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सेमिनार में बताए मधुमक् खी पालन के फायदे
Updated Sun, 20 Aug 2017 12:16 AM IST
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सेमिनार में बताए मधुमक्खी पालन के फायदे
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कृषि विज्ञान केंद्र में शनिवार को विश्व मधुमक्खी पालन दिवस के उपलक्ष्य में एक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें जिलेभर के मधुमक्खी पालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. रमेश वर्मा ने किसानों को मधुमक्खी पालन के फायदे बताए।
उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा कृषि आधारित व्यवसाय है जो मधुमक्खी पालकों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ जिस खेत में मधुमक्खी के डिब्बे रखे जाते हैं उन किसानों की पैदावार भी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। वैज्ञानिकों का मत है कि अगर संसार से मधुमक्खियों को निकाल दिया जाए तो संसार से जीवन भी खत्म हो सकता है, क्योंकि मधुमक्खियां विभिन्न प्रकार के फूलों से शहद इकट्ठा करने के प्रक्रिया के दौरान परागण में सहायक सिद्ध होती है। जो विभिन्न प्रकार की फसलों के बीज तथा फल उत्पादन में सहायक सिद्ध होती है। वर्मा ने बताया कि मधुमक्खी पालन भूमि हीन किसान भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि इस व्यवसाय के लिए आपको खेत की जमीन की जरूरत नहीं होती है। वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद ही नहीं बल्कि अन्य उत्पाद जैसे रॉयल जैली, मोम इत्यादि भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मौके पर जिले के प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों अमरजीत दुमाड़ा, महेंद्र रसीना, फकीर सिंह कैलरम, राजेश खेड़ी, खुशीराम गोहरा, राहुल गोहरा, जगदीप कैलरम को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कृषि विज्ञान केंद्र में शनिवार को विश्व मधुमक्खी पालन दिवस के उपलक्ष्य में एक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें जिलेभर के मधुमक्खी पालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. रमेश वर्मा ने किसानों को मधुमक्खी पालन के फायदे बताए।
उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा कृषि आधारित व्यवसाय है जो मधुमक्खी पालकों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ जिस खेत में मधुमक्खी के डिब्बे रखे जाते हैं उन किसानों की पैदावार भी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। वैज्ञानिकों का मत है कि अगर संसार से मधुमक्खियों को निकाल दिया जाए तो संसार से जीवन भी खत्म हो सकता है, क्योंकि मधुमक्खियां विभिन्न प्रकार के फूलों से शहद इकट्ठा करने के प्रक्रिया के दौरान परागण में सहायक सिद्ध होती है। जो विभिन्न प्रकार की फसलों के बीज तथा फल उत्पादन में सहायक सिद्ध होती है। वर्मा ने बताया कि मधुमक्खी पालन भूमि हीन किसान भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि इस व्यवसाय के लिए आपको खेत की जमीन की जरूरत नहीं होती है। वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद ही नहीं बल्कि अन्य उत्पाद जैसे रॉयल जैली, मोम इत्यादि भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मौके पर जिले के प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों अमरजीत दुमाड़ा, महेंद्र रसीना, फकीर सिंह कैलरम, राजेश खेड़ी, खुशीराम गोहरा, राहुल गोहरा, जगदीप कैलरम को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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