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फास्ट फूड खाने से 40 फीसदी लोग नेत्र रोग के हो रहे है शिकार : डॉ. कमल
Fri, 07 Nov 2025 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 07 Nov 2025 12:00 AM IST
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गुहला चीका। मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर घंटों नजरें गड़ाए रखना अब बच्चों की आंखों के लिए खतरा बन गया है। शहर में हर दिन 10 से 20 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जिन्हें लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण आंखों में सूखापन, लालिमा, जलन और सिरदर्द जैसी शिकायतें हो रही हैं। ये जानकारी डाॅ. कमल ने दी। उन्होंने बताया कि ये समस्या उन लोगों में बढ़ रही है, जो कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करते हैं या बच्चे जो मोबाइल पर गेम खेलने और आनलाइन पढ़ाई में अधिक समय बिताते हैं। बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस समस्या में बच्चे पास की चीजें साफ देख पाते हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली नजर आने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में हर रोज 10 से 20 बच्चे मायोपिया की शिकायत लेकर आ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश को चश्मे की जरूरत पड़ती है। माता पिता ने बताया कि बच्चे दिनभर फोन पर गेम खेलते रहते हैं, यहां तक कि बिना मोबाइल देखे खाना भी नहीं खाते। डाक्टरों ने चेतावनी दी है कि लगातार मोबाइल, टैब या कंप्यूटर देखने से ड्राई आई डिजीज यानी आंखों में सूखापन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों का रूझान हरी सब्जी की तरफ कम हो रहा है। स्वाद के लिए बच्चे पिज्जा, बर्गर, नूडल्स जैसे फास्ट फूड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसको खाने से बच्चों को संतुलित मात्रा में विटामिन व मिनरल नहीं मिल पा रहा है। बच्चे में खून की कमी व दृष्टि दोष की शिकायत बढ़ रही है। बच्चों को हर रोज कुछ समय बाहर खुले में बिताना चाहिए। डाक्टरों ने बताया कि प्राकृतिक रोशनी में बिताया गया समय आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम की लिमिट तय कर देनी चाहिए। अगर बच्चेैै इसी तरह बिना रुके फोन, कंप्यूटर का इस्तेमाल करते रहे तो कम उम्र में ही ज्यादा नंबर का चश्मा लग जाएगा।
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उन्होंने बताया कि ओपीडी में हर रोज 10 से 20 बच्चे मायोपिया की शिकायत लेकर आ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश को चश्मे की जरूरत पड़ती है। माता पिता ने बताया कि बच्चे दिनभर फोन पर गेम खेलते रहते हैं, यहां तक कि बिना मोबाइल देखे खाना भी नहीं खाते। डाक्टरों ने चेतावनी दी है कि लगातार मोबाइल, टैब या कंप्यूटर देखने से ड्राई आई डिजीज यानी आंखों में सूखापन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों का रूझान हरी सब्जी की तरफ कम हो रहा है। स्वाद के लिए बच्चे पिज्जा, बर्गर, नूडल्स जैसे फास्ट फूड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसको खाने से बच्चों को संतुलित मात्रा में विटामिन व मिनरल नहीं मिल पा रहा है। बच्चे में खून की कमी व दृष्टि दोष की शिकायत बढ़ रही है। बच्चों को हर रोज कुछ समय बाहर खुले में बिताना चाहिए। डाक्टरों ने बताया कि प्राकृतिक रोशनी में बिताया गया समय आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम की लिमिट तय कर देनी चाहिए। अगर बच्चेैै इसी तरह बिना रुके फोन, कंप्यूटर का इस्तेमाल करते रहे तो कम उम्र में ही ज्यादा नंबर का चश्मा लग जाएगा।
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