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प्रशासन की नाक के नीचे जिले में धड़ल्ले से जलाए जा रहे हैं गेहूं के अवशेष
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Thu, 11 May 2017 12:29 AM IST
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खेत में लगाई गई आग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खेतों में गेहूं के अवशेष धड़ल्ले से जलाए जा रहे हैं। लेकिन जिला प्रशासन को यह आग दिखाई नहीं दे रही। यही कारण है कि अभी तक कार्रवाई के नाम पर जिले में कुछ दिखाई नहीं दे रहा। लोक संपर्क विभाग के माध्यम से एक चेतावनी भरी विज्ञप्ति जारी करने के अलावा अभी तक कोई कार्रवाई नजर नहीं आई। जिस कारण खेतों में आग लग रही है। पक्षियों, पेड़ों व स्वयं उस किसान की भूमि का नुकसान हो रहा है।
धड़ल्ले से लगाई जा रही है आग
जिले में गेहूं के फानों के बाद बचे हुए अवशेष में आग लग रही है। वहीं कई जगह अज्ञात कारणों से भी आग लग रही है। गर्मी के मौसम में तापमान अधिक रहता है, इससे भी आग लगातार भड़क रही है। लेकिन काफी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो जल्दी अपनी भूमि को साफ करने के चक्कर में अपने ही खेतों की उपजाऊ शक्ति को साफ कर रहे हैं।
जिले में गुहला-चीका, राजौंद एवं कलायत के एरिया में धड़ल्ले से आग लगाई जा रही है। कलायत से कैथल की ओर आते समय कुछेक एकड़ नहीं बल्कि सैकड़ों एकड़ में आग लगी हुई दिखाई दे रही है। वहीं मंगलवार को गुहणा से कैथल आने वाले मार्ग पर दिन में ही आग जलती हुई दिखाई दी।
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पक्षियों से लेकर वन विभाग के पेड़ों तक का भारी नुकसान
इस आग से खेतों में उन पक्षियों के परिवार खत्म हो रहे हैं, जो फसल कटाई के बाद खुले में अंडे देते हैं। साथ ही खेतों के किनारे खड़े पेड़-पौधे भी जल रहे हैं। किसान की अपनी भूमि की उपजाऊ शक्ति का नुकसान होता है, वह अलग है।
महज 40 लोगों की पहचान की है विभाग ने
कृषि उप-निदेशक डा. महावीर सिंह का कहना है कि विभाग ने 40 लोगों की पहचान कर ली है। उन पर केस चलेगा या फिर जुर्माना किया जाएगा। इस बारे में फैसला लिया जाना है। इसके अलावा भी आगजनी की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है। कई जगह अज्ञात कारणों से भी आग लग रही है।
रात को ज्यादा लगती है आग
रात के समय आगजनी के ज्यादा मामले होते हैं। कई लोगों ने बताया कि रात को लगभग हर रोड से जाते समय खेतों में आग लगी हुई दिखाई देती है।
राजनीतिक दबाव भी रहता है कुछेक अधिकारियों पर
वहीं सूत्रों का कहना है कि कोई अधिकारी यदि कार्रवाई करने की बात करता है तो राजनीतिक दबाव भी हावी रहता है। कई नेताओं की सिफारिशों के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती। जिस कारण अधिकारी भी इस तरह की किसी कार्रवाई से बचने का प्रयास करते हैं।
सरकार उठाए कठोर कदम
पक्षियों के लिए काम कर रही कैथल की जानीं-मानीं पैथोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट डा. चेतना शर्मा ने कहा कि इस आगजनी का सबसे बुरा असर पक्षियों पर पड़ रहा है। वे स्वयं कई जगह ऐसी फोटो लेकर आती हैं, जब पक्षी फसल कटने के बाद अंडे देते हैं। आग के कारण उनके अंडे जल रहे हैं। सरकार इस दिशा में कठोर कदम उठाए। वे दो बार डीएफओ से मिलने गई थीं, लेकिन वे नहीं मिल सकीं। वे बुधवार को भी अंबाला रोड से आ रहीं थीं, तो ड्रेन के निकट आग लगी हुई है और धुएं से ही भारी नुकसान हो रहा है।
टोल फ्री नंबर जारी करे प्रशासन
प्रकृति प्रेमियों ने मांग की है कि प्रशासन जिले में टोल फ्री नंबर या फिर कोई व्हॉट्सएप नंबर जारी करे। जिस पर आम आदमी यदि कहीं आग लगी हुई मिले तो उसकी फोटो खींच कर भेज सके। ताकि उस पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
आग से होती है उपजाऊ शक्ति नष्ट
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि आग के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति खत्म होती है। मित्र कीट जल जाते हैं। जैव विविधिता को भी नुकसान होता है। पेड़-पौधे भी जल जाते हैं। जिससे किसानों को आर्थिक हानि भी होती है। कई बार जान-माल का भी नुकसान हो जाता है। आग बेकाबू हो जाती है। इसलिए किसान आग ना लगाएं। अवशेषों को खाद की तरह प्रयोग करें। एक बार सूखे अवशेषों को जुताई कर दें। इसके बाद पानी दें। तो यह अपने आप खाद में बदल जाएगा। भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
