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बिजली निगम की लापरवाही : मिलर्स को थमा दिए ढाई लाख के नेटिस
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बिजली निगम की व्यापारियों के साथ की जा रही जबरदस्ती सामने आई है। निगम के अधिकारियों की लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए निगम ने शहर के व्यापारियों को 2 से 2.5 लाख रुपये तक के नोटिस जारी किए हैं। जिसमें वर्ष 2015 से लेकर अब तक की बिलों की राशि में अंतर बताते हुए यह राशि जमा करवाने को कहा गया है। जबकि आरा एसोसिएशन का कहना है कि उन्हें जितने बिल मिले, उन्होंने भर दिए। अब विभाग केडब्ल्यूएच की बजाए केवीएच के तहत बिल भरने को कहा है। जिसमें बिल की राशि बढ़ जाती है। विभाग का कहना है कि यह निर्देश एक अप्रैल 2015 को लागू हुए थे। तो सवाल उठता है कि विभाग के अधिकारियों ने उस समय इन निर्देशों की पालना क्यों नहीं किया।
बिजली निगम कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए आरा मिल एसोसिएशन के सदस्यों भूषण बिहारी, नत्थू राम जिंदल, राजेश गर्ग, सुरेंद्र आरे वाले, जोगी राम, जयदेव, पप्पू, कर्मचंद, राजेश कलायत, ईश्वर सिंह, डीसी आरेवाले, पुरुषोत्तम, बलविंद्र सिंह, रबड़ फेक्टरी से राजकुमार मित्तल ने रोष जताया।
आरा मिल एसोसिएशन प्रधान पवन कुमार ने कहा कि यह निगम के अधिकारियों की लापरवाही है कि तीन साल पहले जारी हुए निर्देश लागू नहीं किए। हर 6 माह में कुरुक्षेत्र से आने वाली निगम की टीम उनके मीटरों को ओके रिपोर्ट देती है। हर बिल में निगम ओके लिखकर भेजता है। बिल में जितनी राशि बताई गई, व्यापारियों ने भर दी। अब पिछले तीन साल के बिलों के लिए निगम 2 से लेकर 2.50 लाख रुपये की राशि व्यापारियों से वसूलना चाहता है। यह उद्योग को चौपट करने की साजिश है। पहले ही काम धंधे मंदे हैं। महंगी बिजली खरीदने के चलते हर माह 10 से 15 हजार रुपये के बिल भरते हैं। अब व्यापारी एकदम से इतनी बड़ी राशि कहां से जमा करवाएं। इस संबंध में वे लोग सीएमडी शत्रुजीत कपूर सहित डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों से मिले और उन्होंने आश्वासन दिया था कि उनके ये नोटिस रद्द हो जाएंगे। लेकिन अब ना जाने क्या दबाव आया कि आनन-फानन में 6 किश्तों में नोटिस की राशि भरने को कहा गया है। निगम उन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा, जिसने समय पर निर्देशों का पालन नहीं किया। व्यापारी अब इतनी बड़ी राशि कैसे जमा करवाएं।
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किश्तों में जारी हो रहे हैं नोटिस : व्यापारियों ने कहा कि निगम के अधिकारी चतुराई से कभी 10 तो कभी 20 उद्योगों को नोटिस भेज रहे हैं, ताकि कोई ना कोई व्यापारी यह राशि भर दे और उनके लापरवाह अधिकारी बच जाएं। केवल और केवल अपनी कमी छिपा कर व्यापारियों से वसूली का प्रयास हो रहा है।
प्रधान पवन कुमार ने कहा कि अब सभी व्यापारियों ने फैसला लिया है कि जब पहले ही केवीएच के हिसाब से ही बिल भरवा लिए गए हैं तो अब वे यह नोटिस की राशि जमा नहीं करवाएंगे। सोमवार को वे निगम में अपने चालू माह के बिल भरने गए थे, जहां एसडीओ मनोज कुंडू ने फोन पर स्पष्ट इंकार कर दिया कि नोटिस की राशि जमा करवाए बिना चालू बिल नहीं भरे जाएंगे। जिस कारण अब उन्होंने फैसला लिया है कि वे इन नोटिसों की राशि रद्द हुए बिना बिल ही नहीं भरेंगे। चाहे उनके कनेक्शन ही क्यों ना काट दिए जाएं।
व्यापारियों के आग्रह पर बोर्ड की बैठक में 6 किश्तों में राशि जमा करवाने के लिए कह दिया गया है। अब पता नहीं क्यों व्यापारी विरोध कर रहे हैं। रही बात अधिकारियों की जवाबदेही की तो पता लगाया जा रहा है कि उस समय किस अधिकारी की लापरवाही रही, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एमएस धीमान, कार्यकारी अभियंता, विद्युत निगम, कैथल।
बिजली निगम की लापरवाही : मिलर्स को थमा दिए ढाई लाख के नोटिस
बिना नोटिस राशि जमा करवाए एसडीओ ने बिल भरवाने से किया इंकार
आरा मिलर्स एसोसिएशन ने किया एलान- जब तक जारी किए गए नोटिस की राशि माफ नहीं होती, बिल नहीं भरेंगे
गलती विभागीय अधिकारियों की खामियाजा मिलर्स क्यों भुगतें
कहा-10 हजार रुपये प्रति माह आने वाले बिल की एवज में अब ढाई लाख रुपये कहां से भरें
