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स्वदेशी अपनाने से अर्थव्यवस्था होती है सशक्त : डॉ. ऋषिपाल
Tue, 13 Jan 2026 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस पर बाबू अनंत राम जनता महाविद्यालय, कौल में प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की स्वामी विवेकानंद युवा प्रकोष्ठ की कार्यक्रम अधिकारी एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वदेशी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और स्थानीय कारीगरों, किसानों एवं उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है।
स्वामी विवेकानंद युवा प्रकोष्ठ एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद कल भी हमारे आदर्श थे, आज भी हैं और सदैव रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक, आध्यात्मिक चिंतक, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका विश्वास था कि युवाओं के योगदान के बिना राष्ट्र का विकास असंभव है। डॉ. पुष्पा ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी आत्मबल, राष्ट्रीय प्रेम, सेवा और अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर गौरव दिलाया।
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ढांड। स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस पर बाबू अनंत राम जनता महाविद्यालय, कौल में प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की स्वामी विवेकानंद युवा प्रकोष्ठ की कार्यक्रम अधिकारी एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वदेशी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और स्थानीय कारीगरों, किसानों एवं उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है।
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स्वामी विवेकानंद युवा प्रकोष्ठ एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद कल भी हमारे आदर्श थे, आज भी हैं और सदैव रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक, आध्यात्मिक चिंतक, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका विश्वास था कि युवाओं के योगदान के बिना राष्ट्र का विकास असंभव है। डॉ. पुष्पा ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी आत्मबल, राष्ट्रीय प्रेम, सेवा और अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर गौरव दिलाया।
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