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Kaithal News: आर्य समाज ने जताई नाराजगी
Fri, 19 Dec 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 19 Dec 2025 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बरवाला कांड के दोषी रामपाल दास द्वारा रोहतक स्थित करौंथा आश्रम पर दोबारा कब्जा करने की आशंका ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। वीरवार दोपहर आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिमंडल ने सरपंच नरेंद्र जुलानी खेड़ा और मनीराम आर्य के नेतृत्व में उपायुक्त अपराजिता को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने आगाह किया कि उन्हें सूचना मिली है कि रामपाल समर्थक फिर से आश्रम में घुसने की फिराक में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इसे रोकने के लिए तुरंत कार्यवाही
नहीं की, तो प्रदेश की शांति भंग हो सकती है और आर्य समाज इसका पुरजोर
विरोध करेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने 2006 और 2013 के खूनी गोलीकांड का हवाला देते हुए कहा कि उस हिंसा में शहीद सोनू, ब्रह्मचारी, उदयवीर और प्रोमिला सहित चार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उस समय हुए समझौते के तहत प्रशासन ने आश्रम खाली करवाया था और भविष्य में इसे दोबारा न खोलने का वादा किया था।
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उपायुक्त को दिए ज्ञापन :
पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि आश्रम की 2 कनाल भूमि आर्य प्रतिनिधि सभा की है और वे इस अनाचार के अड्डे को फिर से आबाद नहीं होने देंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आश्रम खोलने की अनुमति दी गई तो समाज किसी भी कीमत पर इसे बर्दाश्त नहीं करेगा और हालात बिगड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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कलायत। बरवाला कांड के दोषी रामपाल दास द्वारा रोहतक स्थित करौंथा आश्रम पर दोबारा कब्जा करने की आशंका ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। वीरवार दोपहर आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिमंडल ने सरपंच नरेंद्र जुलानी खेड़ा और मनीराम आर्य के नेतृत्व में उपायुक्त अपराजिता को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने आगाह किया कि उन्हें सूचना मिली है कि रामपाल समर्थक फिर से आश्रम में घुसने की फिराक में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इसे रोकने के लिए तुरंत कार्यवाही
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नहीं की, तो प्रदेश की शांति भंग हो सकती है और आर्य समाज इसका पुरजोर
विरोध करेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने 2006 और 2013 के खूनी गोलीकांड का हवाला देते हुए कहा कि उस हिंसा में शहीद सोनू, ब्रह्मचारी, उदयवीर और प्रोमिला सहित चार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उस समय हुए समझौते के तहत प्रशासन ने आश्रम खाली करवाया था और भविष्य में इसे दोबारा न खोलने का वादा किया था।
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उपायुक्त को दिए ज्ञापन :
पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि आश्रम की 2 कनाल भूमि आर्य प्रतिनिधि सभा की है और वे इस अनाचार के अड्डे को फिर से आबाद नहीं होने देंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आश्रम खोलने की अनुमति दी गई तो समाज किसी भी कीमत पर इसे बर्दाश्त नहीं करेगा और हालात बिगड़ने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।