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जिला परिषद की चेयरपर्सन व वाइस चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा
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city council
- फोटो : Kaithal
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। जिला परिषद चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर औश्र वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को गिर गया। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग करने वाले 14 में से एक भी जिला पार्षद निर्धारित की गई बैठक में नहीं पहुंचा और डीसी डा. प्रियंका सोनी ने उनके अविश्वास प्रस्ताव को रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही अब एक साल तक दोनों की कुर्सी सुरक्षित हो गई है। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद मीडिया से बातचीत में वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ ने विधायक लीला राम पर परोक्ष रुप से कुर्सी गिराने का प्रयास करने के आरोप लगाते हुए इस जीत को घमंड की लीला की हार करार दिया। विधायक ने आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
जिला परिषद की चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ के खिलाफ 18 नवंबर को जिला पार्षदों सुदेश रानी, अंजू जागलान, संदीप कोटड़ा, पताशो देवी, सुमन कुमारी, शकुंतला देवी, सुदेश ऊर्फ बबली, मुसिया राम, रेनबाला, भाग सिंह खनौदा, सुरजीत सिंह, नीलम देवी, मंजूरानी व कमलेश देवी ने एडीसी राहुल हुड्डा को शपथ देकर अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की मांग की थी।
इसके बाद डीसी डा. प्रियंका सोनी ने 9 दिसंबर की तिथि अविश्वास प्रस्ताव के लिए रखी थी। सुदेश रानी ने अपना शपथ पत्र वापस लेते हुए डीसी को सूचित किया था कि वे चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ के साथ हैं। इसके बाद ही समीकरण बदल गए थे।
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सोमवार को 11 बजे जिला परिषद भवन में अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक का नोटिस जारी किया गया था। पुलिस ने पूरे परिषद भवन को सुरक्षा चक्र में घेर लिया था। साथ ही बैठक में जाने वाले हर व्यक्ति की सघन तलाशी व वीडियोग्राफी की जा रही थी। सुबह 11 बजे डीसी डा. प्रियंका सोनी, जिला परिषद के सीईओ सतबीर कुंडू, डिप्टी सीईओ जसविंद्र सिंह जिला परिषद हाल में पहुंचे। जहां 11 बजकर 30 मिनट तक अधिकारियों ने इंतजार किया। जब अंतिम मिनट तक भी कोई नहीं पहुंचा तो सीवन की बीडीपीओ रोजी ने आवाज लगाकर बैठक के खत्म होने की सूचना दी। इसके साथ ही जिला पार्षदों को दिया गया समय समाप्त हो गया।
डीसी डा. प्रियंका सोनी ने कहा कि 14 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए शपथ दिए थे। इनमें से 1 ने अपना शपथ पत्र वापस ले लिया था। सोमवार को निर्धारित की गई बैठक में एक भी सदस्य नहीं पहुंचा। जिस कारण यह अविश्वास प्रस्ताव अब रद्द हो गया है। अब अगले एक साल तक इन दोनों के खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
विधायक के घमंड की लीला हारी-मनीष कठवाड़
अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में मनीष कठवाड़ ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव गिरने की इस जीत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, सीएम के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी, महामंत्री वेदपाल, राज्यमंत्री कमेलश ढांडा, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर सहित जिला पार्षदों रिंपी, सुदेश ऊर्फ बबली, रवि तारांवाली, रतिराम, राजेश राणा के आभारी हैं। जिन्होंने इस मामले में उनका सहयोग किया। अब ओर जोर-शोर से जिले में विकास करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में एक विधायक, जो खुद को संगठन व सरकार से भी बड़ा समझने लगे हैं। उनके घमंड की लीला की हार हुई है। उन्होंने विधायक बनते ही झूठ की लीला रचते हुए यह काम करवाया। जिसमें उनके घमंड की लीला की हार हुई है।
भेदभाव व दुर्व्यवहार के आरोपों पर मनीष कठवाड़ ने कहा कि सभी वार्डों में समान विकास हुए हैं। रही बात दुर्व्यवहार की तो ऐसा कुछ नहीं है। थोड़ा बहुत मनमुटाव हो जाता है। जिसे आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाता है। विरोधी खेमा जो खुद को भाजपाई बता रहा है, सीएम मनोहर लाल की बात उन पर सटीक बैठती है कि वे भाजपा में तो आ गए,एउलेकिन अभी भाजपा उनके अंदर नहीं गई है। उनके साथ जिला परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि हरदीप आंधली भी मौजूद थे। वहीं विधायक लीला राम ने कहा कि मिथ्या आरोप लगाने अलग बात है। उनका जिला परिषद चुनाव के इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
हाथ में पानी लेकर कसम उठाने वाले दो पार्षद मुकरे: विरोधी खेमे के भाग सिंह खनौदा, पार्षद प्रतिनिधि संजय जागलान, मुसिया, सुरजीत पबनावा ने कहा कि पार्षद बबली चंदाना व राजेश राणा ने हाथ में जल लेकर कसम उठाई थी कि वे उनके साथ रहेंगे। इसके बावजूद उन्होंने धोखा दिया। वहीं रति राम वादा करने के बाद मुकर गए। इसीलिए अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। लेकिन बहुमत अभी भी उनके पास है। उनकी संख्या 13 है। प्रस्ताव पारित करवाने के लिए कम से कम 11 की जरूरत होगी। पैसों के लालच में पार्षदों ने खेमा बदला है।
