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जिले में लकड़ी की जगह नंदीशाला के ईंधन से होगा अंतिम संस्कार
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:22 AM IST
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जिले में लकड़ी की जगह नंदीशाला के ईंधन से होगा अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बेसहारा पशुओं के लिए बनाई गई गांव भैणी माजरा की नंदीशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें गायों के गोबर से लकड़ी जैसा ईंधन(लकड़ी की गिट्टी जैसा) तैयार किया जाएगा। जिसका प्रयोग अंतिम संस्कार के लिए किया जाएगा। गाय के गोबर से अंतिम संस्कार से जहां लोगों की धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी, वहीं इसकी बिक्री से नंदीशाला को आय होगी। शहर में सड़कों से बेसहारा पशुओं को हटाकर नंदीशाला ले जाया गया है, जिसका संचालन इस समय दान की राशि से हो रहा है। जिसमें फंड की कमी आड़े आ रही है।
कोयले जितनी ईंधन वैल्यू का उत्पाद बनता है इस स्कीम में:-इस प्रोजेक्ट में गोबर से एक मशीन के माध्यम से लकड़ीनुमा उत्पाद बनाया जाता है। जिसकी ईंधन वैल्यू कोयले जितनी होती है, लेकिन यह कोयले से सस्ता मिल जाता है। लगभग 15 से 20 लाख रुपये इसकी मशीनें लगाने का खर्च आता है और करीब 2 टन गोबर से लगभग इतने का ही ईंधन प्राप्त किया जा सकता है।
गो सेवा आयोग से ली जाएगी मंजूरी-: कैथल नंदीशाला के प्रबंध का कार्य संभाल रहे एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि इस योजना के लिए प्रोजेक्ट बनाकर गो सेवा आयोग को भेजा जा रहा है। वहां से मंजूरी मिली तो काफी अच्छा रहेगा। यदि मंजूरी नहीं मिलीं तो गोशाला में लोगों के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा, ताकि गोशाला को आमदनी हो और गायों के लिए अच्छे प्रबंध किए जा सकें।
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धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी:-गाय हिंदू समाज में पूजनीय है। इसलिए इसके गोबर से बनी लकड़ी(ईंधन) में यदि अंतिम संस्कार होगा तो लोगों की धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी। एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में श्मशान घाट प्रबंधक समितियों से बातचीत की गई है, ताकि वे इस उत्पाद को लें और लकड़ी की जगह इसका प्रयोग करें। इससे जहां नंदीशाला में लाभ होगा। वहीं लकड़ियों की बचत होगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पेड़ों को बचाया जा सकेगा।
बिजली बनाने की भी है योजना:-नंदीशाला में इस प्रोजेक्ट के साथ-साथ बिजली बनाए जाने की भी योजना है। बायोगैस प्लांट लगाकर उसमें से करीब 50 किलोवाट बिजली बनाने वाला जेनरेटर लगाया जाएगा। जिससे सरप्लस बिजली पैदा होने पर ग्रिड में बेची जाएगी। इससे भी नंदीशाला के खर्च को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बेसहारा पशुओं के लिए बनाई गई गांव भैणी माजरा की नंदीशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें गायों के गोबर से लकड़ी जैसा ईंधन(लकड़ी की गिट्टी जैसा) तैयार किया जाएगा। जिसका प्रयोग अंतिम संस्कार के लिए किया जाएगा। गाय के गोबर से अंतिम संस्कार से जहां लोगों की धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी, वहीं इसकी बिक्री से नंदीशाला को आय होगी। शहर में सड़कों से बेसहारा पशुओं को हटाकर नंदीशाला ले जाया गया है, जिसका संचालन इस समय दान की राशि से हो रहा है। जिसमें फंड की कमी आड़े आ रही है।
कोयले जितनी ईंधन वैल्यू का उत्पाद बनता है इस स्कीम में:-इस प्रोजेक्ट में गोबर से एक मशीन के माध्यम से लकड़ीनुमा उत्पाद बनाया जाता है। जिसकी ईंधन वैल्यू कोयले जितनी होती है, लेकिन यह कोयले से सस्ता मिल जाता है। लगभग 15 से 20 लाख रुपये इसकी मशीनें लगाने का खर्च आता है और करीब 2 टन गोबर से लगभग इतने का ही ईंधन प्राप्त किया जा सकता है।
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गो सेवा आयोग से ली जाएगी मंजूरी-: कैथल नंदीशाला के प्रबंध का कार्य संभाल रहे एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि इस योजना के लिए प्रोजेक्ट बनाकर गो सेवा आयोग को भेजा जा रहा है। वहां से मंजूरी मिली तो काफी अच्छा रहेगा। यदि मंजूरी नहीं मिलीं तो गोशाला में लोगों के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा, ताकि गोशाला को आमदनी हो और गायों के लिए अच्छे प्रबंध किए जा सकें।
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धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी:-गाय हिंदू समाज में पूजनीय है। इसलिए इसके गोबर से बनी लकड़ी(ईंधन) में यदि अंतिम संस्कार होगा तो लोगों की धार्मिक आस्था भी जुड़ेगी। एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में श्मशान घाट प्रबंधक समितियों से बातचीत की गई है, ताकि वे इस उत्पाद को लें और लकड़ी की जगह इसका प्रयोग करें। इससे जहां नंदीशाला में लाभ होगा। वहीं लकड़ियों की बचत होगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पेड़ों को बचाया जा सकेगा।
बिजली बनाने की भी है योजना:-नंदीशाला में इस प्रोजेक्ट के साथ-साथ बिजली बनाए जाने की भी योजना है। बायोगैस प्लांट लगाकर उसमें से करीब 50 किलोवाट बिजली बनाने वाला जेनरेटर लगाया जाएगा। जिससे सरप्लस बिजली पैदा होने पर ग्रिड में बेची जाएगी। इससे भी नंदीशाला के खर्च को पूरा करने में मदद मिलेगी।