पता करवाया जा रहा है कि कौन-कौन से किसान अपनी फसल के अवशेष जला रहे हैं। लिस्ट बनाई जा रही है। शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी।
संजय जून, डीसी, कैथल।
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धड़ल्ले से लगाई जा रही है आग
जिले में गेहूं के फानों के बाद बचे हुए अवशेष में आग लग रही है। वहीं कई जगह अज्ञात कारणों से भी आग लग रही है। गर्मी के मौसम में तापमान अधिक रहता है, इससे भी आग लगातार भड़क रही है। लेकिन काफी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो जल्दी अपनी भूमि को साफ करने के चक्कर में अपने ही खेतों की उपजाऊ शक्ति को साफ कर रहे हैं।
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जिले में गुहला-चीका, राजौंद एवं कलायत के एरिया में धड़ल्ले से आग लगाई जा रही है। कलायत से कैथल की ओर आते समय कुछेक एकड़ नहीं बल्कि सैकड़ों एकड़ में आग लगी हुई दिखाई दे रही है। वहीं मंगलवार को गुहणा से कैथल आने वाले मार्ग पर दिन में ही आग जलती हुई दिखाई दी।
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पक्षियों से लेकर वन विभाग के पेड़ों तक का भारी नुकसान
इस आग से खेतों में उन पक्षियों के परिवार खत्म हो रहे हैं, जो फसल कटाई के बाद खुले में अंडे देते हैं। साथ ही खेतों के किनारे खड़े पेड़-पौधे भी जल रहे हैं। किसान की अपनी भूमि की उपजाऊ शक्ति का नुकसान होता है, वह अलग है।
महज 40 लोगों की पहचान की है विभाग ने
कृषि उप-निदेशक डा. महावीर सिंह का कहना है कि विभाग ने 40 लोगों की पहचान कर ली है। उन पर केस चलेगा या फिर जुर्माना किया जाएगा। इस बारे में फैसला लिया जाना है। इसके अलावा भी आगजनी की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है। कई जगह अज्ञात कारणों से भी आग लग रही है।
रात को ज्यादा लगती है आग
रात के समय आगजनी के ज्यादा मामले होते हैं। कई लोगों ने बताया कि रात को लगभग हर रोड से जाते समय खेतों में आग लगी हुई दिखाई देती है।
राजनीतिक दबाव भी रहता है कुछेक अधिकारियों पर
वहीं सूत्रों का कहना है कि कोई अधिकारी यदि कार्रवाई करने की बात करता है तो राजनीतिक दबाव भी हावी रहता है। कई नेताओं की सिफारिशों के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती। जिस कारण अधिकारी भी इस तरह की किसी कार्रवाई से बचने का प्रयास करते हैं।
सरकार उठाए कठोर कदम
पक्षियों के लिए काम कर रही कैथल की जानीं-मानीं पैथोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट डा. चेतना शर्मा ने कहा कि इस आगजनी का सबसे बुरा असर पक्षियों पर पड़ रहा है। वे स्वयं कई जगह ऐसी फोटो लेकर आती हैं, जब पक्षी फसल कटने के बाद अंडे देते हैं। आग के कारण उनके अंडे जल रहे हैं। सरकार इस दिशा में कठोर कदम उठाए। वे दो बार डीएफओ से मिलने गई थीं, लेकिन वे नहीं मिल सकीं। वे बुधवार को भी अंबाला रोड से आ रहीं थीं, तो ड्रेन के निकट आग लगी हुई है और धुएं से ही भारी नुकसान हो रहा है।
टोल फ्री नंबर जारी करे प्रशासन
प्रकृति प्रेमियों ने मांग की है कि प्रशासन जिले में टोल फ्री नंबर या फिर कोई व्हॉट्सएप नंबर जारी करे। जिस पर आम आदमी यदि कहीं आग लगी हुई मिले तो उसकी फोटो खींच कर भेज सके। ताकि उस पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
आग से होती है उपजाऊ शक्ति नष्ट
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि आग के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति खत्म होती है। मित्र कीट जल जाते हैं। जैव विविधिता को भी नुकसान होता है। पेड़-पौधे भी जल जाते हैं। जिससे किसानों को आर्थिक हानि भी होती है। कई बार जान-माल का भी नुकसान हो जाता है। आग बेकाबू हो जाती है। इसलिए किसान आग ना लगाएं। अवशेषों को खाद की तरह प्रयोग करें। एक बार सूखे अवशेषों को जुताई कर दें। इसके बाद पानी दें। तो यह अपने आप खाद में बदल जाएगा। भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
पता करवाया जा रहा है कि कौन-कौन से किसान अपनी फसल के अवशेष जला रहे हैं। लिस्ट बनाई जा रही है। शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी।
संजय जून, डीसी, कैथल।