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Kaithal News: द्वेष, कपट, स्वार्थ की होली जलाइए, गले मिलकर प्रेम से होली मनाइए
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में रविवार को साहित्य सभा कैथल ने एक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में काॅलेज से सेवानिवृत्त हुए प्राचार्य डाॅ. संजय गोयल और उनकी उनकी धर्म-पत्नी प्रो. गीता गोयल व नव नियुक्त डाॅ. सत्यवीर मेहला का अभिनंदन किया। गोष्ठी का आरंभ श्याम सुंदर शर्मा गौड़ और रजनीश शर्मा की ओर से गाई सरस्वती वंदना से हुआ।
इसके बाद सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान और उप प्रधान कमलेश शर्मा ने से साहित्य के इतिहास और सभा के कुछ अविस्मरणीय पलों पर प्रकाश डाला। गोष्ठी के दौरान अतिथियों ने सतपाल पराशर आनंद की पुस्तक आनंद हाइकु सतसई और श्याम सुंदर शर्मा गौड़ की पुस्तक कैथल का इतिहास का लोकार्पण किया।
काव्य-गोष्ठी में होली पर्व का संदेश देते हुए श्याम सुंदर शर्मा गौड़ ने कहा, द्वेष, कपट, स्वार्थ की होली जलाइए, गले मिलकर प्रेम से होली मनाइए। धरती माता के प्रति श्रद्धा-भाव दिखाते हुए सुरेश कुमार कल्याण ने कहा, पूजूं धरती मात को, जो जीवन का आधार। जीव अंक में खेलते, सहती सबका भार।डाॅ. गीता गोयल ने प्रो. अमृत लाल मदान के व्यक्तित्व के कुछ उज्जवल पक्षों को रेखांकित किया।
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व्यवस्था को झकझोरते हुए राजकुमारी मदान ने कहा, हे न्याय की देवी, अब तो खोल, आंखों की पट्टी। कब तक बनी रहेगी गांधारी। हास्य-व्यंग्य से भरपूर डाॅ. तेजिंद्र का मुक्तक देखिए, महिलाएं पढ़-लिखकर होशियार बन गई ।महिला थानों की थानेदार बन गईं। पति बेचारे अल्प मत में आ गए, घर में महिलाओं की सरकार बन गई।
माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट हुए ईश्वर चंद गर्ग ने कहा, मेरे सिर पर साया है मां-बाप का, मेरे सिर पर आशीष की टकसाल है। वर्तमान वातावरण में जीने वालों को चेताते हुए प्रो. विजय कुमार सिंघल ने कहा, इस शहर में जीने की कोई उम्र नहीं, जीने की शर्त पर, यहां ना जिंदगी तलाश। काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने की जबकि संचालन ईश्वर चंद गर्ग ने और छाया-चित्रांकन का कार्य युवा कवि राजेश भारती ने किया। इस मौके पर मधु गोयल मधुल, दिनेश बंसल दानिश, रविंद्र रवि, कमलेश शर्मा, रामफल गौड़, सतपाल पराशर आनंद, बलवान सिंह कुंडू आदि उपस्थित रहे।
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इसके बाद सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान और उप प्रधान कमलेश शर्मा ने से साहित्य के इतिहास और सभा के कुछ अविस्मरणीय पलों पर प्रकाश डाला। गोष्ठी के दौरान अतिथियों ने सतपाल पराशर आनंद की पुस्तक आनंद हाइकु सतसई और श्याम सुंदर शर्मा गौड़ की पुस्तक कैथल का इतिहास का लोकार्पण किया।
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काव्य-गोष्ठी में होली पर्व का संदेश देते हुए श्याम सुंदर शर्मा गौड़ ने कहा, द्वेष, कपट, स्वार्थ की होली जलाइए, गले मिलकर प्रेम से होली मनाइए। धरती माता के प्रति श्रद्धा-भाव दिखाते हुए सुरेश कुमार कल्याण ने कहा, पूजूं धरती मात को, जो जीवन का आधार। जीव अंक में खेलते, सहती सबका भार।डाॅ. गीता गोयल ने प्रो. अमृत लाल मदान के व्यक्तित्व के कुछ उज्जवल पक्षों को रेखांकित किया।
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व्यवस्था को झकझोरते हुए राजकुमारी मदान ने कहा, हे न्याय की देवी, अब तो खोल, आंखों की पट्टी। कब तक बनी रहेगी गांधारी। हास्य-व्यंग्य से भरपूर डाॅ. तेजिंद्र का मुक्तक देखिए, महिलाएं पढ़-लिखकर होशियार बन गई ।महिला थानों की थानेदार बन गईं। पति बेचारे अल्प मत में आ गए, घर में महिलाओं की सरकार बन गई।
माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट हुए ईश्वर चंद गर्ग ने कहा, मेरे सिर पर साया है मां-बाप का, मेरे सिर पर आशीष की टकसाल है। वर्तमान वातावरण में जीने वालों को चेताते हुए प्रो. विजय कुमार सिंघल ने कहा, इस शहर में जीने की कोई उम्र नहीं, जीने की शर्त पर, यहां ना जिंदगी तलाश। काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान ने की जबकि संचालन ईश्वर चंद गर्ग ने और छाया-चित्रांकन का कार्य युवा कवि राजेश भारती ने किया। इस मौके पर मधु गोयल मधुल, दिनेश बंसल दानिश, रविंद्र रवि, कमलेश शर्मा, रामफल गौड़, सतपाल पराशर आनंद, बलवान सिंह कुंडू आदि उपस्थित रहे।