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Kaithal News: छोड़िये सलाम की आदत, डालिए काम की आदत ः विजय
Tue, 03 Dec 2024 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 03 Dec 2024 01:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। साहित्य सभा की ओर से आरकेएसडी काॅलेज में सम्मान-समारोह व पुस्तक-लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कवि-सम्मेलन का शुभारंभ पंडित श्याम सुंदर गौड़ और रजनीश शर्मा ने सरस्वती वंदना से किया। गजलकार विजय कुमार सिंघल ने कहा, छोड़िये सलाम की आदत। डालिए काम की आदत।
अपने ह्रदय में एक बच्चे को समेटे हुए रविंद्र रवि ने कहा, मेरे अंदर छोटा सा इक बच्चा है। मुझको अब भी परियां अच्छी लगतीं हैं। दिनेश बंसल ने शेयर प्रस्तुत कर कहा कि ख़बर कहां थी, मुझे इस ख़ज़ाने की। ग़मों ने राह दिखाई शराबखाने की।
डाॅ. तेजिंद्र ने कहा, हर बात बताना ज़रूरी है क्या? यूं प्यार जताना ज़रूरी है क्या? करते हैं जो कुछ, उसकी तस्वीरें, स्टेटस पर लगाना ज़रूरी है क्या? डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने सुनाया- गैर को जो गले लगाओगे। ज़िंदगी क्या है जान जाओगे। मनु बदायुंनी ने कहा, वो मेरी नींद पर कब्जा जमाकर बैठी है। तुम्हारी याद क्यों बिस्तर पर बैठ जाती है। सुनीता आनंद ने सुनाया- शब्द ब्रह्मा है, शब्द संसार है। शब्द में शक्ति अपार है। सरदार बलवंत सिंह मान ने कहा, मेरे देश का आमजन, जिंदा तो नहीं, बस जिंदा सा है।
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इससे पूर्व इस अंतरराज्यीय कवि-सम्मेलन में हरियाणा एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डाॅ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। जबकि अध्यक्षता हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डाॅ. चंद्र त्रिखा ने की।
कवि-सम्मेलन का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने किया। आयोजन की शुरुआत में साहित्य सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि डाॅ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल ने कहा कि साहित्य, कला, संगीत के माध्यम से व्यक्ति मनुष्यत्व और देवत्व की ओर उन्मुख होता है। लाला निरंजन दास व सुमित्रा देवी आजीवन साहित्य साधना सम्मान से सम्मानित 92 वर्षीय साहित्यकार ओम प्रकाश गासो ने कहा कि साहित्यकारों को राहुल सांकृत्यायन और राजेंद्र प्रसाद के साहित्य को पढ़ना चाहिए। भारतीय संस्कृति के महत्व को समझकर उनका अनुसरण करना चाहिए।
साहित्य सभा कैथल के संरक्षक एवं आरकेएसडी काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. संजय गोयल ने साहित्य सभा से जुड़े साहित्यकारों डाॅ. भगवान दास निर्मोही, डाॅ. दामोदर वाशिष्ठ, डाॅ. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी को याद किया।
डाॅ. चंद्र त्रिखा ने कहा कि ओम प्रकाश गासो, जिन्हें आज साहित्य सभा के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है। ये एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें व्यक्तिगत हादसों को सहन करते हुए जीना आता है।
इस मौके पर एसएस डोगरा, चरन पुआधी, अजय अज्ञात, सविता गर्ग सावी, राजकला देसवाल, राकेश जैन बंधु, बलबीर वागीश, कृष्ण निर्माण, ममता सूद, नीरू मेहता, दिलबाग अकेला, ईश्वर चंद गर्ग, राजेश भारती, कमलेश शर्मा, प्रोफ़ेसर रूप देवगुण, कुलभूषण शर्मा, रोहित शर्मा, विजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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कैथल। साहित्य सभा की ओर से आरकेएसडी काॅलेज में सम्मान-समारोह व पुस्तक-लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कवि-सम्मेलन का शुभारंभ पंडित श्याम सुंदर गौड़ और रजनीश शर्मा ने सरस्वती वंदना से किया। गजलकार विजय कुमार सिंघल ने कहा, छोड़िये सलाम की आदत। डालिए काम की आदत।
अपने ह्रदय में एक बच्चे को समेटे हुए रविंद्र रवि ने कहा, मेरे अंदर छोटा सा इक बच्चा है। मुझको अब भी परियां अच्छी लगतीं हैं। दिनेश बंसल ने शेयर प्रस्तुत कर कहा कि ख़बर कहां थी, मुझे इस ख़ज़ाने की। ग़मों ने राह दिखाई शराबखाने की।
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डाॅ. तेजिंद्र ने कहा, हर बात बताना ज़रूरी है क्या? यूं प्यार जताना ज़रूरी है क्या? करते हैं जो कुछ, उसकी तस्वीरें, स्टेटस पर लगाना ज़रूरी है क्या? डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने सुनाया- गैर को जो गले लगाओगे। ज़िंदगी क्या है जान जाओगे। मनु बदायुंनी ने कहा, वो मेरी नींद पर कब्जा जमाकर बैठी है। तुम्हारी याद क्यों बिस्तर पर बैठ जाती है। सुनीता आनंद ने सुनाया- शब्द ब्रह्मा है, शब्द संसार है। शब्द में शक्ति अपार है। सरदार बलवंत सिंह मान ने कहा, मेरे देश का आमजन, जिंदा तो नहीं, बस जिंदा सा है।
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इससे पूर्व इस अंतरराज्यीय कवि-सम्मेलन में हरियाणा एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डाॅ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। जबकि अध्यक्षता हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डाॅ. चंद्र त्रिखा ने की।
कवि-सम्मेलन का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने किया। आयोजन की शुरुआत में साहित्य सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि डाॅ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल ने कहा कि साहित्य, कला, संगीत के माध्यम से व्यक्ति मनुष्यत्व और देवत्व की ओर उन्मुख होता है। लाला निरंजन दास व सुमित्रा देवी आजीवन साहित्य साधना सम्मान से सम्मानित 92 वर्षीय साहित्यकार ओम प्रकाश गासो ने कहा कि साहित्यकारों को राहुल सांकृत्यायन और राजेंद्र प्रसाद के साहित्य को पढ़ना चाहिए। भारतीय संस्कृति के महत्व को समझकर उनका अनुसरण करना चाहिए।
साहित्य सभा कैथल के संरक्षक एवं आरकेएसडी काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. संजय गोयल ने साहित्य सभा से जुड़े साहित्यकारों डाॅ. भगवान दास निर्मोही, डाॅ. दामोदर वाशिष्ठ, डाॅ. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी को याद किया।
डाॅ. चंद्र त्रिखा ने कहा कि ओम प्रकाश गासो, जिन्हें आज साहित्य सभा के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है। ये एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें व्यक्तिगत हादसों को सहन करते हुए जीना आता है।
इस मौके पर एसएस डोगरा, चरन पुआधी, अजय अज्ञात, सविता गर्ग सावी, राजकला देसवाल, राकेश जैन बंधु, बलबीर वागीश, कृष्ण निर्माण, ममता सूद, नीरू मेहता, दिलबाग अकेला, ईश्वर चंद गर्ग, राजेश भारती, कमलेश शर्मा, प्रोफ़ेसर रूप देवगुण, कुलभूषण शर्मा, रोहित शर्मा, विजय कुमार आदि मौजूद रहे।