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गांव किच्छाना में एक दिन के बुखार व छाती में दर्द के बाद 10 साल की लड़की की पीजीआई रोहतक में मौत
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गांव किच्छाना में एक दिन के बुखार व छाती में दर्द के बाद 10 साल की लड़की की पीजीआई रोहतक में मौत
- परिजनों का दावा- डॉक्टरों ने बताए थे स्वाइन फ्लू के लक्षण, स्वास्थ्य विभाग ने नकारा, कहा- जब तक पीजीआई से रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक नहीं कह सकते स्वाइन फ्लू
- मृतका के ताऊ की तबीयत भी बिगड़ी, परिजनों ने कहा- हिसार अस्पताल में दाखिल करवाने पर करवाए गए टेस्ट में मिला है वायरस, इसी गांव में पंद्रह दिन पहले हुई थी एक किसान की स्वाइन फ्लू से मौत
गांव में दहशत का माहौल, पूरे गांव में स्वाइन फ्लू की दवा खिलाए जाने की मांग
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गांव किच्छाना में एक दिन के बुखार व छाती में दर्द के बाद 10 साल की मासूम की पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि वहां डॉक्टरों ने मृतक नेहा को स्वाइन फ्लू होने के लक्षण बताए थे। लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मिलने तक स्वाइन फ्लू होने की बात से इंकार किया है। पीजीआई की रिपोर्ट सोमवार को मिलने की बात कही गई है। वहीं मृतका के ताऊ को भी बुखार व तबीयत बिगड़ने पर हिसार के एक अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। परिजनों के अनुसार अस्पताल द्वारा करवाए गए टेस्ट मेें वायरस पाया गया है। उसे हिसार में दाखिल कर लिया गया। इसी गांव में पंद्रह दिन पहले एक किसान की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। दो मौतों के चलते गांव में लोगों में दहशत का माहौल है और लोगों की मांग है कि पूरे गांव में टेेमीफ्लू नामक दवा खिलाई जाए।
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गांव किच्छाना निवासी चरण सिंह ने बताया कि उसकी 10 साल की पुत्री नेहा को मंगलवार को रात को बुखार व छाती में दर्द होने के चलते कैथल के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया। पीजीआई रोहतक में वीरवार को उसकी मौत हो गई। वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी। उसकी मौत के बाद उसके ताऊ खुशी राम (38) को भी बुखार हो गया। उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे हिसार ले गया है। जहां उसका इलाज चल रहा है। हिसार में खुशी राम के साथ गए जोगेंद्र सिंह ने कहा कि उसे खान अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। जहां टेस्ट में वायरस पाया गया है। जिस कारण उसे दाखिल किया गया है। जोगेंद्र ने कहा कि नेहा को भी पीजीआई रोहतक में आपातकालीन वार्ड में रखा गया था। उसे वहां डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के लक्षण बताए थे। डॉक्टरों ने कहा था कि रिपोर्ट सोमवार को मिलेगी। इसके बाद कंफर्म हो पाएगा कि स्वाइन फ्लू ही था या कुछ और।
गांव में दहशत : जोगेंद्र ने कहा कि नेहा की मौत के बाद गांव में दहशत का माहौल है। शुक्रवार रात को भी गांव का एक व्यक्ति उसके पास आया और गाड़ी निकालने को कहा। उसके बेटे को छाती में दर्द था। गनीमत यह रही कि उसे ठंड के कारण परेशानी थी। स्वास्थ्य विभाग से मांग है कि गांव में सभी को टेमीफ्लू की दवा दी जाए। इस बीमारी की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाए। लड़की के हृदय संबंधी कोई परेशानी नहीं थी। उसके बीमार होने से पहले दिन भी उसकी स्कूल में हाजिरी लगी हुई है। यदि कोई ऐसी बात कह रहा है तो वह गलत कह रहा है। रही बात खुशीराम की तो उसे छुट्टी नहीं मिली है, उसे हिसार के खान अस्पताल में दाखिल किया गया है।
स्वाइन फ्लू से मौत की बात गलत : जिले मेें स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज मंगला ने कहा कि स्वाइन फ्लू से लड़की की मौत की रिपोर्ट गलत है। विभाग के पास अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं हैं। जो रिपोर्ट एसएमओ राजौंद ने दी है, उसके अनुसार लड़की को हृदय में परेशानी थी। उसके ताऊ की हिसार अस्पताल से छुट्टी हो चुकी है।
वहीं एसएमओ राजौंद का कहना है कि उनके कर्मचारियों को जो सूचना दी गई थी, उसके अनुसार उन्होंने डॉ. नीरज मंगला को सूचित किया है।
सियाराम की हुई थी पीजीआई चंडीगढ़ में मौत : इसी गांव में मृतका नेहा के घर से कुछ ही दूरी पर रहने वाले सियाराम की स्वाइन फ्लू से पंद्रह दिन पहले मौत हुई थी। पीजीआई में उसकी स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि हुई थी। इसके बाद गांव में विभाग ने कुछेक घरों में टेमीफ्लू की गोलियां बांटी थीं। बाद में गांव की सुध नहीं ली। अभी भी विभाग के अधिकारी पीजीआई से सोमवार को आने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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- परिजनों का दावा- डॉक्टरों ने बताए थे स्वाइन फ्लू के लक्षण, स्वास्थ्य विभाग ने नकारा, कहा- जब तक पीजीआई से रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक नहीं कह सकते स्वाइन फ्लू
