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सेना के पास होंगी शक्तियां तभी काबू होगा आतंक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 12:45 AM IST
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Army will have powers only then terror will be controlled
घाटी में चल रही टारगेट किलिंग में कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है। बिगड़ते माहौल को नियंत्रित करने के लिए समाज के प्रबुद्ध लोगों ने सुरक्षा बढ़ाने, सेना को अतिरिक्त शक्तियां देने और आमजन को मिल-जुलकर रहने की सलाह दी है। इसके अलावा इन प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि जो लोग घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के तहत शहर के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों से बातचीत की गई। उनके विचार इस प्रकार रहे।
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पुलिस कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान व रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी ओमप्रकाश करोड़ा ने कहा कि घाटी में सेना का नेतृत्व करने वाले अधिकारियों को निर्णय लेने की आजादी होनी चाहिए। सरकार के दबाव में सैनिक काम नहीं कर पाते। वहां किसी भी निर्णय पर लोगों की राय भी ली जाए। फोर्स का स्थानीय पुलिस से तालमेल होना चाहिए। पत्थर मारने वालों व मुद्दे को भड़काने वालों पर नकेल कसी जाए।
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अधिवक्ता प्रदीप रापडिय़ा ने कहा कि माहौल को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय लोगों को सुरक्षा दी जाए। कॉलोनी के हिसाब से हर क्षेत्र में सुरक्षा कर्मचारी तैनात किए जाएं। डर का माहौल समाप्त करने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
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पूर्व सैनिक कैप्टन बलजीत मोर ने कहा कि मुद्दे को देखते हुए वहां सेना के हाथ मजबूत किए जाएं और सेना को अतिरिक्त शक्ति दी जाए। पत्थर मारने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। ऐसे लोगों को काबू कर कड़ी सजा दी जाए। जाति व धर्म वाद पर रोक लगाने का प्रयास किया जाए। सेना का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
प्रिंसिपल सुशील कुमार ने कहा कि वहां कुछ लोग एक-दूसरे के विरोधी बने बैठे हैं। सबसे पहले तो जनता को चाहिए कि मिलजुल कर भाईचारे से रहें। सरकार भी लोगों को समझाए और शांतिपूर्वक रहने के लिए कदम उठाए। अगर फिर भी कोई व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करता है तो गोली का जवाब गोली से दिया जाए।
समाजसेवी सतपाल गुप्ता ने कहा कि ऐसे माहौल में सेना को निर्णय लेने की अनुमति देना सही है। इससे काफी हद तक स्थिति काबू हो सकती है। इसके अलावा लोगों को भी समझाया जाए कि एक शांत और सुरक्षित माहौल में जीवनयापन सही ढंग से हो सकता है। लोगों को एक दूसरे के साथ मिलकर रहना चाहिए।

वरिष्ठ शिक्षक मास्टर सतबीर गोयत ने कहा कि यह क्षेत्र शुरू से ही संवेदनशील रहा है। जब आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले लोग युवाओं को बहका सकते हैं तो सरकार को चाहिए कि उन्हें जागरूक कर समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करे। बंदूक के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं होता। लोगों के जेहन से नफरत मिटाकर एक दूसरे के लिए हमदर्दी पैदा करने का प्रयास किया जाए।
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