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बिना फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र के फर्राटा भर रहीं रोडवेज बसें
Updated Thu, 10 Aug 2017 12:33 AM IST
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बिना फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र के फर्राटा भर रहीं रोडवेज बसें
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज बसें बिना फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र के सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। पिछले दो साल से रोडवेज बसों में फर्स्ट एड किट नहीं है। इसके अलावा बसों में फायर सिलेंडर भी काफी लंबे समय से एक्सपायर हैं। अधिकारियों को इसकी याद हादसा होने के बाद ही आती है। ऐसी स्थिति में यदि हादसा हो जाए तो बस पैसेंजर्स को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं विभाग है कि उदासीन बना हुआ है। ऐसे में कह सकते हैं कि रोडवेज बसों में यात्री जान हथेली पर लेकर सफर कर रहे हैं।
बस में यात्रा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए प्राथमिक उपचार की कोई सामग्री नहीं रखी गई है। रोडवेज विभाग की यह लापरवाही यात्रियों पर कभी भी भारी पड़ सकती है। कैथल डिपो में यहां से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्री रोडवेज की 142 बसों में सफर करते हैं। लेकिन 10 बसों में फर्स्ट एड किट नहीं है। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बसों में ऐसी सुविधाओं के उपलब्ध न होने के कारण इन यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
यात्रियों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा : यात्रा के दौरान प्राथमिक उपचार के मद्देनजर बसों में चालक सीट के पीछे या परिचालक के सामने प्राथमिक चिकित्सा पेटी लगाने के निर्देश हैं। इसके साथ ही एक ओर छोटी पेटी यात्रियों के सुझाव को लेकर लगाई गई है। इसके बावजूद यात्रियों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
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पिछले दो वर्षों से नहीं मिली फर्स्ट एड किट : कैथल डिपो में सभी रोडवेज बसों में लगे परिचालकों को प्रथम चिकित्सा किट 2015 उपलब्ध करवाई गई थी। कर्मचारी लखपत ने बताया कि विभाग की ओर से परिचालकों को दो वर्ष पहले चिकित्सा किट उपलब्ध करवाई गई थी। इसके बाद अब तक चिकित्सा के नाम पर उन्हें किसी प्रकार की किट नहीं दी गई। बता दें कि डिपो में करीब 142 बसें हरियाणा प्रदेश व इसके बाहर के विभिन्न रूटों पर चलती है। प्रत्येक बस में किट पर करीब 145 रुपये खर्च किए गए थे। जिसके अनुसार कुल मिलाकर प्रदेश की सभी बसों में लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही परिचालकों ने यह भी बताया कि किट में रखा ज्यादातर सामान चोरी हो जाता है। जब बसें रात को स्टैंड पर खड़ी होती है।
किट में होती हैं ये दवाइयां : इन बसों में बॉक्स के अंदर पट्टी, डेटोल, पेन किलर, बिटाडिन, वोलनी जेल, बरनॉल, एवोमिन, क्रोसिन, डिसप्रिन, एसीलोक, सेवलोन, कॉटन, मरहम-पट्टी, ग्लूकोज, पेरीनोम, जिनटेक टी-जेड आदि यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं, ताकि आकस्मिक दुर्घटना होने पर यात्रियों की जान बचाई जा सके। किट में दिए गए सामान की एक्सपायरी डेट 2 वर्ष तक होती है। हालांकि दवाएं खत्म होने की स्थिति में परिचालक विभाग के संबंधित कार्यालय से सामान ले सकता है। लेकिन कोई भी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
परिचालक को दिया जाता है इसका प्रशिक्षण : लाइसेंस बनवाते समय सभी परिचालकों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाता है कि यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थिति में लोगों को किस प्रकार से उपचार दिया जाना है। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाता है कि किसी उपचार के लिए किस प्रकार की दवाई का इस्तेमाल करना है, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी परिचालक अंजान बने हुए हैं। यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा उठाने के लिए कोई तैयार नहीं है।
फायर सिलेंडर भी हुए एक्सपायर
अधिकतर बसों में रखे गए फायर सिलेंडर भी एक्सपायर हो चुके हैं। जिस पर भी रोडवेज विभाग का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में काफी कठिनाई होगी।
करवाएंगे जांच
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स मौजूद नहीं है इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स यात्रियों के लिए काफी आवश्यक है। बसों में कितने बॉक्स मौजूद हैं या जिन बसों में यह मौजूद नहीं है। इसकी जांच की जाएगी। इसके अलावा भी बसों में यात्रियों को दी जाने वाली अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
