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ईेज की फीस 5 रुपये, पार्किंग फीस 10 रुपये, जिला अस्पताल में आने वाले लोगों को परेशानी

Tue, 26 Feb 2019 12:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 26 Feb 2019 12:22 AM IST
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ईेज की फीस 5 रुपये, पार्किंग फीस 10 रुपये, जिला अस्पताल में आने वाले लोगों को परेशानी
इलाज की फीस पांच रुपये, पार्किंग फीस 10 रुपये, बहुत नाइंसाफी है साहब
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- अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए मुसीबत बनी जिला अस्पताल की पार्किंग
- लोग बोले- बस अड्डे पर 16 घंटे के लिए 5 रुपये का है रेट तो जिला अस्पताल में 10 रुपये क्यों
- अस्पताल के बाहर भी रहती है ठेकेदार के कर्मचारियों की निगरानी
फोटो संख्या-21, 23, 24 व 26
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में जहां इलाज महज 5 रुपये में होता है और दवाएं निशुल्क मिलती हैं। वहां लोगों को बाइक खड़ी करने के लिए 10 रुपये देने पड़ रहे हैं। जो उन्हें काफी ज्यादा महसूस होते हैं। वहीं जिला अस्पताल से मुश्किल से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित नए बस अड्डे पर यह रेट 12 घंटों के लिए 5 रुपये है। ऐसे में जिला अस्पताल में डबल रेट को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन लोग मजबूरन यह भुगतान कर रहे हैं।
प्रवेश से पहले 10 रुपये का टोकन टैक्स : जिला अस्पताल में सामान्य तबके के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिन्हें 5 रुपये की स्लिप कटवाने पर निशुल्क इलाज मिल जाता है और दवाएं भी निशुल्क मिल जाती हैं। यदि कोई टेस्ट आदि न करवाना पड़े तो। लेकिन अस्पताल में अपनी बाइक खड़ी करने के लिए उन्हें इससे डबल 10 रुपये की कीमत देनी पड़ती है।
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जब बस अड्डे पर 5 हैं तो जिला अस्पताल में 10 रुपये क्यों : कैथल निवासी पवन कुमार ने कहा कि बस अड्डे पर बाइक की 12 घंटे के लिए स्लिप 5 रुपये की है। जबकि जिला अस्पताल में यह 10 रुपये है। वहां 5 से 6 घंटे कम से कम बाइक खड़ी रहती है। जबकि अस्पताल में मुश्किल से आधे घंटे या एक घंटे के लिए बाइक खड़ी होती है। उसके लिए 10 रुपये देना पड़ता है। जिसे कम करना चाहिए।
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10 मिनट के लिए अस्पताल में अपने किसी परिजन से मिलने के लिए आए गांव ब्राह्मणीवाला निवासी सुरेश कुमार ने कहा कि वह अपने परिजन से मिलने आया था। तब भी दस रुपये की पर्ची काटी गई है। यह कम होनी चाहिए। पर्ची कटवाने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन यह 5 रुपये हो तो परेशानी नहीं होती।
ठेकेदार के कर्मचारी जिला अस्पताल के बाहर भी खड़ा नहीं होने देते बाइक : यदि कोई व्यक्ति अपने रिस्क पर बाइक खड़ा करना चाहता है तो उसे जिला अस्पताल के बाहर भी बाइक खड़ी करने नहीं दी जाती। यहां विशेष रूप से दो कर्मचारी नियुक्त रहते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति यहां बाइक खड़ी करने का प्रयास करता है, उसी समय उसे रोक दिया जाता है। उसे अस्पताल से कहीं दूर ले जाकर बाइक खड़ी करनी पड़ती है और पैदल अस्पताल में पहुंचना पड़ता है।
कई कर्मचारी व अधिकारी भी परेशान : जिला अस्पताल के अधिकारी व कर्मचारी भी कई बार गाड़ियों की रोक-टोक से परेशान हैं। एक डॉक्टर ने बताया कि इमरजेंसी के लिए अलग से रास्ता होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में आने वाले वाहन चालक को पार्किंग के लिए लगाए गए बेरिकेट पर रुकना ही न पड़े और गंभीर हालत के मरीज को सीधा इमरजेंसी में ले जाया जा सके। इस समय मरीज के तीमारदारों को बेरिकेट पर रुक कर बताना पड़ता है कि मरीज सीरियस है। तब जाकर वह वाहन आगे बढ़ता है।
रेडक्रॉस द्वारा यह ठेका जुलाई 2019 तक दिया गया है। ठेकेदार को 85 हजार रुपये से अधिक प्रति माह में यह ठेका छूटा है। बाइक के लिए 10 रुपये व कार के लिए 20 रुपये की राशि निर्धारित है। पूरी प्रक्रिया का पालन करके ठेका छोड़ा गया है।

बलवान सिंह खिदरपुरा, सचिव, रेडक्रॉस, कैथल।
पार्किंग लोगों की सुविधा के लिए ही होती है। अभी जो रेट है, वे टेंडर के अनुसार ही होंगे। इसलिए एकदम से इन्हें रिव्यू नहीं किया जा सकता। लेकिन समय अनुसार इन्हें जरूर रिव्यू किया जाएगा।
डॉ. प्रियंका सोनी, डीसी, कैथल।
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