{"_id":"6a0b6901a44f975f7203e894","slug":"before-the-cleanliness-survey-the-sanitation-system-deteriorated-with-heaps-of-garbage-everywhere-kaithal-news-c-245-1-kht1013-149541-2026-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले बिगड़ी सफाई व्यवस्था, जगह-जगह कचरे के ढेर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले बिगड़ी सफाई व्यवस्था, जगह-जगह कचरे के ढेर
Tue, 19 May 2026 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 May 2026 01:01 AM IST
विज्ञापन
कमेटी चौक से आगे लगे कचरे के ढेर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीमों का आगमन कभी भी हो सकता है। एक ओर प्रशासन गार्बेज फ्री सिटी (कचरा मुक्त शहर) और वाटर प्लस जैसी शीर्ष श्रेणियों में आवेदन की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की जमीनी हकीकत दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। बिगड़ी सफाई व्यवस्था के कारण आगामी सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
शहर की मुख्य सड़कों, व्यस्त बाजारों और रिहायशी गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इनसे उठ रही बदबू और गंदगी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच रही हैं। हालात यह हैं कि पॉश इलाकों से लेकर प्रमुख चौराहों तक कई स्थान डंपिंग साइट जैसे नजर आने लगे हैं, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण की आईसी विशेषज्ञ भारती मलिक ने बताया कि शहर में स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और नागरिकों को भी साफ-सफाई में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी परेशानी
सफाई व्यवस्था चरमराने के पीछे हाल ही में हुई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को बड़ी वजह माना जा रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी 14 मई तक हड़ताल पर रहे और नगर परिषद के मुख्य गेट पर धरना दिया।
विज्ञापन
इस दौरान शहर में नियमित सफाई कार्य और कचरा उठान प्रभावित रहा। हालांकि कर्मचारी अब काम पर लौट आए हैं, लेकिन कई दिनों से जमा बैकलाग कचरे को हटाना नगर परिषद के लिए चुनौती बना हुआ है।
बेहतर प्रदर्शन के लिए आवेदन की तैयारी
नगर परिषद इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए गार्बेज फ्री सिटी (स्टार रेटिंग) और वाटर प्लस प्रमाणन के लिए आवेदन करने की तैयारी में है। इन श्रेणियों के लिए कचरे का शत-प्रतिशत उठान, गीले-सूखे कचरे का पृथक्करण और नालों की नियमित सफाई जैसे कड़े मानक निर्धारित हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि केंद्रीय टीम के निरीक्षण के दौरान शहर इन मानकों पर पिछड़ सकता है।
विज्ञापन
कैथल। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीमों का आगमन कभी भी हो सकता है। एक ओर प्रशासन गार्बेज फ्री सिटी (कचरा मुक्त शहर) और वाटर प्लस जैसी शीर्ष श्रेणियों में आवेदन की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की जमीनी हकीकत दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। बिगड़ी सफाई व्यवस्था के कारण आगामी सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
शहर की मुख्य सड़कों, व्यस्त बाजारों और रिहायशी गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इनसे उठ रही बदबू और गंदगी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच रही हैं। हालात यह हैं कि पॉश इलाकों से लेकर प्रमुख चौराहों तक कई स्थान डंपिंग साइट जैसे नजर आने लगे हैं, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण की आईसी विशेषज्ञ भारती मलिक ने बताया कि शहर में स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और नागरिकों को भी साफ-सफाई में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विज्ञापन
कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी परेशानी
सफाई व्यवस्था चरमराने के पीछे हाल ही में हुई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को बड़ी वजह माना जा रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी 14 मई तक हड़ताल पर रहे और नगर परिषद के मुख्य गेट पर धरना दिया।
विज्ञापन
इस दौरान शहर में नियमित सफाई कार्य और कचरा उठान प्रभावित रहा। हालांकि कर्मचारी अब काम पर लौट आए हैं, लेकिन कई दिनों से जमा बैकलाग कचरे को हटाना नगर परिषद के लिए चुनौती बना हुआ है।
बेहतर प्रदर्शन के लिए आवेदन की तैयारी
नगर परिषद इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए गार्बेज फ्री सिटी (स्टार रेटिंग) और वाटर प्लस प्रमाणन के लिए आवेदन करने की तैयारी में है। इन श्रेणियों के लिए कचरे का शत-प्रतिशत उठान, गीले-सूखे कचरे का पृथक्करण और नालों की नियमित सफाई जैसे कड़े मानक निर्धारित हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि केंद्रीय टीम के निरीक्षण के दौरान शहर इन मानकों पर पिछड़ सकता है।