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40 साल के इतिहास में पहली बार एक अक्तूबर से नहीं हुई धान की खरीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 12:18 AM IST
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40 saal ke itihaas mein pahalee baar ek aktoobar se nahin huee dhaan kee khareed
40 saal ke itihaas mein pahalee baar ek aktoobar se nahin huee dhaan kee khareed - फोटो : Kaithal
वर्ष 2021-22 वित्त वर्ष पिछले 40 साल से भी ज्यादा लंबे इतिहास में पहला साल होगा, जब 1 अक्तूबर को धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई। किसान बड़ी बेसब्री से धान की सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे थे। लेकिन एक अक्तूबर को जैसे ही उन्हें पता चला कि आज खरीद शुरू नहीं होगी तो उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा। विशेष रुप से उन किसानों को परेशानी हुई, जो मार्केटिंग बोर्ड की ओर से भेजे गए एसएमएस के बाद धान लेकर मंडी में पहुंचे थे। उनके लिए इधर कूंआं उधर खाई जैसी बात हो गई है। यदि वे धान को लेकर यहां बैठते हैं तो 11 दिन तक काम प्रभावित होगा, वापस लेकर जाते हैं तो उसके लिए उनका खर्च बढ़ेगा। दूसरा किसी भी खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी के पास इमेल आदि से आधिकारिक आदेश नहीं पहुंचे हैं। केवल दिल्ली से जारी एक पत्र ही सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों को उपलब्ध करवाया गया है। इसी वायरल हुए पत्र के आधार पर सरकारी खरीद रुक गई।
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जिला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला, 40 साल से भी अधिक समय से आढ़त कर रहे पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया ने कहा कि उन्हें आज तक यह बात देखने को नहीं मिली कि कभी 1 अक्तूबर के बाद भी धान की खरीद शुरू होगी। सितंबर में कभी 21 से तो कभी 25 सितंबर से किसानों को राहत देने के लिए पहले खरीद शुरू कर दी गई। लेकिन आज तक कभी 1 अक्तूबर से ज्यादा धान की सरकारी खरीद लेट नहीं हुई। इस बार भी 1 अक्तूबर से ही शुरू होने की उम्मीद थी। लेकिन 30 सितंबर को एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद रात भर उनकी नींद उड़ी रही कि सुबह धान लेकर पहुंचने वाले किसानों को क्या जवाब देंगे? यहां पहुंचे सीवन से मार्केटिंग बोर्ड की ओर से एसएमएस के बाद धान लाए अमरजीत ने कहा कि अब उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे रहा है कि वे इस धान को लेकर वापस जाएं या फिर यहीं पर रखकर 11 अक्तूबर तक इंतजार करें। यह कैसी व्यवस्था है? ऐसे अनेकों किसान हैं, जो पीआर धान लेकर पहुंचे थे। उनके सवालों का किसी अधिकारी के पास जवाब नहीं था।
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आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग ने तो सीधा हमला बोलते हुए कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि एमएसपी नहीं मिला तो वे इस्तीफा दे देंगे। अब एमएसपी नहीं मिल रहा है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
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जिले में 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर में इस बार धान की रोपाई हुई है। जिसमें से करीब 60 प्रतिशत एरिया में पीआर ग्रुप का धान है। जिस कारण कैथल जिले में धान की खरीद देरी से शुरू होने पर किसानों को ज्यादा परेशानी होगी। किसानों के सामने समस्या यह है कि जो फसल पूरी तरह से पक चुकी है, उसे काटकर कहां रखेंगे।
उधर, चावल विशेषज्ञों ने कहा कि जो धान कंबाईन से कटी है और इस समय मंडियों में पहुंच गई है। यदि पांच-छह दिन तक वह बिना सुखाए ऐसी ही पड़ी रही तो यह मनुष्य के खाने लायक नहीं रहेगी।

उधर, कोई भी अधिकारी किसानों के सवालों का जवाब देने में सक्षम नजर नहीं आया। अधिकारियों के पास भी या तो मौखिक या फिर सोशल मीडिया पर वॉयरल दिल्ली से जारी हुआ पत्र ही खरीद शुरू न करने का आधार बना।
मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश ने कहा कि बोर्ड की ओर से खरीद की सारी तैयारियां हैं। 11 से खरीद शुरू होने के संबंध में उनके पास आदेश नहीं हैं।
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