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Kaithal News: फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किया जागरूक

Tue, 17 Sep 2024 04:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 17 Sep 2024 04:40 AM IST
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Awareness raised for crop residue management
संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन/गुहला-चीका। कृषि विभाग की टीम ने खंड के गांव अटैला, मांझला में प्रशिक्षण शिविर लगाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया। उधर, चीका में भी आयोजन हुआ।

सीवन में कैथल के उपमंडल कृषि अधिकारी डाॅ. सतीश कुमार नारा ने बताया कि उप-कृषि निदेशक डाॅ. बाबू लाल के निर्देशाें पर गांवों में इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं व किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि धान की कटाई के बाद धान के फसल के अवशेषों में बिल्कुल भी आग न लगाएं। सभी किसान पराली का प्रबंधन करके विभाग से एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाए। कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से जो वायु प्रदूषण होता है।
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उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि फसल अवशेषों को न जलाए, जमीन को स्वस्थ व उपजाऊ बनाए और शुद्ध वातावरण बनाए। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल की टीम में एटीएम अनूप, कृषि पर्यवेक्षक विरेंद्र भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर किसान संदीप, साहिल, पिरथी सिंह, महीपाल सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।

उधर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग चीका की ओर से चीका में सोमवार को जागरूकता शिविर लगाया। इस कार्यक्रम में उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. विनोद वर्मा ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से जहां वातावरण प्रदूषित होता है, वहीं जमीन की उपजाऊ क्षमता भी कम होती है। किसान फसलों के अवशेष ना जलाकर उनका प्रबंधन करना सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे इस मामले में किसानों को जागरूक करते हुए प्रबंधन बारे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग चीका द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दें।

कहा कि धान के अवशेषों को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाने पर किसानों को पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह राशि नोन बासमती व मुच्छल धान वैरायटी के अतिरिक्त बासमती धान के अवशेषों के प्रबंधन पर दी जाएगी।


उन्होंने कहा कि किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सेबल एमबी प्लॉव व जीरो टिल सीड ड्रील की सहायता से धान अवशेष को मिट्टी में मिलाकर प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. कंचन कुमारी, डॉ. ईश्वर सिंह भी मौजूद रहे।
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