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Kaithal News: 32 साल बाद भी बे-नक्शा शहर, नोटिस तक सीमित अफसर
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नगर परिषद कार्यालय में काउंटर पर काम कराते शहरवासी। संवाद
कैथल। नगर परिषद के गठन को करीब 32 साल का लंबा समय बीत चुका है लेकिन शहर आज भी बे-नक्शा है। शहर के करीब 80 से 85 प्रतिशत भवनों के नक्शे आज तक पास ही नहीं हुए। परिषद की भवन ब्रांच की टीमें कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभा रही हैं। इस पूरे महीने में महज 15 नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस देने के बाद की कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। शहर में नक्शा पास न कराने के पीछे सबसे बड़ा कारण नगर परिषद के अधिकारियों की ढील और जटिल प्रक्रिया है। कोई भी आम नागरिक खुद से नक्शा पास कराने के लिए आगे नहीं आ रहा है। नियमों के अनुसार, नक्शा पास कराने के लिए संबंधित एरिया के कलेक्टर रेट की पांच प्रतिशत फीस चुकानी पड़ती है। इसके अलावा विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज), श्रमिक कल्याण उपकर और ड्यूटी फीस समेत कई अन्य चार्ज शामिल हैं। एक छोटे भवन का नक्शा पास कराने में भी कम से कम 10 से 15 हजार या इससे अधिक का खर्च आता है। इस खर्च और विभागीय चक्करों से बचने के लिए लोग बिना अनुमति के ही निर्माण कार्य शुरू कर देते हैं।
800 से ज्यादा भवन अवैध, करोड़ों का नुकसान
शहर के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों में 800 से ज्यादा व्यावसायिक भवन बिना किसी स्वीकृत नक्शे के बने हुए हैं। इसके अलावा रिहायशी भवन भी इसमें शामिल हैं। इन बहुमंजिला इमारतों में व्यापार हो रहा है लेकिन नगर परिषद के पास इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। व्यावसायिक भवनों से मिलने वाली भारी-भरकम फीस न आने के कारण नगर परिषद को हर साल करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस राजस्व का उपयोग शहर की सड़कों, नालियों और स्ट्रीट लाइटों को सुधारने में हो सकता था, जो अब ठप पड़ा है।
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अवैध छज्जे और अतिक्रमण से सिकुड़ रहीं सड़कें
भवन संचालकों ने न केवल बिना नक्शे के निर्माण किया बल्कि अपनी मर्जी से सड़कों पर अवैध छज्जे निकाल लिए हैं। सड़कों पर किए गए इस अतिक्रमण के कारण शहर के मुख्य मार्ग सिकुड़ गए हैं। बाजारों में पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का इन संकरी गलियों में घुसना नामुमकिन है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।
बिना नक्शा पास कराए बने भवन संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए अधिकारियों की बैठक भी ली गई है। इस पर योजना बनाकर कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।- कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त
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नोटिस देने के बाद की कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। शहर में नक्शा पास न कराने के पीछे सबसे बड़ा कारण नगर परिषद के अधिकारियों की ढील और जटिल प्रक्रिया है। कोई भी आम नागरिक खुद से नक्शा पास कराने के लिए आगे नहीं आ रहा है। नियमों के अनुसार, नक्शा पास कराने के लिए संबंधित एरिया के कलेक्टर रेट की पांच प्रतिशत फीस चुकानी पड़ती है। इसके अलावा विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज), श्रमिक कल्याण उपकर और ड्यूटी फीस समेत कई अन्य चार्ज शामिल हैं। एक छोटे भवन का नक्शा पास कराने में भी कम से कम 10 से 15 हजार या इससे अधिक का खर्च आता है। इस खर्च और विभागीय चक्करों से बचने के लिए लोग बिना अनुमति के ही निर्माण कार्य शुरू कर देते हैं।
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800 से ज्यादा भवन अवैध, करोड़ों का नुकसान
शहर के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों में 800 से ज्यादा व्यावसायिक भवन बिना किसी स्वीकृत नक्शे के बने हुए हैं। इसके अलावा रिहायशी भवन भी इसमें शामिल हैं। इन बहुमंजिला इमारतों में व्यापार हो रहा है लेकिन नगर परिषद के पास इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। व्यावसायिक भवनों से मिलने वाली भारी-भरकम फीस न आने के कारण नगर परिषद को हर साल करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस राजस्व का उपयोग शहर की सड़कों, नालियों और स्ट्रीट लाइटों को सुधारने में हो सकता था, जो अब ठप पड़ा है।
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अवैध छज्जे और अतिक्रमण से सिकुड़ रहीं सड़कें
भवन संचालकों ने न केवल बिना नक्शे के निर्माण किया बल्कि अपनी मर्जी से सड़कों पर अवैध छज्जे निकाल लिए हैं। सड़कों पर किए गए इस अतिक्रमण के कारण शहर के मुख्य मार्ग सिकुड़ गए हैं। बाजारों में पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का इन संकरी गलियों में घुसना नामुमकिन है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।
बिना नक्शा पास कराए बने भवन संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए अधिकारियों की बैठक भी ली गई है। इस पर योजना बनाकर कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।- कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त

नगर परिषद कार्यालय में काउंटर पर काम कराते शहरवासी। संवाद