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39 कंप्यूटर आपरेटरों की नौकरी खतरे में
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Fri, 08 Aug 2014 12:20 AM IST
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कैथल। नौ दिन तक नियमित करने की मांग पर हड़ताल पर रहने के बाद वीरवार को काम पर लौटे 39 कंप्यूटर ऑपरेटरों की नौकरी अब खतरे में हैै।
इन्हें प्रशासन ने बुधवार तक काम पर लौटने की चेतावनी दी थी, लेकिन वे काम पर नहीं पहुंचे। इसके बाद प्रशासन ने लोगों की परेशानी को देखते हुए कहा कि था आउटसोर्सिंग के जरिये नए ऑपरेटर्स भर्ती किए जाएंगे।
गौरतलब है कि बुधवार को चंडीगढ़ में आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद यह सभी वीरवार को ड्यूटी पर लौट तो गए जिला प्रशासन ने 39 कंप्यूटर ऑपरेटर्स को ज्वाइन नहीं करवाया। फिलहाल आउटसोर्सिंग के माध्यम से नए ऑपरेटर्स की भर्ती करने पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि अभी इस बारे में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन डीसी का कहना है कि ऑपरेटर्स ने अनुशासन भंग किया है, इसीलिए इनके व्यवहार की समीक्षा के बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि किसे ज्वाइन करवाना है किसे नहीं।
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उधर, प्रशासन एवं ऑपरेटर्स के बीच मूछ की इस लड़ाई में जनता पिस रही है। वीरवार को भी लोगों को तहसील कार्यालयों, ई-दिशा केंद्र में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वैकल्पिक व्यवस्था है पर तेजी नहीं
वीरवार को जिला प्रशासन द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था के बीच कुछ क्लर्कों ने ई-दिशा केंद्र एवं तहसील कार्यालय में काम किया। लेकिन काम उतनी गति से नहीं हो पाया। जिस कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सचिवालय में कैथल के धूप सिंह और पाई के ललित ने बताया कि वह जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई दिन चक्कर काट रहे हैं। लेकिन हर समय ई-दिशा केन्द्र का दफ्तर खाली मिलता है।
स्कूल में जाति प्रमाण पत्र जमा करवाना है। लेकिन यहां के कंप्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर होने कारण अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बना। धूप सिंह ने बताया कि उसने लाइसेंस बनाने की फाइल लगभग दो सप्ताह पहले जमा करवाई थी, जो अभी तक नहीं मिली। क्लर्क बार-बार एक ही जवाब देेते हैं कि कंप्यूटर ऑपरेटर ही आपका काम करेंगे। पाई के रजत ने बताया कि वह रिहायशी प्रमाण पत्र के आए हैं, लेकिन यहां पर कोई सही जानकारी नहीं दे रहा है।
न्यू प्यौदा रोड कॉलोनी से दीपक ने बताया कि वह जाति प्रमाण पत्र के कई दिनों चक्कर काट रहा है। क्लर्क ने बताया कि पहले पर्ची कटवानी होगी। आज जब पर्ची कटवाने के लिए आए तो वह अपनी सीट पर नहीं मिले, कब आएंगे, कुछ पता नहीं है। ई-दिशा केन्द्र दो क्लर्क काम देख रहे हैं, जो नाकाफी है।
नियमित की मांग कर क्या गुनाह किया : संघ
कंप्यूटर ऑपरेटर्स संघ जिला कैथल के प्रधान गोपाल कृष्ण व उप प्रधान रमेश, सूरज, रामनिवास, शशिभूष्ण, रवि शर्मा, श्वेता पुजानी, रामपाल, राजेश कुमार, बलबीर सिंह, बलराज, प्रदीप कुमार, उमेश कुमार, प्रवीण कुमार, रविंद्र कुमार, अमित कुमार, रोहित और राजेंद्र कुमार सहित अन्य ने बताया कि नियमित किए जाने की मांग को लेकर चंडीगढ़ में आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद वे वीरवार को काम पर लौट आए।
सुबह जब वे अपनी सीटों पर जाकर काम पर लगे तो अधिकारियों ने उन्हें काम करवाने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें नियमित किए जाने का आश्वासन दिया गया है तो अब जिला स्तर पर ड्यूटी क्यों नहीं करने दी जा रही? मजबूरन उन्हें वीरवार को फिर से धरना देना पड़ा है। वे 10-12 साल से काम कर रहे है। उन्हें तीन साल की पॉलिसी के तहत नियमित किया जाना चाहिए।
कारण बताओ नोटिस जारी
जिला प्रशासन ने 39 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा है। इसमें कहा गया है कि बिना किसी छुट्टी के गैरहाजिर रहने के कारण क्यों न आपकी नौकरी को रद्द कर दिया जाए?
