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लघु नाटिका से समास को नाटकीय अंदाज में किया प्रस्तुत
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लघु नाटिका से समास को नाटकीय अंदाज में किया प्रस्तुत
फोटो नंबर-15
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल क्योड़क में हिंदी प्राध्यापक डॉ विजय चावला ने एक अनूठी पहल करते हुए कक्षा नौवीं के बच्चों के माध्यम से हिंदी व्याकरण के समास को नाटकीय अंदाज में बच्चों के माध्यम से तैयार करवाया। नौवीं कक्षा की छात्राओं ने समास व उसके भेदों का अभिनय करते हुए व उदाहरण सहित परिचय देते हुए बच्चों के समक्ष अपनी-अपनी प्रस्तुति दी। समास की लघु नाटिका को प्रस्तुत करने में कक्षा नौवीं की ललिता, मोंटी, विकास , सिमरन, प्रिया, सिया ने अहम भूमिका अदा की। चावला ने बताया कि लघु नाटिका करवाने का उद्देश्य बच्चों को हिंदी व्याकरण को रुचिकर बनाते हुए पढ़ाना रहा । परंपरागत शिक्षण पद्धति को अपनाने की बजाय यदि अध्यापक जटिल विषयों को खेल-खेल में या रंगमंच के माध्यम से अर्थात नाटक के माध्यम से कक्षा-कक्ष में करवाता है, तो बच्चों के लिए यह ना केवल रुचिकर रहेगा बल्कि उनके लिए यह ज्ञान चिर स्थाई हो जाएगा। जिसे वे काफी लंबे समय तक याद रख पाएंगे।
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फोटो नंबर-15
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल क्योड़क में हिंदी प्राध्यापक डॉ विजय चावला ने एक अनूठी पहल करते हुए कक्षा नौवीं के बच्चों के माध्यम से हिंदी व्याकरण के समास को नाटकीय अंदाज में बच्चों के माध्यम से तैयार करवाया। नौवीं कक्षा की छात्राओं ने समास व उसके भेदों का अभिनय करते हुए व उदाहरण सहित परिचय देते हुए बच्चों के समक्ष अपनी-अपनी प्रस्तुति दी। समास की लघु नाटिका को प्रस्तुत करने में कक्षा नौवीं की ललिता, मोंटी, विकास , सिमरन, प्रिया, सिया ने अहम भूमिका अदा की। चावला ने बताया कि लघु नाटिका करवाने का उद्देश्य बच्चों को हिंदी व्याकरण को रुचिकर बनाते हुए पढ़ाना रहा । परंपरागत शिक्षण पद्धति को अपनाने की बजाय यदि अध्यापक जटिल विषयों को खेल-खेल में या रंगमंच के माध्यम से अर्थात नाटक के माध्यम से कक्षा-कक्ष में करवाता है, तो बच्चों के लिए यह ना केवल रुचिकर रहेगा बल्कि उनके लिए यह ज्ञान चिर स्थाई हो जाएगा। जिसे वे काफी लंबे समय तक याद रख पाएंगे।