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Kaithal News: कृषि स्टार्ट-अप्स कोष से निखरेगी कृषि प्रधान हरियाणा की दशा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Feb 2023 05:00 AM IST
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Agriculture start-ups fund will improve the condition of agriculture-oriented Haryana
कैथल। केंद्र सरकार ने कृषि विकास के लिए केंद्र एक कृषि कोष के गठन करने की घोषणा की है। इससे कृषि प्रधान प्रदेश हरियाणा को विशेष लाभ मिलेगा। नई तकनीकों का प्रयोग कर आधुनिक कृषि में देश को राह दिखा रहे हरियाणा प्रदेश का केंद्रीय पूल में खाद्यान्न मामले में अकेले का 15 प्रतिशत से अधिक का योगदान है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि के लिए अलग से कोष का गठन करने से हरियाणा की कृषि की हालत भी सुधरेगी और पूरे प्रदेश को इसका लाभ मिलेगा। स्टार्ट-अप्स में किसान अपने उत्पाद खुद बेचेंगे तो न केवल उन्हें बल्कि उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
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गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बजट में कृषि के लिए अलग से कोष का गठन करने का फैसला लिया है। युवाओं के लिए कृषि स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए यह कृषि कोष स्थापित किया जाएगा। अगले तीन साल तक एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती में मदद दी जाएगी। साथ ही दस हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर बनाने की भी घोषणा की गई है। इससे माना जा रहा है कि कृषि प्रधान हरियाणा की दशा बेहतर होगी। कृषि स्टार्ट-अप्स कोष से किसानों को ज्यादा कीमत व उपभोक्ताओं को बिचौलिये हटने से कम कीमत पर उत्पादन मिलेेंगे।
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कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा का केंद्रीय पूल में खाद्यान्न मामले में 15 प्रतिशत से अधिक योगदान है। गेहूं और चावल पैदावार में हरियाणा अग्रणी है वहीं बासमती चावल निर्यात में राज्य देश में नंबर वन है। कृषि उपनिदेशक डा. कर्मचंद ने बताया कि हरियाणा ने पिछले साल 44 लाख 40 हजार टन चावल की पैदावार की थी। इसी प्रकार 11 लाख 23 हजार टन बाजरे का, एक करोड़ 17 लाख 80 हजार टन गेहूं, 84 लाख 50 हजार टन गन्ने का व 26 लाख 20 हजार कपास की गांठों उत्पादन किया है।
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स्टार्ट अप्स से मिलेगा बाजार, किसान व उपभोक्ता को मिलेगा लाभ
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि कृषि में मुख्य समस्या मार्केटिंग की है। स्टार्ट-अप्स में यदि किसानों को बाजार का रास्ता मिल जाएगा तो किसानों का लाभ कई गुणा बढ़ा जाएगा। इसके अलावा उपभोक्ताओं को कम कीमत पर कृषि उत्पाद मिलेगा। यदि किसान स्टार्ट-अप बनाकर अपने उत्पाद को खुद बेचेगा तो उसे ज्यादा लाभ मिलेगा। एफपीओ इसी योजना का उदहारण है। हरियाणा को मुख्य रूप से लाभ मिलेगा। हरियाणा में ही सबसे अधिक आधुनिक खेती अपनाने वाले किसान हैं। यह प्रदेश केंद्रीय राजधानी के निकट है। इतना ही नहीं सबसे अधिक प्रगतिशील किसान पुरस्कार इसी प्रदेश ने जीते हैं। ऐसे में कृषि में स्टार्ट-अप्स के लिए अलग से फंड स्थापित होने से किसानों को ही नहीं पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा।

इसी प्रकार ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का काम कर रहे सुरेंद्र ढुल ने कहा कि सरकार की घोषणा से खेती के परंपरागत तरीके बदलेंगे और प्रदेश में नई तकनीक विकसित होंगी। जिससे किसान को लाभ होगा।
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