आउटसॉर्सिंग के तहत टेंडर आमंत्रित
जो ऑपरेटर्स यहां काम कर रहे थे, वे सभी डेली वेजिज पर हैं। 10 दिनों से काम पर नहीं आए। जिस कारण इन्हें अलाउड नहीं किया जाएगा। आउटसॉर्सिंग के तहत टेंडर आमंत्रित कर लिए गए हैं। शुक्रवार को डीआरओ की मौजूदगी में टेंडर खोला जाएगा। जितनी संख्या में पहले कर्मचारी रखे गए थे, उससे भी कम संख्या में कर्मचारियों को रखकर काम चलाया जाएगा।
-नरहरि सिंह बांगड़, एसडीएम।
डीसी एन के सोलंकी- सीधी बातचीत
सवाल- कंप्यूटर ऑपरेटर्स की हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन द्वारा क्या फैसला लिया गया है?
उत्तर- हमने अपने लोगों को ट्रेंड कर दिया है। प्रयास किया जा रहा है कि लोगों के काम हो जाएं।
सवाल-लोगों को परशानी आ रही है। तैनात लोगों से काम नहीं चल रहा है?
उत्तर- प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
सवाल--ऑपरेटर्स का पंचकूला में धरना समाप्त हो गया है। वीरवार को ऑपरेटर्स आए, लेकिन ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने दी गई? क्या इन 39 ऑपरेटर्स को हटाया जा रहा है?
उत्तर-जिला प्रशासन द्वारा ऑपरेटर्स को ज्वाइनिंग के लिए समय दिया गया था। तय समय पर ऑपरेटर्स ने ज्वाइन नहीं किया। इनके व्यवहार की समीक्षा करके ही फैसला लिया जाएगा कि किसे काम पर लेना है, किसे नहीं। ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ की नीति के तहत फैसला लिया जाएगा। लोगों को परेशान करने का हक किसी को नहीं है।
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इन्हें प्रशासन ने बुधवार तक काम पर लौटने की चेतावनी दी थी, लेकिन वे काम पर नहीं पहुंचे। इसके बाद प्रशासन ने लोगों की परेशानी को देखते हुए कहा कि था आउटसोर्सिंग के जरिये नए ऑपरेटर्स भर्ती किए जाएंगे।
गौरतलब है कि बुधवार को चंडीगढ़ में आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद यह सभी वीरवार को ड्यूटी पर लौट तो गए जिला प्रशासन ने 39 कंप्यूटर ऑपरेटर्स को ज्वाइन नहीं करवाया। फिलहाल आउटसोर्सिंग के माध्यम से नए ऑपरेटर्स की भर्ती करने पर विचार किया जा रहा है।
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हालांकि अभी इस बारे में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन डीसी का कहना है कि ऑपरेटर्स ने अनुशासन भंग किया है, इसीलिए इनके व्यवहार की समीक्षा के बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि किसे ज्वाइन करवाना है किसे नहीं।
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उधर, प्रशासन एवं ऑपरेटर्स के बीच मूछ की इस लड़ाई में जनता पिस रही है। वीरवार को भी लोगों को तहसील कार्यालयों, ई-दिशा केंद्र में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वैकल्पिक व्यवस्था है पर तेजी नहीं
वीरवार को जिला प्रशासन द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था के बीच कुछ क्लर्कों ने ई-दिशा केंद्र एवं तहसील कार्यालय में काम किया। लेकिन काम उतनी गति से नहीं हो पाया। जिस कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सचिवालय में कैथल के धूप सिंह और पाई के ललित ने बताया कि वह जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई दिन चक्कर काट रहे हैं। लेकिन हर समय ई-दिशा केन्द्र का दफ्तर खाली मिलता है।
