वाहन सड़कों पर सफर कर रहे हैं। जिसकी वजह से प्रदूषण कम हुआ है। वाहनों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को दूषित करता है। अब लॉकडाउन में वायु प्रदूषण में सुधार होने का यह भी एक मुख्य कारण है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की आवाजाही कम हो गई है। पिछले कई दिनों से रुक रुककर बूंदाबांदी भी हो रही है। जिसकी वजह से वायु में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। अप्रैल माह में गेहूं कटाई का कार्य जोरों पर था। इसके साथ ही कई जगहों पर आगजनी की घटना भी सामने आई है। जिसकी वजह से धुएं के कारण वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
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कैथल। एक और जहां कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन पर्यावरण के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। पर्यावरण में आए सकारात्मक परिवर्तन कोविड, सांस के मरीज, त्वचा रोग व आंखों में जलन के मरीजों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा है। पिछले माह की तुलना की जाए तो इन 12 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में बड़ा सुधार आया है।
जिले का एक्यूआई एक सौ से भी कम हो गया है। जिले में अप्रैल माह में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के पार था। जोकि की स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। मगर लॉकडाउन की वजह से मात्र 12 दिन से वायु गुणवत्ता सूचकांक एक सौ से कम आ गया है। 29 अप्रैल को एक्यूआई 225, 30 अप्रैल को 240 वहीं 11 मई को एक्यूआई 84 व 12 मई को 88 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
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बता दें कि शहर की सड़कों आम दिनों में रोजाना अधिक वाहनों का आवागमन रहता था। लॉकडाउन में कम संख्या में ही वाहन सड़कों पर सफर कर रहे हैं। जिसकी वजह से प्रदूषण कम हुआ है। वाहनों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को दूषित करता है। अब लॉकडाउन में वायु प्रदूषण में सुधार होने का यह भी एक मुख्य कारण है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की आवाजाही कम हो गई है। पिछले कई दिनों से रुक रुककर बूंदाबांदी भी हो रही है। जिसकी वजह से वायु में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। अप्रैल माह में गेहूं कटाई का कार्य जोरों पर था। इसके साथ ही कई जगहों पर आगजनी की घटना भी सामने आई है। जिसकी वजह से धुएं के कारण वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।