तीसरी परीक्षा में सफलता हासिल की सुखविंद्र कौर व मनीष कठवाड़ ने: वर्ष 2016 में चेयरपर्सन बनीं सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन बनें मनीष कठवाड़ ने तीसरी बार अविश्वास की परीक्षा में जीत हासिल की है। इससे पूर्व 20 अप्रैल 2017 व 19 अगस्त 2017 को भी वे अविश्वास प्रस्ताव की जंग में जीत हासिल कर चुके हैं।
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जिला परिषद की चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ के खिलाफ 18 नवंबर को जिला पार्षदों सुदेश रानी, अंजू जागलान, संदीप कोटड़ा, पताशो देवी, सुमन कुमारी, शकुंतला देवी, सुदेश ऊर्फ बबली, मुसिया राम, रेनबाला, भाग सिंह खनौदा, सुरजीत सिंह, नीलम देवी, मंजूरानी व कमलेश देवी ने एडीसी राहुल हुड्डा को शपथ देकर अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की मांग की थी।
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इसके बाद डीसी डा. प्रियंका सोनी ने 9 दिसंबर की तिथि अविश्वास प्रस्ताव के लिए रखी थी। सुदेश रानी ने अपना शपथ पत्र वापस लेते हुए डीसी को सूचित किया था कि वे चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ के साथ हैं। इसके बाद ही समीकरण बदल गए थे।
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सोमवार को 11 बजे जिला परिषद भवन में अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक का नोटिस जारी किया गया था। पुलिस ने पूरे परिषद भवन को सुरक्षा चक्र में घेर लिया था। साथ ही बैठक में जाने वाले हर व्यक्ति की सघन तलाशी व वीडियोग्राफी की जा रही थी। सुबह 11 बजे डीसी डा. प्रियंका सोनी, जिला परिषद के सीईओ सतबीर कुंडू, डिप्टी सीईओ जसविंद्र सिंह जिला परिषद हाल में पहुंचे। जहां 11 बजकर 30 मिनट तक अधिकारियों ने इंतजार किया। जब अंतिम मिनट तक भी कोई नहीं पहुंचा तो सीवन की बीडीपीओ रोजी ने आवाज लगाकर बैठक के खत्म होने की सूचना दी। इसके साथ ही जिला पार्षदों को दिया गया समय समाप्त हो गया।
डीसी डा. प्रियंका सोनी ने कहा कि 14 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए शपथ दिए थे। इनमें से 1 ने अपना शपथ पत्र वापस ले लिया था। सोमवार को निर्धारित की गई बैठक में एक भी सदस्य नहीं पहुंचा। जिस कारण यह अविश्वास प्रस्ताव अब रद्द हो गया है। अब अगले एक साल तक इन दोनों के खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
विधायक के घमंड की लीला हारी-मनीष कठवाड़
अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में मनीष कठवाड़ ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव गिरने की इस जीत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, सीएम के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी, महामंत्री वेदपाल, राज्यमंत्री कमेलश ढांडा, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर सहित जिला पार्षदों रिंपी, सुदेश ऊर्फ बबली, रवि तारांवाली, रतिराम, राजेश राणा के आभारी हैं। जिन्होंने इस मामले में उनका सहयोग किया। अब ओर जोर-शोर से जिले में विकास करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में एक विधायक, जो खुद को संगठन व सरकार से भी बड़ा समझने लगे हैं। उनके घमंड की लीला की हार हुई है। उन्होंने विधायक बनते ही झूठ की लीला रचते हुए यह काम करवाया। जिसमें उनके घमंड की लीला की हार हुई है।
भेदभाव व दुर्व्यवहार के आरोपों पर मनीष कठवाड़ ने कहा कि सभी वार्डों में समान विकास हुए हैं। रही बात दुर्व्यवहार की तो ऐसा कुछ नहीं है। थोड़ा बहुत मनमुटाव हो जाता है। जिसे आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाता है। विरोधी खेमा जो खुद को भाजपाई बता रहा है, सीएम मनोहर लाल की बात उन पर सटीक बैठती है कि वे भाजपा में तो आ गए,एउलेकिन अभी भाजपा उनके अंदर नहीं गई है। उनके साथ जिला परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि हरदीप आंधली भी मौजूद थे। वहीं विधायक लीला राम ने कहा कि मिथ्या आरोप लगाने अलग बात है। उनका जिला परिषद चुनाव के इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
हाथ में पानी लेकर कसम उठाने वाले दो पार्षद मुकरे: विरोधी खेमे के भाग सिंह खनौदा, पार्षद प्रतिनिधि संजय जागलान, मुसिया, सुरजीत पबनावा ने कहा कि पार्षद बबली चंदाना व राजेश राणा ने हाथ में जल लेकर कसम उठाई थी कि वे उनके साथ रहेंगे। इसके बावजूद उन्होंने धोखा दिया। वहीं रति राम वादा करने के बाद मुकर गए। इसीलिए अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। लेकिन बहुमत अभी भी उनके पास है। उनकी संख्या 13 है। प्रस्ताव पारित करवाने के लिए कम से कम 11 की जरूरत होगी। पैसों के लालच में पार्षदों ने खेमा बदला है।
तीसरी परीक्षा में सफलता हासिल की सुखविंद्र कौर व मनीष कठवाड़ ने: वर्ष 2016 में चेयरपर्सन बनीं सुखविंद्र कौर व वाइस चेयरमैन बनें मनीष कठवाड़ ने तीसरी बार अविश्वास की परीक्षा में जीत हासिल की है। इससे पूर्व 20 अप्रैल 2017 व 19 अगस्त 2017 को भी वे अविश्वास प्रस्ताव की जंग में जीत हासिल कर चुके हैं।