- मृतका के ताऊ की तबीयत भी बिगड़ी, परिजनों ने कहा- हिसार अस्पताल में दाखिल करवाने पर करवाए गए टेस्ट में मिला है वायरस, इसी गांव में पंद्रह दिन पहले हुई थी एक किसान की स्वाइन फ्लू से मौत
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गांव में दहशत का माहौल, पूरे गांव में स्वाइन फ्लू की दवा खिलाए जाने की मांग
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गांव किच्छाना में एक दिन के बुखार व छाती में दर्द के बाद 10 साल की मासूम की पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि वहां डॉक्टरों ने मृतक नेहा को स्वाइन फ्लू होने के लक्षण बताए थे। लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मिलने तक स्वाइन फ्लू होने की बात से इंकार किया है। पीजीआई की रिपोर्ट सोमवार को मिलने की बात कही गई है। वहीं मृतका के ताऊ को भी बुखार व तबीयत बिगड़ने पर हिसार के एक अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। परिजनों के अनुसार अस्पताल द्वारा करवाए गए टेस्ट मेें वायरस पाया गया है। उसे हिसार में दाखिल कर लिया गया। इसी गांव में पंद्रह दिन पहले एक किसान की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। दो मौतों के चलते गांव में लोगों में दहशत का माहौल है और लोगों की मांग है कि पूरे गांव में टेेमीफ्लू नामक दवा खिलाई जाए।
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गांव किच्छाना निवासी चरण सिंह ने बताया कि उसकी 10 साल की पुत्री नेहा को मंगलवार को रात को बुखार व छाती में दर्द होने के चलते कैथल के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया। पीजीआई रोहतक में वीरवार को उसकी मौत हो गई। वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी। उसकी मौत के बाद उसके ताऊ खुशी राम (38) को भी बुखार हो गया। उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे हिसार ले गया है। जहां उसका इलाज चल रहा है। हिसार में खुशी राम के साथ गए जोगेंद्र सिंह ने कहा कि उसे खान अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। जहां टेस्ट में वायरस पाया गया है। जिस कारण उसे दाखिल किया गया है। जोगेंद्र ने कहा कि नेहा को भी पीजीआई रोहतक में आपातकालीन वार्ड में रखा गया था। उसे वहां डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के लक्षण बताए थे। डॉक्टरों ने कहा था कि रिपोर्ट सोमवार को मिलेगी। इसके बाद कंफर्म हो पाएगा कि स्वाइन फ्लू ही था या कुछ और।
गांव में दहशत : जोगेंद्र ने कहा कि नेहा की मौत के बाद गांव में दहशत का माहौल है। शुक्रवार रात को भी गांव का एक व्यक्ति उसके पास आया और गाड़ी निकालने को कहा। उसके बेटे को छाती में दर्द था। गनीमत यह रही कि उसे ठंड के कारण परेशानी थी। स्वास्थ्य विभाग से मांग है कि गांव में सभी को टेमीफ्लू की दवा दी जाए। इस बीमारी की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाए। लड़की के हृदय संबंधी कोई परेशानी नहीं थी। उसके बीमार होने से पहले दिन भी उसकी स्कूल में हाजिरी लगी हुई है। यदि कोई ऐसी बात कह रहा है तो वह गलत कह रहा है। रही बात खुशीराम की तो उसे छुट्टी नहीं मिली है, उसे हिसार के खान अस्पताल में दाखिल किया गया है।
स्वाइन फ्लू से मौत की बात गलत : जिले मेें स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज मंगला ने कहा कि स्वाइन फ्लू से लड़की की मौत की रिपोर्ट गलत है। विभाग के पास अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं हैं। जो रिपोर्ट एसएमओ राजौंद ने दी है, उसके अनुसार लड़की को हृदय में परेशानी थी। उसके ताऊ की हिसार अस्पताल से छुट्टी हो चुकी है।
वहीं एसएमओ राजौंद का कहना है कि उनके कर्मचारियों को जो सूचना दी गई थी, उसके अनुसार उन्होंने डॉ. नीरज मंगला को सूचित किया है।
सियाराम की हुई थी पीजीआई चंडीगढ़ में मौत : इसी गांव में मृतका नेहा के घर से कुछ ही दूरी पर रहने वाले सियाराम की स्वाइन फ्लू से पंद्रह दिन पहले मौत हुई थी। पीजीआई में उसकी स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि हुई थी। इसके बाद गांव में विभाग ने कुछेक घरों में टेमीफ्लू की गोलियां बांटी थीं। बाद में गांव की सुध नहीं ली। अभी भी विभाग के अधिकारी पीजीआई से सोमवार को आने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।