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ओलंपिक में पदक जीतना ही अगला लक्ष्य : मनोज
ब्यूरो कैथल
Updated Sun, 26 Jun 2016 12:05 AM IST
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बॉक्सर मनोज
- फोटो : फाइल फोटो
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ओलंपिक के लिए चुने गए बॉक्सर मनोज ने अपने चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि अब उसका अगला लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है।
अपने भाई एवं कोच राजेश कुमार को अपनी सफलता का श्रेय देते हुए मनोज ने कहा कि उनका खेल जीवन उतार-चढ़ाव वाला रहा है, क्योंकि खेलों में उनका कोई गॉड फादर नहीं रहा। उनके कोच राजेश ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया।
मनोज ने ई-मेल के जरिए बताया कि उसने पीएम समय लेने के लिये रात को ट्वीट भी किया है। अगर प्रधानमंत्री जी समय देंगे तो वह भारत में बॉक्सिंग के हालातों पर उनसे बात करेंगे। देश में बॉक्सरों के हालात के चलते प्रोफेशनल बॉक्सिंग की ओर खिलाड़ी आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनके कोच को अभी तक द्रोणाचार्य आवार्ड नहीं दिया गया। जबकि वर्ष 2010 के गोल्ड मेडलिस्ट सभी खिलाड़ियों के कोचों को यह आवार्ड मिल चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास पिछले एक साल से कोई फंड की सुविधा या फिर स्पांसरशिप नहीं थी। इसके बावजूद बिना किसी आर्थिक सहायता के उसके कोच ने उन्हें किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी।
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मनोज को अपने गांव में स्टेडियम न होना भी खलता है। उन्होंने कहा कि उनके समकक्ष उपलब्धियों वाले खिलाड़ी डीएसपी पद पर सुशोभित हैं। जबकि वे आज भी रेलवे में क्लास सी की नौकरी कर रहे हैं। मनोज ने अपनी सफलता के लिए नेशनल कैंप के सभी कोच और सपोर्टिंग स्टाफ सहित देशवासियों का आभार जताया और कहा कि वह ओलंपिक में जरूर मेडल लेकर ही लौटेगा।
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अपने भाई एवं कोच राजेश कुमार को अपनी सफलता का श्रेय देते हुए मनोज ने कहा कि उनका खेल जीवन उतार-चढ़ाव वाला रहा है, क्योंकि खेलों में उनका कोई गॉड फादर नहीं रहा। उनके कोच राजेश ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया।
मनोज ने ई-मेल के जरिए बताया कि उसने पीएम समय लेने के लिये रात को ट्वीट भी किया है। अगर प्रधानमंत्री जी समय देंगे तो वह भारत में बॉक्सिंग के हालातों पर उनसे बात करेंगे। देश में बॉक्सरों के हालात के चलते प्रोफेशनल बॉक्सिंग की ओर खिलाड़ी आकर्षित हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि उनके कोच को अभी तक द्रोणाचार्य आवार्ड नहीं दिया गया। जबकि वर्ष 2010 के गोल्ड मेडलिस्ट सभी खिलाड़ियों के कोचों को यह आवार्ड मिल चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास पिछले एक साल से कोई फंड की सुविधा या फिर स्पांसरशिप नहीं थी। इसके बावजूद बिना किसी आर्थिक सहायता के उसके कोच ने उन्हें किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी।
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मनोज को अपने गांव में स्टेडियम न होना भी खलता है। उन्होंने कहा कि उनके समकक्ष उपलब्धियों वाले खिलाड़ी डीएसपी पद पर सुशोभित हैं। जबकि वे आज भी रेलवे में क्लास सी की नौकरी कर रहे हैं। मनोज ने अपनी सफलता के लिए नेशनल कैंप के सभी कोच और सपोर्टिंग स्टाफ सहित देशवासियों का आभार जताया और कहा कि वह ओलंपिक में जरूर मेडल लेकर ही लौटेगा।