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अब तो आतंकवादी भी स्ट्रोएड दवा लेकर आते हैं हमला करने के लिए..ताकि लंबे समय तक मुकाबला कर सकें..
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:01 AM IST
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स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर खिलाड़ी सेहत से भी कर रहे खिलवाड़
नसीब सैनी
कैथल। खेलों में प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल के कारण के पीछे का खेल कुछ और ही है। इससे हमारे खिलाड़ियों को बचाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए कोई विशेष सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है। यही कारण है कि देश में 6 सालों में नेशनल लेवल के मुकाबलों में पदक विजेता खिलाड़ियों में से 715 खिलाड़ी डोपिंग में पकड़े जा चुके हैं। यह जानकारी हावर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका के रिसर्च पैनल के खेल वैज्ञानिक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शारीरिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद मलिक ने मंगलवार को दी।
आरकेएसडी कॉलेज में आयोजित वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को डोपिंग को लेकर डॉ. मलिक ने जानकारी दी कि कुछ खिलाड़ी जाने-अनजाने में अपने शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। 10 से 12 साल तक लड़के व लड़की के शरीर एक जैसे दिखाई देते हैं। लेकिन वे केवल और केवल हारमोंस के कारण इस उम्र के बाद अलग-अलग दिखने शुरू हो जाते हैं। लेकिन खेलों में खिलाड़ी अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड जैसी दवाएं लेते हैं तो उनके शरीर का बैलेंस भी बिगड़ने लगता है। लड़कियां दवा लेती हैं तो उनकी आवाज भारी हो जाती है, दाढ़ी मूछ आने लगती है। लड़के दवा लेते हैं तो उन्हें पीलिया सबसे ज्यादा रहता है। उनके शरीर पर चकते पड़ जाते हैं। हड्डियां टूटने लगती हैं। जल्दी चोटिल हो जाते हैं। इसका खुलासा करते हुए डा. मलिक ने कहा कि हमारे देश में अधिकतर कोच भी डोपिंग जैसी बीमारी को लेकर ज्यादा कुछ नहीं जानते।
देश में चैंपियन बनने तक तो कुछ नहीं, बाद में 8 करोड़, बीएमडब्ल्यू जैसी कारें दी जाती हैं। जिसके लालच में खिलाड़ी व अभिभावक यहां तक तैयार हो जाते हैं कि पिछले ओलंपिक में जब खिलाड़ियों से पूछा कि यदि उन्हें ऐसी दवा दी जाए, जिससे वे मेडल तो जीत जाएंगे, लेकिन 5 साल बाद मर जाएंगे तो 50 प्रतिशत ने चैंपियन बनने के लालच में हां कर दी। ये हालात हैं। एक फोटो दिखाते हुए उन्होंने कहा कि विदेश में तो इसका इतना अधिक इस्तेमाल होता है कि एक लड़की से लड़का बन गया।
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हमारे ही देश में 6 साल में 715 नेशनल पदक विजेता, पिछले साल 127 खिलाड़ी हमारे ही देश में डोपिंग में पकड़े गए। क्योंकि खिलाड़ियों को जानकारी ही नहीं है। आज अधिकतर जिम में ये दवाएं उपलब्ध हैं। लेकिन इसका नुकसान खिलाड़ी को हो रहा है। एक खिलाड़ी रजनीश माहेश्वरी ने लंबी कूद में ट्रायल में तो 17.30 मीर कूद लगाई, लेकिन ओलंपिक में वह 16.13 ही लंबा कूद सकी। क्योंकि यह दवा का असर था।
आज हालात ये हैं कि भर्ती में भी डोपिंग का कीड़ा आ गया है। पंजाब में 120 युवाओं को भर्ती में चयन होने के बाद डोपिंग के कारण बाहर निकाला गया। सबसे बड़ा आश्चर्य उस समय हुआ, जब हंदवाड़ा में हुए आतंकी हमले में आतंकियों से बरामद दवा स्टेरॉयड निकलीं। ताकि आतंकी लंबे समय तक हमला कर सकें। आज एक शोध हुआ है कि विश्व के जितने भी फूड सप्लीमेंट्स हैं, उनमें से महज 1 तिहाई ही ठीक हैं। बाकियों को तो ये भी पता नहीं कि उनमें है क्या?
