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अमर उजाला, ग्राउंड रिपोट......

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2020 12:21 AM IST
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amar ujala ground report on rain
मौसम की मार के चलते जिले में गेहूं के अलावा सब्जी उत्पादक किसान भी बेहाल हैं। करीब 1 हजार से अधिक एकड़ में सीवन क्षत्र के गांवों में सब्जियों व खरबूजे की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसान फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं और जनरेटरों की मदद से खेतों में जमा पानी निकाल रहे हैं। फसल कितनी बच पाती है, यह समय बताएगा। इस संबंध में अमर उजाला ने सीवन क्षेत्र के खेतों में जाकर ग्राउंड रिपोर्ट जुटाई।
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किसान सुरजीत सिंह, हरजिंद्र सिंह, हरजीत सिंह, लखविंद्र व प्रदीप ने बताया कि उन्होंने 24 हजार रुपये से लेकर 80-80 हजार रुपये प्रति किलो बीज खरीद कर खरबूजे की फसल लगाई है। बीज के अलावा तिरपालें ढकने और पानी निकालने व देखरेख की लागत अलग से हुई है। किसान उम्मीद तो कर रहे हैं कि शायद अब बरसात बंद हो जाए, लेकिन अगर और ज्यादा बरसात या ओले पड़े तो फसल बर्बाद होना निश्चित है।
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बोबी किस्म के खरबूजे की फसल खराब होने के आसार ज्यादा-किसानों ने बताया कि उन्होंने इस बार क्षेत्र में चार अलग-अलग किस्म के खरबूजे की फसल उगाई है। फार्मर ग्लोरी, डायमंड ग्लोरी और गोल्डन ग्लोरी खरबूजे का बीज तो 25 हजार रुपये किलो तक किसानों को उपलब्ध हो गया था, लेकिन अगेती और मुनाफा देने वाली किस्म बोबी खरबूजे की है, जिसके 80 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से उन्होंने बीज लेकर फसल उगाई है। अगर बरसात अब भी नहीं रुकता है और बेलें बढऩे लगी तो इससे इस किस्म को नुकसान होने के आसार और ज्यादा हैं।
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ऐसे ही हालात आलू की फसल के हैं। आलू के पौधे पूरी तरह से बरसाती पानी और ओले से गल चुके हैं। जो आलू जमीन से बाहर दिख रहे हैं, उनका रंग भी काला या हरा हो गया है। रंग बदलने का सीधा प्रभाव सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा। किसानों ने बताया कि अगर पौधे कुछ दिन और हरे रहते तो आलू की फसल भी मोटी होती, लेकिन अब जमीन को खोदने के बाद ही पता चलेगा कि मिट्टी में दबी फसल भी सुरक्षित है या नहीं।
बेलों वाली फसल में से केवल टिंडा और पेठे की फसल ही सुरक्षित:-सब्जी उत्पादक किसानों ने बताया कि बेलों पर लगने पाली फसलें तो पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। मटर गल गए हैं। इनमें से केवल पेठे और टिंडा की बेलें भी इसलिए बची हैं, क्योंकि वे कम जगह में फैलती हैं और जमीन से थोड़ा उपर उठी रहती हैं। नुकसान तो उनको भी हुआ है, क्योंकि ओले पडऩे से उन बेलों के पत्ते कट व छन गए हैं। पत्ते खराब होने का असर उनकी पैदावार पर होगा और उत्पादन भी इससे प्रभावित होगा।
सीवन क्षेत्र के तहत आने वाले गांवों में किसान हर वर्ष 250 से 300 एकड़ में खरबूजे की खेती हैं। खरबूजे की एक फसल करीब दो से तीन महीने में तैयार हो जाती है। किसानों ने बताया कि इस रकबे से किसानों को करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक आय प्राप्त होती है, लेकिन इसमें फसल के खर्च और मेहनत भी शामिल होती है। प्रति एकड़ में कुल खर्च और मजदूरी को अलग निकालने के बाद किसानों को करीब आधी बचत होती है, लेकिन इसके लिए दिन रात फसल की रखवाली में जुटे रहना पड़ता है।
किसान सुरजीत सिंह ने बताया कि खरबूजे का एक किलो बीज तीन एकड़ में बीजाई के लिए पर्याप्त है। अगर बरसात या अन्य किसी सी कारण से बीज खराब हो जाए तो दोबारा खेतों को तैयार कर फसल उगानी पड़ती है और लागत भी दोगुना हो जाती है। इस बार जिस तरीके से बरसात हो रही है। किसानों को डर है कि कहीं फसल पूरी तरह ही खराब न हो जाए। उन्होंने यह भी बताया कि जो बेलें बढ़ी हो चुकी हैं, उनकी पैदावार इस बार जरूर कम रहेगी।
किसान हरजिंद्र सिंह ने बताया कि आलू, खरबूजा और मटर के साथ-साथ बरसात से गोभी और खीरा का फसल पर भी प्रभाव पड़ेगा। 300 से 400 एकड़ में आलू की फसल को बरसात ने काफी नुकसान पहुंचाया है। सब्जियों का बीमा तक नहीं किया गया है। ऐसे में वे किसी को कोई दोष भी नहीं दे सकते हैं। अब कितना मुनाफा होगा या कितना नुकसान ये तो फस्ल खुदाई के बाद ही सही पता चल पाएगा। फिर भी नुकसान के संभावना ज्यादा हैं।
किसान हरजीत सिंह ने बताया कि आलू की फसल का रंग हरा या काला पडऩे से इसकी कीमतों पर भी पभाव पड़ेगा। पानी सूखने के बाद फसल की खुदाई की जाएगी। अगर जमीन के अंदर भी फसल ऐसे ही मिली तो किसानों को उनकी मेहनत और लागत भी पूरी करनी श्कल हो जाएगी।

किसान प्रदीप, जसविंद्र सिंह व लखविंद्र सिंह ने बताया कि सभी किसानों ने फसलों से पानी निकालने के लिए पंप खरीदे हैं। धूप निकलने के बाद खेतों से जितना पानी बाहर निकालते हैं, अगले दिन बरसात होने से दोबार फिर उतना ही पानी फसल में जमा हो जाता है। किसानों को फसल बचाने के चक्कर में सामान्य से कई गुणा ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। सांसद नायब सैनी ने कहा कि अधिकारियों को खराब फसल के लिए गिरदावरी के निर्देश जारी किए गए हैं। जिन किसानों को नुकसान की आशंका है, वे पीएम फसल बीमा योजना के तहत अपने आवेदन विभाग को दें।
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