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मत्स्य पालन अपनाएं, आमदनी बढ़ा आत्मनिर्भर बनें : डीसी
Wed, 06 Aug 2025 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 06 Aug 2025 12:47 AM IST
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कैथल । जिला मत्स्य विभाग कि ओर से कार्यक्रम में डीसी प्रीति ने मुख्य अतिथि शिरकत की और मछली बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला मत्स्य विभाग की ओर से मंगलवार को कोटिकूट तीर्थ क्योड़क में मछलियों के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से मत्स्य पुनर्वास एवं संरक्षण (रैंचिंग) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपायुक्त प्रीति रावत ने सरोवर में मछली बीज छोड़कर रैंचिंग प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया।
डीसी प्रीति ने कहा कि मछली पालन न केवल कम लागत में अधिक लाभ का जरिया है, बल्कि यह जल स्रोतों के सदुपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का भी माध्यम है। उन्होंने बताया कि सरकार की मंशा है कि मत्स्य पालन के साथ-साथ मछली संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए, और इसी सोच के तहत रैंचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
उन्होंने रैंचिंग की प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि इसमें युवा मछलियों को प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाबों और नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे उनकी आबादी में वृद्धि होती है। इसका उद्देश्य मछली प्रजातियों का संरक्षण और मछुआरों की आजीविका को सुनिश्चित करना है।
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डीसी ने कहा कि मत्स्य पालकों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और मछली पालन को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाएं।
इसके साथ ही डीसी प्रीति ने ग्रामीणों को नशे से दूर रहने, यातायात नियमों का पालन करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और जागरूक समाज ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
गांव की समस्याएं भी उठाईं ः ग्राम सरपंच जसबीर सिंह ने खराब जलघरों के ट्यूबवेल, तालाब व सीवरेज की सफाई, तथा बारिश से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत जैसी समस्याएं रखीं। डीसी प्रीति ने उन्हें शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया और कहा कि ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर कभी भी उनके कार्यालय में मिल सकते हैं।
802 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन, 8664 टन उत्पादन
जिला मत्स्य अधिकारी दिलबाग सिंह ने बताया कि जिले में वर्तमान में लगभग 802 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन किया जा रहा है, जिसमें 650 पंचायती या पट्टे पर लिए गए तालाब और 152 निजी जलाशय शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में जिले में 8664 टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में झींगा, रोहू, कतला, मृगल, कामन क्राप, सिल्वर क्राप और ग्रास क्रॉप मछलियों का पालन किया जा रहा है।
योजनाओं की जानकारी
मत्स्य अधिकारी सूर्य प्रकाश ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाले अनुदान व सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें शामिल हैं ः-
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नए तालाब की खोदाई
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खाद व खुराक
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नर्सरी और बीज पालन इकाइयों का निर्माण
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सजावटी मछली पालन इकाइयाँ
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कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट का आधुनिकीकरण
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इंसुलेटेड वाहन, मोटरसाइकिल पर आइस बॉक्स
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सोलर सिस्टम पर अनुदान
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ग्रामीण तालाबों को पट्टे पर लेने के लिए सहायता
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कैथल। जिला मत्स्य विभाग की ओर से मंगलवार को कोटिकूट तीर्थ क्योड़क में मछलियों के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से मत्स्य पुनर्वास एवं संरक्षण (रैंचिंग) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपायुक्त प्रीति रावत ने सरोवर में मछली बीज छोड़कर रैंचिंग प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया।
डीसी प्रीति ने कहा कि मछली पालन न केवल कम लागत में अधिक लाभ का जरिया है, बल्कि यह जल स्रोतों के सदुपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का भी माध्यम है। उन्होंने बताया कि सरकार की मंशा है कि मत्स्य पालन के साथ-साथ मछली संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए, और इसी सोच के तहत रैंचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
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उन्होंने रैंचिंग की प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि इसमें युवा मछलियों को प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाबों और नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे उनकी आबादी में वृद्धि होती है। इसका उद्देश्य मछली प्रजातियों का संरक्षण और मछुआरों की आजीविका को सुनिश्चित करना है।
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डीसी ने कहा कि मत्स्य पालकों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और मछली पालन को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाएं।
इसके साथ ही डीसी प्रीति ने ग्रामीणों को नशे से दूर रहने, यातायात नियमों का पालन करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और जागरूक समाज ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
गांव की समस्याएं भी उठाईं ः ग्राम सरपंच जसबीर सिंह ने खराब जलघरों के ट्यूबवेल, तालाब व सीवरेज की सफाई, तथा बारिश से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत जैसी समस्याएं रखीं। डीसी प्रीति ने उन्हें शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया और कहा कि ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर कभी भी उनके कार्यालय में मिल सकते हैं।
802 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन, 8664 टन उत्पादन
जिला मत्स्य अधिकारी दिलबाग सिंह ने बताया कि जिले में वर्तमान में लगभग 802 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन किया जा रहा है, जिसमें 650 पंचायती या पट्टे पर लिए गए तालाब और 152 निजी जलाशय शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में जिले में 8664 टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में झींगा, रोहू, कतला, मृगल, कामन क्राप, सिल्वर क्राप और ग्रास क्रॉप मछलियों का पालन किया जा रहा है।
योजनाओं की जानकारी
मत्स्य अधिकारी सूर्य प्रकाश ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाले अनुदान व सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें शामिल हैं ः-
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नए तालाब की खोदाई
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खाद व खुराक
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नर्सरी और बीज पालन इकाइयों का निर्माण
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सजावटी मछली पालन इकाइयाँ
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कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट का आधुनिकीकरण
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इंसुलेटेड वाहन, मोटरसाइकिल पर आइस बॉक्स
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सोलर सिस्टम पर अनुदान
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ग्रामीण तालाबों को पट्टे पर लेने के लिए सहायता

कैथल । जिला मत्स्य विभाग कि ओर से कार्यक्रम में डीसी प्रीति ने मुख्य अतिथि शिरकत की और मछली बीज