स्पोर्ट्स हॉस्टल्स पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इनमें सबसे ज्यादा युवा खुद को टीके लगाते हैं। जबकि खिलाड़ियों को यही पता नहीं कि जो टीके लगाते हैं, उसका असर ही 6 दिन बाद शुरू होता है और 42 दिन तक शरीर में रहता है। फाइनल मेें जाकर टेस्ट में पकड़े जाते हैं।
कोई नहीं बताता कि खिलाड़ियों को इमली व काजू खाने चाहिए। दवाएं क्यों बताई जा रही हैं। उनका सुझाव है कि खिलाड़ी हमारे देश के अपने ज्ञान का लाभ उठाएं। शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए पूरी जानकारी हासिल करने के बाद खाद्य पदार्थ अपनाएं। क्योंकि पूरे विश्व में डोपिंग को लेकर बड़ा खेल चल रहा है।
अब तो आतंकवादी भी हमला करने के लिए करते हैं इसका इस्तेमाल
वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में खेल वैज्ञानिक खेल वैज्ञानिक डॉ. अरविंद मलिक ने दी जानकारी
फोटो संख्या-18
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नसीब सैनी
कैथल। खेलों में प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल के कारण के पीछे का खेल कुछ और ही है। इससे हमारे खिलाड़ियों को बचाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए कोई विशेष सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है। यही कारण है कि देश में 6 सालों में नेशनल लेवल के मुकाबलों में पदक विजेता खिलाड़ियों में से 715 खिलाड़ी डोपिंग में पकड़े जा चुके हैं। यह जानकारी हावर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका के रिसर्च पैनल के खेल वैज्ञानिक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शारीरिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद मलिक ने मंगलवार को दी।
आरकेएसडी कॉलेज में आयोजित वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को डोपिंग को लेकर डॉ. मलिक ने जानकारी दी कि कुछ खिलाड़ी जाने-अनजाने में अपने शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। 10 से 12 साल तक लड़के व लड़की के शरीर एक जैसे दिखाई देते हैं। लेकिन वे केवल और केवल हारमोंस के कारण इस उम्र के बाद अलग-अलग दिखने शुरू हो जाते हैं। लेकिन खेलों में खिलाड़ी अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड जैसी दवाएं लेते हैं तो उनके शरीर का बैलेंस भी बिगड़ने लगता है। लड़कियां दवा लेती हैं तो उनकी आवाज भारी हो जाती है, दाढ़ी मूछ आने लगती है। लड़के दवा लेते हैं तो उन्हें पीलिया सबसे ज्यादा रहता है। उनके शरीर पर चकते पड़ जाते हैं। हड्डियां टूटने लगती हैं। जल्दी चोटिल हो जाते हैं। इसका खुलासा करते हुए डा. मलिक ने कहा कि हमारे देश में अधिकतर कोच भी डोपिंग जैसी बीमारी को लेकर ज्यादा कुछ नहीं जानते।
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देश में चैंपियन बनने तक तो कुछ नहीं, बाद में 8 करोड़, बीएमडब्ल्यू जैसी कारें दी जाती हैं। जिसके लालच में खिलाड़ी व अभिभावक यहां तक तैयार हो जाते हैं कि पिछले ओलंपिक में जब खिलाड़ियों से पूछा कि यदि उन्हें ऐसी दवा दी जाए, जिससे वे मेडल तो जीत जाएंगे, लेकिन 5 साल बाद मर जाएंगे तो 50 प्रतिशत ने चैंपियन बनने के लालच में हां कर दी। ये हालात हैं। एक फोटो दिखाते हुए उन्होंने कहा कि विदेश में तो इसका इतना अधिक इस्तेमाल होता है कि एक लड़की से लड़का बन गया।
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हमारे ही देश में 6 साल में 715 नेशनल पदक विजेता, पिछले साल 127 खिलाड़ी हमारे ही देश में डोपिंग में पकड़े गए। क्योंकि खिलाड़ियों को जानकारी ही नहीं है। आज अधिकतर जिम में ये दवाएं उपलब्ध हैं। लेकिन इसका नुकसान खिलाड़ी को हो रहा है। एक खिलाड़ी रजनीश माहेश्वरी ने लंबी कूद में ट्रायल में तो 17.30 मीर कूद लगाई, लेकिन ओलंपिक में वह 16.13 ही लंबा कूद सकी। क्योंकि यह दवा का असर था।
आज हालात ये हैं कि भर्ती में भी डोपिंग का कीड़ा आ गया है। पंजाब में 120 युवाओं को भर्ती में चयन होने के बाद डोपिंग के कारण बाहर निकाला गया। सबसे बड़ा आश्चर्य उस समय हुआ, जब हंदवाड़ा में हुए आतंकी हमले में आतंकियों से बरामद दवा स्टेरॉयड निकलीं। ताकि आतंकी लंबे समय तक हमला कर सकें। आज एक शोध हुआ है कि विश्व के जितने भी फूड सप्लीमेंट्स हैं, उनमें से महज 1 तिहाई ही ठीक हैं। बाकियों को तो ये भी पता नहीं कि उनमें है क्या?
स्पोर्ट्स हॉस्टल्स पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इनमें सबसे ज्यादा युवा खुद को टीके लगाते हैं। जबकि खिलाड़ियों को यही पता नहीं कि जो टीके लगाते हैं, उसका असर ही 6 दिन बाद शुरू होता है और 42 दिन तक शरीर में रहता है। फाइनल मेें जाकर टेस्ट में पकड़े जाते हैं।
कोई नहीं बताता कि खिलाड़ियों को इमली व काजू खाने चाहिए। दवाएं क्यों बताई जा रही हैं। उनका सुझाव है कि खिलाड़ी हमारे देश के अपने ज्ञान का लाभ उठाएं। शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए पूरी जानकारी हासिल करने के बाद खाद्य पदार्थ अपनाएं। क्योंकि पूरे विश्व में डोपिंग को लेकर बड़ा खेल चल रहा है।
अब तो आतंकवादी भी हमला करने के लिए करते हैं इसका इस्तेमाल
वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में खेल वैज्ञानिक खेल वैज्ञानिक डॉ. अरविंद मलिक ने दी जानकारी
फोटो संख्या-18