अधिकारी नहीं मिले कार्यालय में, सीएम विंडो पर शिकायत देने का ऐलान किया
फोटो संख्या-10
कैथल। बिजली निगम की व्यापारियों के साथ की जा रही जबरदस्ती सामने आई है। निगम के अधिकारियों की लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए निगम ने शहर के व्यापारियों को 2 से 2.5 लाख रुपये तक के नोटिस जारी किए हैं। जिसमें वर्ष 2015 से लेकर अब तक की बिलों की राशि में अंतर बताते हुए यह राशि जमा करवाने को कहा गया है। जबकि आरा एसोसिएशन का कहना है कि उन्हें जितने बिल मिले, उन्होंने भर दिए। अब विभाग केडब्ल्यूएच की बजाए केवीएच के तहत बिल भरने को कहा है। जिसमें बिल की राशि बढ़ जाती है। विभाग का कहना है कि यह निर्देश एक अप्रैल 2015 को लागू हुए थे। तो सवाल उठता है कि विभाग के अधिकारियों ने उस समय इन निर्देशों की पालना क्यों नहीं किया।
बिजली निगम कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए आरा मिल एसोसिएशन के सदस्यों भूषण बिहारी, नत्थू राम जिंदल, राजेश गर्ग, सुरेंद्र आरे वाले, जोगी राम, जयदेव, पप्पू, कर्मचंद, राजेश कलायत, ईश्वर सिंह, डीसी आरेवाले, पुरुषोत्तम, बलविंद्र सिंह, रबड़ फेक्टरी से राजकुमार मित्तल ने रोष जताया।
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आरा मिल एसोसिएशन प्रधान पवन कुमार ने कहा कि यह निगम के अधिकारियों की लापरवाही है कि तीन साल पहले जारी हुए निर्देश लागू नहीं किए। हर 6 माह में कुरुक्षेत्र से आने वाली निगम की टीम उनके मीटरों को ओके रिपोर्ट देती है। हर बिल में निगम ओके लिखकर भेजता है। बिल में जितनी राशि बताई गई, व्यापारियों ने भर दी। अब पिछले तीन साल के बिलों के लिए निगम 2 से लेकर 2.50 लाख रुपये की राशि व्यापारियों से वसूलना चाहता है। यह उद्योग को चौपट करने की साजिश है। पहले ही काम धंधे मंदे हैं। महंगी बिजली खरीदने के चलते हर माह 10 से 15 हजार रुपये के बिल भरते हैं। अब व्यापारी एकदम से इतनी बड़ी राशि कहां से जमा करवाएं। इस संबंध में वे लोग सीएमडी शत्रुजीत कपूर सहित डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों से मिले और उन्होंने आश्वासन दिया था कि उनके ये नोटिस रद्द हो जाएंगे। लेकिन अब ना जाने क्या दबाव आया कि आनन-फानन में 6 किश्तों में नोटिस की राशि भरने को कहा गया है। निगम उन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा, जिसने समय पर निर्देशों का पालन नहीं किया। व्यापारी अब इतनी बड़ी राशि कैसे जमा करवाएं।
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किश्तों में जारी हो रहे हैं नोटिस : व्यापारियों ने कहा कि निगम के अधिकारी चतुराई से कभी 10 तो कभी 20 उद्योगों को नोटिस भेज रहे हैं, ताकि कोई ना कोई व्यापारी यह राशि भर दे और उनके लापरवाह अधिकारी बच जाएं। केवल और केवल अपनी कमी छिपा कर व्यापारियों से वसूली का प्रयास हो रहा है।
प्रधान पवन कुमार ने कहा कि अब सभी व्यापारियों ने फैसला लिया है कि जब पहले ही केवीएच के हिसाब से ही बिल भरवा लिए गए हैं तो अब वे यह नोटिस की राशि जमा नहीं करवाएंगे। सोमवार को वे निगम में अपने चालू माह के बिल भरने गए थे, जहां एसडीओ मनोज कुंडू ने फोन पर स्पष्ट इंकार कर दिया कि नोटिस की राशि जमा करवाए बिना चालू बिल नहीं भरे जाएंगे। जिस कारण अब उन्होंने फैसला लिया है कि वे इन नोटिसों की राशि रद्द हुए बिना बिल ही नहीं भरेंगे। चाहे उनके कनेक्शन ही क्यों ना काट दिए जाएं।
व्यापारियों के आग्रह पर बोर्ड की बैठक में 6 किश्तों में राशि जमा करवाने के लिए कह दिया गया है। अब पता नहीं क्यों व्यापारी विरोध कर रहे हैं। रही बात अधिकारियों की जवाबदेही की तो पता लगाया जा रहा है कि उस समय किस अधिकारी की लापरवाही रही, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एमएस धीमान, कार्यकारी अभियंता, विद्युत निगम, कैथल।
बिजली निगम की लापरवाही : मिलर्स को थमा दिए ढाई लाख के नोटिस
बिना नोटिस राशि जमा करवाए एसडीओ ने बिल भरवाने से किया इंकार
आरा मिलर्स एसोसिएशन ने किया एलान- जब तक जारी किए गए नोटिस की राशि माफ नहीं होती, बिल नहीं भरेंगे
गलती विभागीय अधिकारियों की खामियाजा मिलर्स क्यों भुगतें
कहा-10 हजार रुपये प्रति माह आने वाले बिल की एवज में अब ढाई लाख रुपये कहां से भरें
अधिकारी नहीं मिले कार्यालय में, सीएम विंडो पर शिकायत देने का ऐलान किया
फोटो संख्या-10