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हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने शीश कटवाया पर झुकने नहीं दिया
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:58 PM IST
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‘धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने शीश कटवाया पर झुकने नहीं दिया’
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गुरमत प्रचार सेवा सोसाइटी की ओर से हिंद दी चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर के शहीदी पर्व की याद में रविवार को गुरुद्वारा नीम साहिब में महान कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। पंजाब हरियाणा व दिल्ली से आए प्रसिद्ध रागी व टाढ़ी जत्थों ने शब्द कीर्तन कर गुरबाणी का गुणगान किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में माथा टेका। दिनभर कीर्तन दरबार में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी दविंद्र सिंह ने प्रभु बिना न जानिए सूरज किरण मिले। श्री गुरु तेग बहादुर की शहादत को याद करते हुए उन्होंने शीश दिया पर शीश झुकने नहीं दिया, शब्द भी पेश किया। रागी जत्था अमरीक सिंह अबोहर वाले ने भी शब्द कीर्तन नौंवी पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर के इतिहास के बारे में संगत को अवगत कराया। गुरु जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए शहादत दी। गुरु गोबिंद सिंह और उनके चारों साहबजादों ने भी उनके पदचिन्हों पर चलते हुए सर्वस्व दान कर दिया। जो कौम अपने गुरुओं की शहादतों को याद रखती है वह कभी खत्म नहीं होती।
गुरुद्वारा नीम साहिब के हेड ग्रंथी साहिब सिंह, गुरुद्वारा मंजी साहिब रागी जत्था जसविंद्र सिंह व गुरप्रीत सिंह ने भी शबद कीर्तन किया। कथावाचक साहब सिंह गुरु इतिहास बारे बताया तो गुरु तेग बहादुर खालसा पब्लिक स्कूल के बच्चों ने शबद कीर्तन कर सब का मन मोह लिया। गुरमत प्रचार सेवा सोसाइटी कैथल की ओर से डा सुरेंद्र सिंह ने भी सिख संगत को गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने और अमृत छक गुरु के सिख सजने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गुरदीप सिंह मलिक, दपिंद्र सिंह कोहली, बलदेव सिंह चीमा, कशमीर सिंह, हर्षदीप सिंह, सुखविंद्र सिंह, लखविंद्र सिंह, अमरीक सिंह व शमशेर सिंह मौजूद रहे।
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हिद दी चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी पर्व की याद में कीर्तन समागम का आयोजन
फोटो नंबर-6,7
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गुरमत प्रचार सेवा सोसाइटी की ओर से हिंद दी चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर के शहीदी पर्व की याद में रविवार को गुरुद्वारा नीम साहिब में महान कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। पंजाब हरियाणा व दिल्ली से आए प्रसिद्ध रागी व टाढ़ी जत्थों ने शब्द कीर्तन कर गुरबाणी का गुणगान किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में माथा टेका। दिनभर कीर्तन दरबार में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी दविंद्र सिंह ने प्रभु बिना न जानिए सूरज किरण मिले। श्री गुरु तेग बहादुर की शहादत को याद करते हुए उन्होंने शीश दिया पर शीश झुकने नहीं दिया, शब्द भी पेश किया। रागी जत्था अमरीक सिंह अबोहर वाले ने भी शब्द कीर्तन नौंवी पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर के इतिहास के बारे में संगत को अवगत कराया। गुरु जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए शहादत दी। गुरु गोबिंद सिंह और उनके चारों साहबजादों ने भी उनके पदचिन्हों पर चलते हुए सर्वस्व दान कर दिया। जो कौम अपने गुरुओं की शहादतों को याद रखती है वह कभी खत्म नहीं होती।
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गुरुद्वारा नीम साहिब के हेड ग्रंथी साहिब सिंह, गुरुद्वारा मंजी साहिब रागी जत्था जसविंद्र सिंह व गुरप्रीत सिंह ने भी शबद कीर्तन किया। कथावाचक साहब सिंह गुरु इतिहास बारे बताया तो गुरु तेग बहादुर खालसा पब्लिक स्कूल के बच्चों ने शबद कीर्तन कर सब का मन मोह लिया। गुरमत प्रचार सेवा सोसाइटी कैथल की ओर से डा सुरेंद्र सिंह ने भी सिख संगत को गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने और अमृत छक गुरु के सिख सजने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गुरदीप सिंह मलिक, दपिंद्र सिंह कोहली, बलदेव सिंह चीमा, कशमीर सिंह, हर्षदीप सिंह, सुखविंद्र सिंह, लखविंद्र सिंह, अमरीक सिंह व शमशेर सिंह मौजूद रहे।
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हिद दी चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी पर्व की याद में कीर्तन समागम का आयोजन
फोटो नंबर-6,7