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Kaithal News: कलायत के कात्यायनी शक्ति पीठ में उमड़ रहा आस्था का सैलाब
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कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में स्थापित मां का दुर्लभ श्री विग्रह। संवाद
कलायत। शारदीय नवरात्र के दौरान कलायत स्थित मां कात्यायनी शक्ति पीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में स्थित यह शक्ति पीठ इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सुबह से ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो दिनभर जारी रहता है। मान्यता है कि कलायत का नामकरण मां कात्यायनी के नाम पर हुआ था। मंदिर के मुख्य पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि मां कात्यायनी नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में छठा स्वरूप है। धार्मिक ग्रंथों में मां के इस स्वरूप का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि मां कात्यायनी ने सिंह पर सवार होकर महिषासुर का वध किया था।
मां का विग्रह है अद्वितीय
पुजारी संजय शास्त्री के अनुसार शक्ति पीठ में स्थापित मां कात्यायनी का विग्रह दुर्लभ है। इसमें मां की सवारी की मुद्रा सामान्य स्वरूप से अलग दिखाई देती है। मंदिर में मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां काली की प्राचीन पाषाण मूर्तियां भी स्थापित हैं। इन मूर्तियों का पंजीकरण भी करवाया गया है।
अष्टकोणीय मंदिर की है विशेष पहचान
मंदिर की वास्तुकला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। दक्षिणमुखी मंदिर आठ कोणों में निर्मित है और इसमें आठ सीढ़ियां चढ़कर मां के दर्शन किए जाते हैं। मान्यता है कि मंदिर के आठ कोण देवियों को समर्पित हैं।
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400 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित
कलायत स्थित इस शक्ति पीठ में पिछले करीब 400 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है। कलायत के नामकरण के लिए भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता इसे मां कात्यायनी से जोड़ती है, जबकि दूसरी के अनुसार इसका संबंध भगवान कपिल से है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में भगवान कपिल और मां कात्यायनी शक्ति पीठ दोनों स्थापित हैं।
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मां का विग्रह है अद्वितीय
पुजारी संजय शास्त्री के अनुसार शक्ति पीठ में स्थापित मां कात्यायनी का विग्रह दुर्लभ है। इसमें मां की सवारी की मुद्रा सामान्य स्वरूप से अलग दिखाई देती है। मंदिर में मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां काली की प्राचीन पाषाण मूर्तियां भी स्थापित हैं। इन मूर्तियों का पंजीकरण भी करवाया गया है।
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अष्टकोणीय मंदिर की है विशेष पहचान
मंदिर की वास्तुकला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। दक्षिणमुखी मंदिर आठ कोणों में निर्मित है और इसमें आठ सीढ़ियां चढ़कर मां के दर्शन किए जाते हैं। मान्यता है कि मंदिर के आठ कोण देवियों को समर्पित हैं।
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400 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित
कलायत स्थित इस शक्ति पीठ में पिछले करीब 400 वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है। कलायत के नामकरण के लिए भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता इसे मां कात्यायनी से जोड़ती है, जबकि दूसरी के अनुसार इसका संबंध भगवान कपिल से है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में भगवान कपिल और मां कात्यायनी शक्ति पीठ दोनों स्थापित हैं।