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Kaithal News: कपिल मुनि मंदिर से जुड़ी जमीन पर प्रशासक नियुक्त
Tue, 04 Nov 2025 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 04 Nov 2025 12:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर, महंत देवी देवालय से जुड़ी करीब 136 कनाल भूमि पर मंडल आयुक्त राजीव रतन ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। उन्होंने कलेक्टर कैथल द्वारा संजय कुमार के पक्ष में किए गए इंतकाल आदेश को रद्द करते हुए उसे तर्कहीन और असंगत बताया।
आयुक्त ने कहा कि धार्मिक स्थान की भूमि पर किसी एक व्यक्ति को स्वामित्व देना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इससे धार्मिक संपत्ति के खुर्द-बुर्द होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने इस स्थल की धार्मिक प्रकृति और जन-आस्था को देखते हुए एसडीएम कलायत को रिसीवर-कम-प्रशासक नियुक्त किया है।
यह आदेश 9 अक्तूबर 2025 को जारी हुआ, जिसमें आयुक्त ने कलेक्टर कैथल के 2 अगस्त 2023 के आदेश को निरस्त करते हुए दशरथ राणा और अशोक कुमार की अपील को स्वीकार किया। सोमवार को कपिल मुनि मंदिर कमेटी प्रधान दशरथ राणा की अगुवाई में अशोक राणा, कर्मवीर यादव, प्रवीण शर्मा, रामकुमार राणा, जसवंत भगत और नरेश वर्मा ने एसडीएम अजय हुड्डा से मुलाकात कर आदेश की प्रति सौंपी।
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रस्म पगड़ी संबंधी दस्तावेज मिले संदिग्ध
आयुक्त ने यह भी उल्लेख किया कि प्रत्यार्थी संजय कुमार द्वारा प्रस्तुत रस्म पगड़ी संबंधी दस्तावेजों में गंभीर संदेह पाया गया। साथ ही, उन्हें सलाह दी गई कि यदि वे अपने स्वामित्व का दावा जारी रखना चाहते हैं, तो इसके लिए सिविल न्यायालय में अपना पक्ष रख सकते हैं। मामला तब शुरू हुआ था जब संजय कुमार ने दावा किया था कि उनके पिता स्व. वेद प्रकाश, जो मंदिर भूमि के मोहतमिम (प्रबंधक) थे, की मृत्यु के बाद उन्हें गांव के मौजिज व्यक्तियों की सहमति से मुख्य पुजारी और देखरेखकर्ता नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर, अपीलार्थियों का तर्क था कि यह भूमि कपिल मुनि सेवा ट्रस्ट के अधीन है और कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया था।
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कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर, महंत देवी देवालय से जुड़ी करीब 136 कनाल भूमि पर मंडल आयुक्त राजीव रतन ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। उन्होंने कलेक्टर कैथल द्वारा संजय कुमार के पक्ष में किए गए इंतकाल आदेश को रद्द करते हुए उसे तर्कहीन और असंगत बताया।
आयुक्त ने कहा कि धार्मिक स्थान की भूमि पर किसी एक व्यक्ति को स्वामित्व देना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इससे धार्मिक संपत्ति के खुर्द-बुर्द होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने इस स्थल की धार्मिक प्रकृति और जन-आस्था को देखते हुए एसडीएम कलायत को रिसीवर-कम-प्रशासक नियुक्त किया है।
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यह आदेश 9 अक्तूबर 2025 को जारी हुआ, जिसमें आयुक्त ने कलेक्टर कैथल के 2 अगस्त 2023 के आदेश को निरस्त करते हुए दशरथ राणा और अशोक कुमार की अपील को स्वीकार किया। सोमवार को कपिल मुनि मंदिर कमेटी प्रधान दशरथ राणा की अगुवाई में अशोक राणा, कर्मवीर यादव, प्रवीण शर्मा, रामकुमार राणा, जसवंत भगत और नरेश वर्मा ने एसडीएम अजय हुड्डा से मुलाकात कर आदेश की प्रति सौंपी।
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रस्म पगड़ी संबंधी दस्तावेज मिले संदिग्ध
आयुक्त ने यह भी उल्लेख किया कि प्रत्यार्थी संजय कुमार द्वारा प्रस्तुत रस्म पगड़ी संबंधी दस्तावेजों में गंभीर संदेह पाया गया। साथ ही, उन्हें सलाह दी गई कि यदि वे अपने स्वामित्व का दावा जारी रखना चाहते हैं, तो इसके लिए सिविल न्यायालय में अपना पक्ष रख सकते हैं। मामला तब शुरू हुआ था जब संजय कुमार ने दावा किया था कि उनके पिता स्व. वेद प्रकाश, जो मंदिर भूमि के मोहतमिम (प्रबंधक) थे, की मृत्यु के बाद उन्हें गांव के मौजिज व्यक्तियों की सहमति से मुख्य पुजारी और देखरेखकर्ता नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर, अपीलार्थियों का तर्क था कि यह भूमि कपिल मुनि सेवा ट्रस्ट के अधीन है और कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया था।