स्कूल में जाति प्रमाण पत्र जमा करवाना है। लेकिन यहां के कंप्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर होने कारण अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बना। धूप सिंह ने बताया कि उसने लाइसेंस बनाने की फाइल लगभग दो सप्ताह पहले जमा करवाई थी, जो अभी तक नहीं मिली। क्लर्क बार-बार एक ही जवाब देेते हैं कि कंप्यूटर ऑपरेटर ही आपका काम करेंगे। पाई के रजत ने बताया कि वह रिहायशी प्रमाण पत्र के आए हैं, लेकिन यहां पर कोई सही जानकारी नहीं दे रहा है।
न्यू प्यौदा रोड कॉलोनी से दीपक ने बताया कि वह जाति प्रमाण पत्र के कई दिनों चक्कर काट रहा है। क्लर्क ने बताया कि पहले पर्ची कटवानी होगी। आज जब पर्ची कटवाने के लिए आए तो वह अपनी सीट पर नहीं मिले, कब आएंगे, कुछ पता नहीं है। ई-दिशा केन्द्र दो क्लर्क काम देख रहे हैं, जो नाकाफी है।
नियमित की मांग कर क्या गुनाह किया : संघ
कंप्यूटर ऑपरेटर्स संघ जिला कैथल के प्रधान गोपाल कृष्ण व उप प्रधान रमेश, सूरज, रामनिवास, शशिभूष्ण, रवि शर्मा, श्वेता पुजानी, रामपाल, राजेश कुमार, बलबीर सिंह, बलराज, प्रदीप कुमार, उमेश कुमार, प्रवीण कुमार, रविंद्र कुमार, अमित कुमार, रोहित और राजेंद्र कुमार सहित अन्य ने बताया कि नियमित किए जाने की मांग को लेकर चंडीगढ़ में आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद वे वीरवार को काम पर लौट आए।
सुबह जब वे अपनी सीटों पर जाकर काम पर लगे तो अधिकारियों ने उन्हें काम करवाने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें नियमित किए जाने का आश्वासन दिया गया है तो अब जिला स्तर पर ड्यूटी क्यों नहीं करने दी जा रही? मजबूरन उन्हें वीरवार को फिर से धरना देना पड़ा है। वे 10-12 साल से काम कर रहे है। उन्हें तीन साल की पॉलिसी के तहत नियमित किया जाना चाहिए।
कारण बताओ नोटिस जारी
जिला प्रशासन ने 39 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा है। इसमें कहा गया है कि बिना किसी छुट्टी के गैरहाजिर रहने के कारण क्यों न आपकी नौकरी को रद्द कर दिया जाए?
आउटसॉर्सिंग के तहत टेंडर आमंत्रित
जो ऑपरेटर्स यहां काम कर रहे थे, वे सभी डेली वेजिज पर हैं। 10 दिनों से काम पर नहीं आए। जिस कारण इन्हें अलाउड नहीं किया जाएगा। आउटसॉर्सिंग के तहत टेंडर आमंत्रित कर लिए गए हैं। शुक्रवार को डीआरओ की मौजूदगी में टेंडर खोला जाएगा। जितनी संख्या में पहले कर्मचारी रखे गए थे, उससे भी कम संख्या में कर्मचारियों को रखकर काम चलाया जाएगा।
-नरहरि सिंह बांगड़, एसडीएम।
डीसी एन के सोलंकी- सीधी बातचीत
सवाल- कंप्यूटर ऑपरेटर्स की हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन द्वारा क्या फैसला लिया गया है?
उत्तर- हमने अपने लोगों को ट्रेंड कर दिया है। प्रयास किया जा रहा है कि लोगों के काम हो जाएं।
सवाल-लोगों को परशानी आ रही है। तैनात लोगों से काम नहीं चल रहा है?
उत्तर- प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
सवाल--ऑपरेटर्स का पंचकूला में धरना समाप्त हो गया है। वीरवार को ऑपरेटर्स आए, लेकिन ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने दी गई? क्या इन 39 ऑपरेटर्स को हटाया जा रहा है?
उत्तर-जिला प्रशासन द्वारा ऑपरेटर्स को ज्वाइनिंग के लिए समय दिया गया था। तय समय पर ऑपरेटर्स ने ज्वाइन नहीं किया। इनके व्यवहार की समीक्षा करके ही फैसला लिया जाएगा कि किसे काम पर लेना है, किसे नहीं। ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ की नीति के तहत फैसला लिया जाएगा। लोगों को परेशान करने का हक किसी को नहीं है।