{"_id":"5cacec9fbdec2214235553bd","slug":"91554836639-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की हुई पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की हुई पूजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। नवरात्र के पावन अवसर पर मंगलवार को चौथे नवरात्र के उपलक्ष्य में मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शहर के छोटी देवी व बड़ी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने सुबह व शाम के समय मां की ज्योत जलाकर पूजा अर्चना की। मंदिर में पुजारी हरिपुरी ने बताया कि चौथे नवरात्र पर मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से आयु, यश और बल की वृद्धि होती है। नवरात्र के नौ दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होगी। माता की पूजा के अलावा चैत्र नवरात्र के नौवें दिन को राम जी के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। इसे राम नवमी भी बोलते हैं।
राजौंद में भी श्रद्धालुओं ने माता कूष्मांडा की पूजा अर्चना की। आचार्य बृज भूषण ने बताया कि मान्यता है कि वे अपनी हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करती हैं। वे सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य के समान उनकी दैदीप्यमान कांति है। आठ भुजाओं के कारण उन्हें अष्टभुजी देवी भी कहा जाता है। सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल, पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चंद्र तथा गदा होता है। मां कूष्मांडा भक्तों की सदैव रक्षा करने वाली हैं। उन्हें मन वांछित फल प्रदान करती है। वैसे तो मंदिरों में पूजा अर्चना हर रोज होती है, परंतु नवरात्र के दौरान मंदिरों में पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में दर्शाया गया है, जिस पर कायम रहते हुए महिला श्रद्धालु टोलियों के साथ मंदिरों में गीत गाते हुए पहुंच रही हैं।
विज्ञापन
राजौंद में भी श्रद्धालुओं ने माता कूष्मांडा की पूजा अर्चना की। आचार्य बृज भूषण ने बताया कि मान्यता है कि वे अपनी हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करती हैं। वे सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य के समान उनकी दैदीप्यमान कांति है। आठ भुजाओं के कारण उन्हें अष्टभुजी देवी भी कहा जाता है। सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल, पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चंद्र तथा गदा होता है। मां कूष्मांडा भक्तों की सदैव रक्षा करने वाली हैं। उन्हें मन वांछित फल प्रदान करती है। वैसे तो मंदिरों में पूजा अर्चना हर रोज होती है, परंतु नवरात्र के दौरान मंदिरों में पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में दर्शाया गया है, जिस पर कायम रहते हुए महिला श्रद्धालु टोलियों के साथ मंदिरों में गीत गाते हुए पहुंच रही हैं।
विज्ञापन