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बचपन में चाचा के साथ जाती थी अखाड़े में, 9 साल की उम्र में कुश्ती सीखना किया शुरु

Wed, 27 Feb 2019 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 27 Feb 2019 12:36 AM IST
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बचपन में चाचा के साथ जाती थी अखाड़े में, 9 साल की उम्र में कुश्ती सीखना किया शुरु
चाचा की उंगली पकड़ स्वीटी ने नौ साल की उम्र में सीखना शुरू किया कुश्ती
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17 वर्ष की स्वीटी मलिक तीन बार बनी एशियन चैंपियन, आस पड़ोस वाले मारते थे ताने, लड़की है नहीं लड़ सकती कुश्ती
ज्योति व मंजू दो चचेरी बहनें भी अखाड़े में दिखा रही दमखम
फोटो नंबर-03 व 04
कमल बहल
कैथल। चाचा की उंगली पकड़ महज 17 साल की उम्र में हिसार की स्वीटी तीन बार एशियन चैंपियन बन चुकी हैं। कैथल में आयोजित प्रदेश स्तरीय मुकाबले में स्वीटी खूब मेहनत कर रही हैं। हिसार के उमरा गांव की महिला पहलवान स्वीटी मलिक अपने पहलवान चाचा के साथ 9 वर्ष की उम्र में कुश्ती के अखाड़े में जाती थी। इसके बाद उसका धीरे धीरे कुश्ती की तरफ रुझान बढ़ा।
स्वीटी ने बताया कि उसके पिता एक छोटे से किसान हैं। वे खेतीबाड़ी का काम कर अपना गुजारा करते हैं। स्वीटी ने बताया कि में बचपन में मुझे यह मालूम नहीं था कि पहलवानी करना इतना मुश्किल है। लेकिन चाचा को देखकर पैदा हुए शौक ने कुश्ती ने मुझे एक नई पहचान दिलाई है। मेरे परिवार वालों ने भी मुझे काफी सपोर्ट किया है। जिस कारण मैंने तीन बार एशिया के पहलवानों के सामने दमखम दिखा तीन बार गोल्ड मेडल जता है। इसके अलावा सब जूनियर में भी दो बार चैंपियन बनी।
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आस पड़ोस वाले मारते थे ताने, लड़की है नहीं कर सकती कुश्ती, ज्योति व मंजू दो चचेरी बहनें भी अखाड़े में दिखा रही दमखम : उसकी दो चचेरी बहनें भी अखाड़े में अपना दमखम दिखा रही है। मंजू ने बताया कि उसे पहलवानी करते हुए सात साल हो गए हैं। जिस समय पहलवानी शुरू की तो आस पड़ोस के लोग उन्हें लड़की होने के ताने मारते थे और परिवारवालों को कहते थे कि यह लड़की है। इसे कुश्ती सिखाने का क्या लाभ होगा। लेकिन परिवार वालों ने उनकी एक न सुनी जिस कारण आज इंटरनेशनल खिलाड़ी बन कर अपने जिला व परिवार का नाम रोशन कर रही है। उसने बताया कि वह चार बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता खेल चुकी है। जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रांज व एशिया चैंपियनशिप में दो बार सिल्वर मेडल जीत चुकी है। इसी प्रकार से मंजू की चचेरी बहन ज्योति भी अखाड़े में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। वह भी तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी है।
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