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डीसी के पत्र के आधार पर नगर परिषद चेयरपर्सन सीमा कश्यप को कारण बताओ नोटिस
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सिटी स्कवेयर मामले में नगर पालिका चेयरपर्सन सीमा कश्यप सहित 11 के खिलाफ एफआईआर के मामले में अब विभाग मुख्यालय ने चेयरपर्सन को नोटिस कर नौ जनवरी को पंचकूला तलब किया है। जिसमें लिखा है कि क्यों न उन्हें निलंबित कर दिया जाए। यहर नोटिस डीसी की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया है।
चेयरपर्सन सीमा कश्यप को जारी नोटिस में कहा है मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के डीएसपी द्वारा कैथल में निर्माणाधीन सिटी स्कवेयर में अनियमितताओं मिलने पर धारा 120 बी, 420 आईपीसी के तहत दर्ज हुई है। जो कि 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम हैं।
नोटिस में लिखा है कि आपके विरुद्ध हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 22ए की उप-धारा 1 ए में वर्णित प्रावधानों के अनुसार पद का दुरुपयोग किया गया है। 9 जनवरी 2020 को दोपहर साढ़े बारह बजे निजी सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाता है। इस दिन काण बताओ नोटिस के उत्तर सहित निजी सुनवाई के लिए उपस्थित हों। यदि आप इस तिथि को हाजिर नहीं होते हैं तो समझा जाएगा कि उक्त आरोपों के बारे में आप कुछ नहीं कहना चाहते हैं। ईओ कैथल अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने नोटिस चेयरपर्सन को रिसीव करवा दिया है।
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क्या है सिटी स्कवेयर मामला
पुराने बस अड्डे की जगह में बनने वाले सिटी स्कवेयर के मामले में पुलिस ने सीएम उड़नदस्ते के डीएसपी की शिकायत पर चेयरपर्सन सहित तत्कालीन ईओ विक्रम सिंह, जेई सहित कुल 11 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पहले उड़नदस्ते द्वारा, फिर हरियाणा सरकार द्वारा गठित तीन एक्सईएन स्तर के अधिकारियों द्वारा, पूर्व एडीसी कैथल द्वारा जांच हो चुकी है। एडीसी व एक्सईएन स्तर के अधिकारियों ने इस मामले में चेयरपर्सन और अधिकारियों की साजिश न बताते हुए केवल प्रोसिजरल लेप्स करार दिया था। इन जांच के आधार पर चेयरपर्सन सहित अन्य ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की हुई है। जिसमें अभी सुनवाई जारी है।
डीसी के पत्र पर आठ माह बाद लिया संज्ञान
डीसी डा. प्रियंका सोनी ने एफआईआर दर्ज होने के बाद इसी साल अप्रैल माह में ही पत्र जारी करके विभाग को सूचित कर दिया था। डीसी द्वारा जारी पत्र पर कार्रवाई न होने के संबंध में एक क्लर्क को विभाग मुख्यालय में चार्जशीट भी किया जा चुका है।
32 करोड़ से 52 करोड़ का हो चुका है प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट पहले 32 करोड़ रुपये का प्लान किया गया था। बीच में एफआईआर दर्ज होने के चलते इसका काम धीमा हो गया और काम धीमा होने के कारण करीब साल भर से काम लगभग ठप है। जिस कारण अब इसके निर्माता एजेंसी ने रिवाईज एस्टिमेट नगर परिषद में प्रस्तुत किया है। जिसमें अनुमानित लागत अब 52 करोड़ रुपये की बताई जा रही है।
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चेयरपर्सन सीमा कश्यप को जारी नोटिस में कहा है मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के डीएसपी द्वारा कैथल में निर्माणाधीन सिटी स्कवेयर में अनियमितताओं मिलने पर धारा 120 बी, 420 आईपीसी के तहत दर्ज हुई है। जो कि 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम हैं।
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नोटिस में लिखा है कि आपके विरुद्ध हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 22ए की उप-धारा 1 ए में वर्णित प्रावधानों के अनुसार पद का दुरुपयोग किया गया है। 9 जनवरी 2020 को दोपहर साढ़े बारह बजे निजी सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाता है। इस दिन काण बताओ नोटिस के उत्तर सहित निजी सुनवाई के लिए उपस्थित हों। यदि आप इस तिथि को हाजिर नहीं होते हैं तो समझा जाएगा कि उक्त आरोपों के बारे में आप कुछ नहीं कहना चाहते हैं। ईओ कैथल अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने नोटिस चेयरपर्सन को रिसीव करवा दिया है।
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क्या है सिटी स्कवेयर मामला
पुराने बस अड्डे की जगह में बनने वाले सिटी स्कवेयर के मामले में पुलिस ने सीएम उड़नदस्ते के डीएसपी की शिकायत पर चेयरपर्सन सहित तत्कालीन ईओ विक्रम सिंह, जेई सहित कुल 11 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पहले उड़नदस्ते द्वारा, फिर हरियाणा सरकार द्वारा गठित तीन एक्सईएन स्तर के अधिकारियों द्वारा, पूर्व एडीसी कैथल द्वारा जांच हो चुकी है। एडीसी व एक्सईएन स्तर के अधिकारियों ने इस मामले में चेयरपर्सन और अधिकारियों की साजिश न बताते हुए केवल प्रोसिजरल लेप्स करार दिया था। इन जांच के आधार पर चेयरपर्सन सहित अन्य ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की हुई है। जिसमें अभी सुनवाई जारी है।
डीसी के पत्र पर आठ माह बाद लिया संज्ञान
डीसी डा. प्रियंका सोनी ने एफआईआर दर्ज होने के बाद इसी साल अप्रैल माह में ही पत्र जारी करके विभाग को सूचित कर दिया था। डीसी द्वारा जारी पत्र पर कार्रवाई न होने के संबंध में एक क्लर्क को विभाग मुख्यालय में चार्जशीट भी किया जा चुका है।
32 करोड़ से 52 करोड़ का हो चुका है प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट पहले 32 करोड़ रुपये का प्लान किया गया था। बीच में एफआईआर दर्ज होने के चलते इसका काम धीमा हो गया और काम धीमा होने के कारण करीब साल भर से काम लगभग ठप है। जिस कारण अब इसके निर्माता एजेंसी ने रिवाईज एस्टिमेट नगर परिषद में प्रस्तुत किया है। जिसमें अनुमानित लागत अब 52 करोड़ रुपये की बताई जा रही है।