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श्रीराम अनंत हैं, उनके गुण अनंत हैं : संतोष

Sat, 13 Apr 2019 12:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2019 12:43 AM IST
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श्रीराम अनंत हैं, उनके गुण अनंत हैं : संतोष
पूंडरी। पूंडरीक तीर्थ पर श्रीराम मंदिर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में जनकल्याणनार्थ के लिए श्रीराम कथा के पांचवें दिन मुख्य यजमान के तौर पर दिल्ली से अमित गर्ग ने सपरिवार भाग लिया। श्रीराम कथा वाचक संतोष के मुखारविंद से शुरू हुई। कथा के पांचवें दिन उन्होंने कथा का महत्व बताया, भगवान के विभिन्न रूपों के बारे बताया। इसके अलावा कई रोचक प्रसंग व भजन सुनाए। श्रीराम जी अनंत है, उनके गुण अनंत है, जन्म कर्म और नाम भी अनंत है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के वनवास के बाद दशरथ ने राम बिरह में अपने शरीर का त्याग कर दिया। भरत-शत्रुघ्न ननिहाल से आए हैं। वशिष्ठ ने भरत से कहा कि चौदह वर्ष तक आप सिंहासन संभालो। इस पर भरत ने कहा कि मेरी मां कैकेयी ने केवल मेरे नाम का प्रस्ताव मात्र दिया तो सारी अयोध्या में भूचाल आ गया। पिता जी चल बसे, मां विधवा हो गई और भैया राम को वनवास हो गया। यदि आप मुझे सिंहासन पर बैठा दोगे तो ये पृथ्वी पाताल में चली जाएगी। ऐसी भक्ति कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगी जैसी भरत ने अपने भाई के प्रति दिखाई और स्वयं सिंहासन पर न बैठकर श्रीराम की खड़ाऊ को रखा। इस मौके पर शहर की महिलाएं भारी संख्या में कथा सुनने पहुंच रही है। इस मौके पर रविदत्त शास्त्री, रूप सिंह सैनी, राजकुमार गर्ग सहित शहरवासी मौजूद रहे।
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