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आओ कदी ननकाणे थोनूं अखां ते बिठाइये
Updated Mon, 20 Nov 2017 11:58 PM IST
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आओ कदी ननकाणे थोनूं अखां ते बिठाइये
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला चीका। अपने दामन में मुहब्बत और दुआओं की बेशकीमती दौलत सहेजकर फाइजा तनवीर सोमवार को अपने मुल्क पाकिस्तान लौट गई। जबड़े के कैंसर का इलाज करवाने फाइजा पिछले महीने लाहौर से हिंदुस्तान आई थी। जाते समय फाइजा ने कहा कि एक महीने से भी कम समय यहां रहना हुआ पर एक बार भी बेगानगी का अहसास नहीं हुआ। इतनी मोहब्बत मिली कि मेरी झोली छोटी पड़ गई। पाकिस्तान जाऊंगी तो लोगों को बताऊंगी कि हिंदुस्तान का जो अक्स वहां के सियासतदानों ने लोगों के जेहन में ठूंस रखा है, वह गलत है। फाइजा ने अपनी फेसबुक वाल पर भी वीरवार को लिखा कि पाकिस्तान वापस आ रही हूं..बहुत सारी अच्छी यादों के साथ...चीका से कुछ लाहौरिये (पूर्व में पाकिस्तान से आए परिवारों के सदस्य) फाइजा को विदाई देने वाघा बार्डर गए थे। फाइजा उन्हें पाकिस्तान आने का न्यौता दे गई। कहने लगी, कभी आईये आपको ननकाणा साहब(पाकिस्तान में) के दर्शन भी करवाएंगे और लाहौर भी दिखाएंगे। आपने सुना ही होगा कि जिन्ने लाहौर नी वेखया ओह ज मया ई नहीं...।
मन किया कि अम्मी को यहीं बुला लूं:-फाइजा का इलाज वडोदरा गुजरात के रिदम हर्ट इंस्टीच्यूट में हुआ है। फाइजा ने कहा कि वह पहले पहल तो लोगों को अपनी पहचान बताने से झिझकती रही पर जब लोगों को पता चलता कि मैं पाकिस्तान से हूं तो वे मुझे जैसे हाथों पर उठा लेते। फाइजा के ही शब्दों में-वडोदरा में मुझे इतना प्यार मिला कि वहां से आते हुए मैं रो रही थी कि मैं इन लोगों से दूर तो जा रही हूं..पता नहीं अब कब मिलना होगा। गुजरात के लोगों ने मेरे जेहन पर बहुत अच्छी छाप छोड़ी।
फाइजा ने बताया कि प्रमुख सर्जन डा. राहुल ठाकुर ने 7 नवंबर को उसका आप्रेशन किया था। रब ने लोगों की दुआएं सुन ली और आप्रेशन पूरी तरह सफल रहा। प्लास्टिक सर्जरी के लिए अब फाइजा को छह महीने बाद फिर हिंदुस्तान आना होगा। लाहौर की 25 वर्षीय छात्रा फाइजा तनवीर जबड़े के ट्यूमर से पीड़ित थी तथा पाकिस्तान में इसका इलाज ना होने के कारण मेडिकल वीजा पर भारत आई थी।
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सेहत और मुहब्बत का पैगाम लेकर अपने मुल्क लौटी फाइजा तनवीर
पाकिस्ताना छात्रा फाइजा को मेडिकल वीजा के लिए चलाई थी मुहिम
फोटो नंबर-26
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अमर उजाला ब्यूरो
गुहला चीका। अपने दामन में मुहब्बत और दुआओं की बेशकीमती दौलत सहेजकर फाइजा तनवीर सोमवार को अपने मुल्क पाकिस्तान लौट गई। जबड़े के कैंसर का इलाज करवाने फाइजा पिछले महीने लाहौर से हिंदुस्तान आई थी। जाते समय फाइजा ने कहा कि एक महीने से भी कम समय यहां रहना हुआ पर एक बार भी बेगानगी का अहसास नहीं हुआ। इतनी मोहब्बत मिली कि मेरी झोली छोटी पड़ गई। पाकिस्तान जाऊंगी तो लोगों को बताऊंगी कि हिंदुस्तान का जो अक्स वहां के सियासतदानों ने लोगों के जेहन में ठूंस रखा है, वह गलत है। फाइजा ने अपनी फेसबुक वाल पर भी वीरवार को लिखा कि पाकिस्तान वापस आ रही हूं..बहुत सारी अच्छी यादों के साथ...चीका से कुछ लाहौरिये (पूर्व में पाकिस्तान से आए परिवारों के सदस्य) फाइजा को विदाई देने वाघा बार्डर गए थे। फाइजा उन्हें पाकिस्तान आने का न्यौता दे गई। कहने लगी, कभी आईये आपको ननकाणा साहब(पाकिस्तान में) के दर्शन भी करवाएंगे और लाहौर भी दिखाएंगे। आपने सुना ही होगा कि जिन्ने लाहौर नी वेखया ओह ज मया ई नहीं...।
मन किया कि अम्मी को यहीं बुला लूं:-फाइजा का इलाज वडोदरा गुजरात के रिदम हर्ट इंस्टीच्यूट में हुआ है। फाइजा ने कहा कि वह पहले पहल तो लोगों को अपनी पहचान बताने से झिझकती रही पर जब लोगों को पता चलता कि मैं पाकिस्तान से हूं तो वे मुझे जैसे हाथों पर उठा लेते। फाइजा के ही शब्दों में-वडोदरा में मुझे इतना प्यार मिला कि वहां से आते हुए मैं रो रही थी कि मैं इन लोगों से दूर तो जा रही हूं..पता नहीं अब कब मिलना होगा। गुजरात के लोगों ने मेरे जेहन पर बहुत अच्छी छाप छोड़ी।
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फाइजा ने बताया कि प्रमुख सर्जन डा. राहुल ठाकुर ने 7 नवंबर को उसका आप्रेशन किया था। रब ने लोगों की दुआएं सुन ली और आप्रेशन पूरी तरह सफल रहा। प्लास्टिक सर्जरी के लिए अब फाइजा को छह महीने बाद फिर हिंदुस्तान आना होगा। लाहौर की 25 वर्षीय छात्रा फाइजा तनवीर जबड़े के ट्यूमर से पीड़ित थी तथा पाकिस्तान में इसका इलाज ना होने के कारण मेडिकल वीजा पर भारत आई थी।
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सेहत और मुहब्बत का पैगाम लेकर अपने मुल्क लौटी फाइजा तनवीर
पाकिस्ताना छात्रा फाइजा को मेडिकल वीजा के लिए चलाई थी मुहिम
फोटो नंबर-26