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अब मंत्री से नहीं सीएम से होगी बात
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:36 AM IST
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आशा वर्कर्स ने शवयात्रा निकाली
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आशा वर्कर्स यूनियन ने अपनी समस्याओं को लेकर शहर में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की शव यात्रा निकाल कर पिहोवा चौक पर उनका पुतला जलाया। साथ ही सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इससे पूर्व आशा वर्कर्स यूनियन की सदस्य जवाहर पार्क में एकत्रित हुई। जहां से नारेबाजी करते हुए अनिल विज की शवयात्रा लेकर पिहोवा चौक पर पहुंची। यहां जिला प्रधान संतोष व जिला सचिव सर्वजीत ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने संगठन को दो बार बातचीत के लिए लिखित में समय दिया लेकिन ऐन वक्त पर मंत्री जी अपने निर्धारित स्थान पर बिना कोई सूचना दिए नहीं मिले। जिससे आशा वर्कर्स में भारी रोष है। अब संगठन ने फैसला लिया है कि अब वे मंत्री से बात नहीं करेंगे। बात करनी पड़ी तो सीएम से ही बात करेंगे। उन्होंने कहा कि आशाओं को केवल 500 रुपये मानदेय दिया जाता है और उनसे काम नियमित कर्मचारी से भी ज्यादा लिया जाता है। जबकि उन्हें मजदूर भी नहीं माना जाता। उन्होंने मांग की कि उन्हें कम से कम 18000 रुपये वेतन दिया जाए। लिंगानुपात के लिए उन्हें दोषी ठहराना बंद किया जाए। फेसलीटेटर को हटाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए। आशा वर्कर्स के रुके हुए बजट को तुरंत जारी किया जाए। आशाओं के ड्रेस के पैसे हर 6 माह बाद दिए जाएं व उनकी राशी 200 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये की जाए। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को करनाल में होने वाली रैली में आशा वर्कर्स बढ़-चढ़ कर भाग लेंगी।
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इससे पूर्व आशा वर्कर्स यूनियन की सदस्य जवाहर पार्क में एकत्रित हुई। जहां से नारेबाजी करते हुए अनिल विज की शवयात्रा लेकर पिहोवा चौक पर पहुंची। यहां जिला प्रधान संतोष व जिला सचिव सर्वजीत ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने संगठन को दो बार बातचीत के लिए लिखित में समय दिया लेकिन ऐन वक्त पर मंत्री जी अपने निर्धारित स्थान पर बिना कोई सूचना दिए नहीं मिले। जिससे आशा वर्कर्स में भारी रोष है। अब संगठन ने फैसला लिया है कि अब वे मंत्री से बात नहीं करेंगे। बात करनी पड़ी तो सीएम से ही बात करेंगे। उन्होंने कहा कि आशाओं को केवल 500 रुपये मानदेय दिया जाता है और उनसे काम नियमित कर्मचारी से भी ज्यादा लिया जाता है। जबकि उन्हें मजदूर भी नहीं माना जाता। उन्होंने मांग की कि उन्हें कम से कम 18000 रुपये वेतन दिया जाए। लिंगानुपात के लिए उन्हें दोषी ठहराना बंद किया जाए। फेसलीटेटर को हटाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए। आशा वर्कर्स के रुके हुए बजट को तुरंत जारी किया जाए। आशाओं के ड्रेस के पैसे हर 6 माह बाद दिए जाएं व उनकी राशी 200 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये की जाए। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को करनाल में होने वाली रैली में आशा वर्कर्स बढ़-चढ़ कर भाग लेंगी।
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