रामकुमार, जीएम, रोडवेज कैथल
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज बसें बिना फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र के सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। पिछले दो साल से रोडवेज बसों में फर्स्ट एड किट नहीं है। इसके अलावा बसों में फायर सिलेंडर भी काफी लंबे समय से एक्सपायर हैं। अधिकारियों को इसकी याद हादसा होने के बाद ही आती है। ऐसी स्थिति में यदि हादसा हो जाए तो बस पैसेंजर्स को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं विभाग है कि उदासीन बना हुआ है। ऐसे में कह सकते हैं कि रोडवेज बसों में यात्री जान हथेली पर लेकर सफर कर रहे हैं।
बस में यात्रा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए प्राथमिक उपचार की कोई सामग्री नहीं रखी गई है। रोडवेज विभाग की यह लापरवाही यात्रियों पर कभी भी भारी पड़ सकती है। कैथल डिपो में यहां से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्री रोडवेज की 142 बसों में सफर करते हैं। लेकिन 10 बसों में फर्स्ट एड किट नहीं है। जिससे यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बसों में ऐसी सुविधाओं के उपलब्ध न होने के कारण इन यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
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यात्रियों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा : यात्रा के दौरान प्राथमिक उपचार के मद्देनजर बसों में चालक सीट के पीछे या परिचालक के सामने प्राथमिक चिकित्सा पेटी लगाने के निर्देश हैं। इसके साथ ही एक ओर छोटी पेटी यात्रियों के सुझाव को लेकर लगाई गई है। इसके बावजूद यात्रियों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
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पिछले दो वर्षों से नहीं मिली फर्स्ट एड किट : कैथल डिपो में सभी रोडवेज बसों में लगे परिचालकों को प्रथम चिकित्सा किट 2015 उपलब्ध करवाई गई थी। कर्मचारी लखपत ने बताया कि विभाग की ओर से परिचालकों को दो वर्ष पहले चिकित्सा किट उपलब्ध करवाई गई थी। इसके बाद अब तक चिकित्सा के नाम पर उन्हें किसी प्रकार की किट नहीं दी गई। बता दें कि डिपो में करीब 142 बसें हरियाणा प्रदेश व इसके बाहर के विभिन्न रूटों पर चलती है। प्रत्येक बस में किट पर करीब 145 रुपये खर्च किए गए थे। जिसके अनुसार कुल मिलाकर प्रदेश की सभी बसों में लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही परिचालकों ने यह भी बताया कि किट में रखा ज्यादातर सामान चोरी हो जाता है। जब बसें रात को स्टैंड पर खड़ी होती है।
किट में होती हैं ये दवाइयां : इन बसों में बॉक्स के अंदर पट्टी, डेटोल, पेन किलर, बिटाडिन, वोलनी जेल, बरनॉल, एवोमिन, क्रोसिन, डिसप्रिन, एसीलोक, सेवलोन, कॉटन, मरहम-पट्टी, ग्लूकोज, पेरीनोम, जिनटेक टी-जेड आदि यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं, ताकि आकस्मिक दुर्घटना होने पर यात्रियों की जान बचाई जा सके। किट में दिए गए सामान की एक्सपायरी डेट 2 वर्ष तक होती है। हालांकि दवाएं खत्म होने की स्थिति में परिचालक विभाग के संबंधित कार्यालय से सामान ले सकता है। लेकिन कोई भी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
परिचालक को दिया जाता है इसका प्रशिक्षण : लाइसेंस बनवाते समय सभी परिचालकों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाता है कि यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थिति में लोगों को किस प्रकार से उपचार दिया जाना है। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाता है कि किसी उपचार के लिए किस प्रकार की दवाई का इस्तेमाल करना है, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी परिचालक अंजान बने हुए हैं। यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा उठाने के लिए कोई तैयार नहीं है।
फायर सिलेंडर भी हुए एक्सपायर
अधिकतर बसों में रखे गए फायर सिलेंडर भी एक्सपायर हो चुके हैं। जिस पर भी रोडवेज विभाग का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में काफी कठिनाई होगी।
करवाएंगे जांच
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स मौजूद नहीं है इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स यात्रियों के लिए काफी आवश्यक है। बसों में कितने बॉक्स मौजूद हैं या जिन बसों में यह मौजूद नहीं है। इसकी जांच की जाएगी। इसके अलावा भी बसों में यात्रियों को दी जाने वाली अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
रामकुमार, जीएम, रोडवेज कैथल