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मिल में दिखाया गया है फर्जी तरीके से 6.63 करोड़ का रिपेयर खर्च
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:36 PM IST
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फर्जी तरीके से मिल में दिखाया गया है 6.63 करोड़ का रिपेयर खर्च
फोटो नंबर-25
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। भारतीय किसान संघ की बैठक किसान भवन में हुई। जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डा. गुलतान सिंह ने की व मुख्य रूप से प्रदेश प्रवक्ता रणदीप सिंह आर्य ने भग लिया। बैठक में शुगर मिल कैथल की कार्यप्रणाली को लेकर रोष प्रकट किया गया। प्रवक्ता आर्य ने बताया कि शुगर मिल अधिकारियों ने अपने चहेतों के लिए फर्जी तरीके से अधिक गन्ना बांड बनाए हुए है और सामान्य किसानों के कम बांड होने के कारण उन्हें अपना गन्ना अन्य राज्यों में कम भाव पर बेचना पड़ रहा है। मिल की सही तरीके से रिपेयर ना करने व क्वालिटी का स्पेयर पार्ट ना लगाने के कारण मिल सीजन के दौरान दो बार बंद भी हो चुका है। मिल प्रशासन द्वारा 20 दिनों में फर्जीवाड़ा करते हुए 6.63 करोड़ रुपए रिपेयर खर्च दिखाया गया है। इतनी रकम खर्च के बाद भी मिल बंद हो जाता है। जिलाध्यक्ष गुलतान ने बताया कि मिल के क्षेत्र में गन्ने का कुल रकबा 21496 एकड़ है। जिसकी औसतन प्रति एकड़ 300 क्विंटल है और कुल गन्ना लगभग 66 लाख क्विंटल बनता है, जबकि मिल द्वारा 225 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित किया हुआ है, जो लगभग 50 लाख क्विंटल बनता है। किसानों को लगभग 16 लाख क्विंटल गन्ना दूसरे मिलों में बेचना पड़ रहा है। कैथल मिल सही प्रबंधन ना होने और भ्रष्टाचार के चलते हर वर्ष नुकसान में रहता है। आरटीआई के तहत पता चला है कि अब भी मिल 308 करोड़ रुपए नुकसान में चल रहा है। किसान संघ ने मांग करते हुए कहा कि सभी मिलों का केंद्रीकरण किया जाना चाहिए। जिस मिल में गन्ना अधिक हो तो किसान दूसरे मिल में डाल सके। शुगर मिल प्रबंधक पर आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि प्रबंधक ना तो फोन पर बात करता है और ना ही मिलता है। जिस बारे डीसी कैथल को भी अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि 29 मार्च को शुगर मिल में गन्ना किसानों की महापंचायत बुलाई गई है। जिसमें किसान संघ के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भाग लेंगे। बैठक में दयाल सिंह खुराना, दीपक वालिया, महाबीर धौंस, महेंद्र फतेहपुर, सुखविंद्र फतेहपुर व बलविंद्र फरल भी मौजूद थे।
फोटो नंबर-25
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। भारतीय किसान संघ की बैठक किसान भवन में हुई। जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डा. गुलतान सिंह ने की व मुख्य रूप से प्रदेश प्रवक्ता रणदीप सिंह आर्य ने भग लिया। बैठक में शुगर मिल कैथल की कार्यप्रणाली को लेकर रोष प्रकट किया गया। प्रवक्ता आर्य ने बताया कि शुगर मिल अधिकारियों ने अपने चहेतों के लिए फर्जी तरीके से अधिक गन्ना बांड बनाए हुए है और सामान्य किसानों के कम बांड होने के कारण उन्हें अपना गन्ना अन्य राज्यों में कम भाव पर बेचना पड़ रहा है। मिल की सही तरीके से रिपेयर ना करने व क्वालिटी का स्पेयर पार्ट ना लगाने के कारण मिल सीजन के दौरान दो बार बंद भी हो चुका है। मिल प्रशासन द्वारा 20 दिनों में फर्जीवाड़ा करते हुए 6.63 करोड़ रुपए रिपेयर खर्च दिखाया गया है। इतनी रकम खर्च के बाद भी मिल बंद हो जाता है। जिलाध्यक्ष गुलतान ने बताया कि मिल के क्षेत्र में गन्ने का कुल रकबा 21496 एकड़ है। जिसकी औसतन प्रति एकड़ 300 क्विंटल है और कुल गन्ना लगभग 66 लाख क्विंटल बनता है, जबकि मिल द्वारा 225 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित किया हुआ है, जो लगभग 50 लाख क्विंटल बनता है। किसानों को लगभग 16 लाख क्विंटल गन्ना दूसरे मिलों में बेचना पड़ रहा है। कैथल मिल सही प्रबंधन ना होने और भ्रष्टाचार के चलते हर वर्ष नुकसान में रहता है। आरटीआई के तहत पता चला है कि अब भी मिल 308 करोड़ रुपए नुकसान में चल रहा है। किसान संघ ने मांग करते हुए कहा कि सभी मिलों का केंद्रीकरण किया जाना चाहिए। जिस मिल में गन्ना अधिक हो तो किसान दूसरे मिल में डाल सके। शुगर मिल प्रबंधक पर आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि प्रबंधक ना तो फोन पर बात करता है और ना ही मिलता है। जिस बारे डीसी कैथल को भी अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि 29 मार्च को शुगर मिल में गन्ना किसानों की महापंचायत बुलाई गई है। जिसमें किसान संघ के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भाग लेंगे। बैठक में दयाल सिंह खुराना, दीपक वालिया, महाबीर धौंस, महेंद्र फतेहपुर, सुखविंद्र फतेहपुर व बलविंद्र फरल भी मौजूद थे।